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बिहार चुनाव से पहले पवन सिंह और बीजेपी में सुलह, जानिए क्या था विवाद

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बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक पार्टियां अपनी रणनीति बनाने में जुटी हुई हैं. इस बीच भोजपुरी गायक-अभिनेता से नेता बने पवन सिंह ने मंगलवार को सियासी दांव एक बार फिर चल दिया और एनडीए की सहयोगी राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा से मुलाकात की. इसके बाद वह सीधे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलने पहुंचे, जहां दोनों नेताओं के बीच बातचीत हुई. अब राजनीतिक हलकों में इस बात की चर्चा है कि पवन सिंह आरा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ सकते हैं.

दरअसल, बीते साल भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने पवन सिंह को पार्टी से निष्कासित कर दिया था क्योंकि उन्होंने एनडीए उम्मीदवार उपेंद्र कुशवाहा के खिलाफ काराकाट लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था. पवन सिंह के चलते कुशवाहा की करारी हार हुई थी और वे वोट पाने के मामले में खिसककर तीसरे नंबर पर पहुंच गए थे. अब पवन सिंह ने कुशवाहा से गिले-शिकवे दूर करने की कोशिश की है. इस मुलाकात के बाद बिहार के बीजेपी प्रभारी विनोद तावड़े ने कहा कि पवन सिंह बीजेपी में थे, बीजेपी में हैं और आगे रहेंगे भी, वह आने वाले बिहार चुनाव में बीजेपी और एनडीए के लिए प्रचार करेंगे. 

बीजेपी ने लोकसभा चुनाव 2024 में पवन सिंह को पश्चिम बंगाल के आसनसोल से टिकट दिया था, लेकिन उन्होंने चुनाव से अपना नाम वापस ले लिया था. इस दौरान पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया कि पवन सिंह ने चुनाव से इसलिए कदम पीछे खींच लिए क्योंकि उनके गानों में बंगाल की महिलाओं के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया, जिसके चलते उन्हें आलोचनाओं का शिकार होना पड़ा.

पवन सिंह का बीजेपी से क्या झगड़ा था?

लोकसभा चुनाव के दौरान पवन सिंह ने आसनसोल से टिकट वापस लेने के बाद बागी तेवर अपनाए और काराकाट लोकसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ने के लिए ताल ठोक दी. उनकी इस हरकत से नाराज बीजेपी ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया क्योंकि यह सीट बीजेपी ने एनडीए उम्मीदवार उपेंद्र कुशवाहा के लिए फिक्स की थी. पार्टी लाइन के खिलाफ जाने की वजह से पवन सिंह को बीजेपी से निकाला गया.

पवन सिंह ने उपेंद्र कुशवाहा का बिगाड़ दिया था समीकरण

बीजेपी से निकाले जाने के बाद पवन सिंह ने काराकाट लोकसभा सीट पर जमकर चुनाव प्रचार किया और एनडीए के खिलाफ माहौल बनाया, जिसका नतीजा ये रहा कि पवन सिंह न खुद जीत हासिल कर पाए और न ही एनडीए के प्रत्याशी को विजय हासिल करने दी. चुनाव आयोग के मुताबिक, पवन सिंह को 2 लाख 74 हजार 723 वोट मिले और एनडीए प्रत्याशी उपेंद्र कुशवाहा के खाते में 2 लाख 53 हजार 876 वोट गए. वहीं भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) (मुक्ति) के उम्मीदवार राज राम सिंह को 3 लाख 80 हजार 581 मत मिले. उन्होंने पवन सिंह को 1 लाख 5 हजार से अधिक वोटों के अंतर से हराया. अगर पवन सिंह काराकाट से चुनाव न लड़े होते तो एनडीए उम्मीदवार कुशवाहा की जीत तय मानी जा रही थी.

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