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CRMC प्रोत्साहन राशि लंबित, सुकमा समेत बस्तर में स्वास्थ्य सेवाओं पर असर, ओपीडी सेवाओं का पूर्ण बहिष्कार

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सुकमा: छत्तीसगढ़ रूरल मेडिकल कोर (CRMC) की लंबित प्रोत्साहन राशि के भुगतान और योजना को बंद किए जाने का विरोध हो रहा है. सोमवार से सुकमा जिले सहित पूरे बस्तर संभाग के जिला चिकित्सालयों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में संपूर्ण ओपीडी सेवाओं का बहिष्कार किया गया.

सुकमा में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित

पहले ही दिन सुकमा में स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित रहीं. जिला चिकित्सालय, सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा. कई मरीज जो सुदूर ग्रामीण इलाकों से लंबी दूरी तय कर आए थे, उन्हें निराश होकर वापस लौटना पड़ा.

क्या है CRMC(नक्सल प्रोत्साहन राशि)

छत्तीसगढ़ शासन ने अप्रैल 2009 में CRMC योजना की शुरुआत दुर्गम और सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सकीय स्टाफ की कमी को दूर करने के उद्देश्य से की थी. इस योजना के तहत दुर्गम क्षेत्रों में सेवा देने वाले चिकित्सा अधिकारी, ग्रामीण चिकित्सा सहायक, स्टाफ नर्स और एएनएम को अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती थी, ताकि वे कठिन परिस्थितियों में भी निरंतर सेवाएं दे सकें.

स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों का आरोप

स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों का आरोप है कि पिछले लगभग एक वर्ष से यह प्रोत्साहन राशि लंबित है. वहीं अब योजना को बंद करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है.

कई बार शासन प्रशासन को ज्ञापन सौंपा, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया. इसी के विरोध में 5 से 12 दिसंबर तक दूसरे प्रहर की ओपीडी सेवाएं बंद की गई थीं. सकारात्मक पहल नहीं होने पर 15 दिसंबर से बस्तर के सभी जिलों में संपूर्ण ओपीडी सेवाओं के बहिष्कार का निर्णय लिया गया- स्वास्थ्य कर्मचारी

आपातकालीन सेवाओं पर असर नहीं

स्वास्थ्य कर्मियों ने स्पष्ट किया है कि आंदोलन के दौरान आपातकालीन सेवाएं और प्रसव सेवाएं 24×7 जारी हैं. कहीं भी धरना-प्रदर्शन नहीं किया जा रहा है. शांति पूर्ण तरीके से ओपीडी सेवाओं का बहिष्कार किया जा रहा है.

कर्मचारियों की अपील

सुकमा जिले के सभी चिकित्सा अधिकारी, ग्रामीण चिकित्सा सहायक, स्टाफ नर्स और एएनएम ने शासन प्रशासन से अपील की है कि लंबित CRMC प्रोत्साहन राशि का शीघ्र भुगतान किया जाए. इस महत्वपूर्ण योजना को बंद न किया जाए. यदि मांगों पर शीघ्र निर्णय लिया जाता है तो वे दुगुने उत्साह और समर्पण के साथ जिले में स्वास्थ्य सेवाएं जारी रख सकेंगे

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