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76 हजार के लालच में 76 लाख खातों में कराए ट्रांसफर, मास्टरमाइंड का सुराग नहीं

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जबलपुर : जबलपुर क्राइम ब्रांच पुलिस ने सायबर फ्रॉड में शामिल दो लोगों को लखनऊ से पकड़ा है. इन लोगों पर आरोप है कि जबलपुर के एक बुजुर्ग से गैरकानूनी तरीके से वसूली गई रकम अपने खाते में जमा करवाई. एक परसेंट के लालच में इन लोगों ने बैंक खाते किराए से दिए. जिस बुजुर्ग को फंसाया गया, उनसे कहा गया था कि आप ह्यूमन ट्रैफिकिंग के रैकेट में शामिल हो और आपके अकाउंट में पैसा आता है.

जालसाज बना क्राइम ब्रांच का फर्जी अधिकारी

हर साइबर फ्रॉड के पीछे एक जोरदार कहानी होती है इस बार का मामला जबलपुर के 72 साल के एक बुजुर्ग रिटायर्ड कर्मचारी का है. इनके पास 22 नवंबर को अनिल कुमार नरवरिया के पास एक फोन आया. फोन करने वाले ने खुद को दिल्ली क्राइम ब्रांच का बताया और कहा “सदाकत खान नाम के आदमी को पकड़ा गया है. सदाकत के पास बहुत सारे दस्तावेज मिले हैं. उनमें से एक एटीएम मिला है, जो आपके नाम का है. सदाकत खान पर आरोप है कि वह ह्यूमन ट्रैफिकिंग का काम करता है और कंबोडिया में सक्रिय था.”

सायबर जालसाजों ने कैसे फंसाया बुजुर्ग को

सायबर जालसाजों ने बुजुर्ग से कहा “आरोप है कि आपका एटीएम इस मामले में इस्तेमाल किया गया है. हमारे पास सुप्रीम कोर्ट के कुछ आर्डर हैं और सीबीआई के कुछ दस्तावेज हैं, जिनके आधार पर आप आरोपी पाए गए हैं.” जबलपुर क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर जितेंद्र पाटकर ने बताया “अनिल कुमार इन लोगों के जाल में फंस चुके थे. सायबर फ्रॉड करने वालों ने अनिल कुमार से कहा कि आप अपना सारा पैसा सुप्रीम कोर्ट के एक अकाउंट में ट्रांसफर कर दीजिए. आपका पैसा सुरक्षित रहेगा हम. बाद में यह पैसा आपको लौटा देंगे.”

बुजुर्ग ने 76 लाख रुपये जालसाजों को किए ट्रांसफर

डरे हुए अनिल कुमार ने अपनी सारी रकम बताए गए अकाउंट में ट्रांसफर कर दी. ये राशि कुल मिलाकर लगभग 76 लाख रुपये थी. बाद में अनिल कुमार को एहसास हुआ कि उनके साथ सायबर फ्रॉड हुआ है और उन्होंने इस मामले की शिकायत सायबर थाने में की. क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर जितेन पाटकर का कहना है “सायबर फ्रॉड करने वाले फर्जी सीबीआई अधिकारी ने जिन खातों में पैसा ट्रांसफर करवाया था और जिन्हें सुप्रीम कोर्ट का खाता बताया था, दरअसल में खाता लखनऊ के रहने वाले वेद प्रकाश वर्मा और अजय शर्मा के थे.”

एक परसेंट के लालच में खाते में डलवाई रकम

जबलपुर क्राइम ब्रांच की टीम ने इन दोनों ही आरोपियों को लखनऊ से पकड़ लिया. आरोपी अजय और वेद प्रकाश से पूछताछ में बताया “हमें यह जानकारी नहीं है कि यह फ्रॉड कौन करवा रहा था. हमसे तो खाता किराए से लिया गया था. इस खाते में 76 लाख रुपये ट्रांसफर हुआ और उसकी एवज में हमें एक प्रतिशत मतलब लगभग 76000 मिला.”

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