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RLM चीफ के बेटे को मंत्री बनाने पर बिहार में हड़कंप! नेताओं के सामूहिक इस्तीफे ने खड़े किए कई सवाल, क्या टूट जाएगी पार्टी?

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बिहार में नई सरकार के गठन के तुरंत बाद राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है. इस बार उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) को बड़ा झटका लगा है. पार्टी के कई नेताओं ने सामूहिक इस्तीफा देकर पार्टी नेतृत्व पर सवाल खड़े कर दिए हैं. एक तरह से ये नेता पार्टी की आंतरिक स्थिति और परिवारवाद के खिलाफ खुलकर सामने आ गए हैं.

बिहार विधानसभा चुनावों में उपेंद्र कुशवाहा के नेतृत्व वाली आरएलएम ने एनडीए गठबंधन के हिस्से के रूप में छह सीटें मिली थी. इनमें से उन्होंने चार सीटों पर जीत दर्ज की. उनकी पत्नी स्नेहलता ने भी सासाराम से जीत दर्ज की. कयास लगाए जा रहे थे कि उनकी पत्नी एनडीए सरकार में मंत्री बन सकती हैं. लेकिन उपेंद्र कुशवाहा ने चारों विधायकों को दरकिनार करते हुए बेटे दीपक प्रकाश को मंत्री बनवा दिया. इससे पार्टी के अंदर असंतोष पैदा हो गया.

विरोध में पार्टी के प्रमुख नेताओं ने दिया था इस्तीफा

माना जा रहा है कि इसी वजह से पार्टी के 7 नेताओं ने उपेंद्र कुशवाहा के इस निर्णय का विरोध करते हुए इस्तीफा दे दिया. इनमें बिहार में पार्टी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र कुशवाहा और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जितेंद्र नाथ शामिल हैं. वहीं गुरुवार को पार्टी छोड़ने वाले अन्य नेता हैं, राज्य पार्टी महासचिव और प्रवक्ता राहुल कुमार, राज्य महासचिव एवं नालंदा ज़िला प्रभारी राजेश रंजन सिंह, राज्य महासचिव और जमुई जिला प्रभारी बिपिन कुमार चौरसिया, राज्य महासचिव एवं लखीसराय ज़िला प्रभारी प्रमोद यादव और शेखपुरा जिला अध्यक्ष पप्पू मंडल हैं.

वंशवाद को बढ़ावा देने का लगाया आरोप

राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जितेंद्र नाथ ने आरोप लगाया कि उपेंद्र कुशवाहा ने समाजवादी सिद्धांतों का पालन करने के बजाय पारिवारिक राजनीति (वंशवाद) को बढ़ावा दिया. जितेंद्र नाथ ने कहा, मैं नौ साल से पार्टी के साथ हूँ, लेकिन अब अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर अनिश्चित हूं. कुशवाहा का यह निर्णय वंशवाद को बढ़ावा देने का क्लासिक उदाहरण है. वहीं प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र कुशवाहा ने कहा कि उपेंद्र कुशवाहा अक्सर राजनीति में नैतिक मूल्यों की बातें करते हैं लेकिन जब मौका आया, तो उन्होंने सत्ता के लिए अपने परिवार को तरजीह दी.

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