Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Iran-Israel War Impact: ईरान युद्ध के कारण बढ़ सकते हैं पानी और कोल्ड ड्रिंक की बोतलों के दाम; भारतीय... मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का बड़ा फरमान: "मुसलमानों के लिए इस्लामी उत्तराधिकार कानून अनिवार्य"; संपत्ति... विकसित भारत 2047: हरियाणा बनेगा देश का 'ग्रोथ इंजन'! उद्योग और युवाओं के कौशल पर सरकार का बड़ा दांव;... दिल्ली-देहरादून हाईवे पर 'आपत्तिजनक नारा' लिखना पड़ा भारी! दो युवतियों समेत 3 गिरफ्तार; माहौल बिगाड़ने... सावधान! दिल्ली में 48 घंटे बाद बरसेगा पानी, यूपी-राजस्थान में 'तूफान' जैसी हवाओं का अलर्ट; IMD ने पह... आगरा में 'जहरीली गैस' का तांडव! कोल्ड स्टोरेज से रिसाव के बाद मची भगदड़, जान बचाने के लिए खेतों की त... Bus Fire News: जैसलमेर से अहमदाबाद जा रही स्लीपर बस में लगी भीषण आग, एक यात्री झुलसा; खिड़कियों से क... कश्मीर में VIP सुरक्षा पर 'सर्जिकल स्ट्राइक'! फारूक अब्दुल्ला पर हमले के बाद हिला प्रशासन; अब बुलेटप... ईरान की 'हिट लिस्ट' में Google, Apple और Microsoft? अब टेक कंपनियों को तबाह करेगा तेहरान; पूरी दुनिय... दिल्ली में 'Zero' बिजली बिल वालों की शामत! खाली पड़े घरों की सब्सिडी छीनने की तैयारी; क्या आपका भी बं...

इस डिवाइस को लगाते ही रॉकेट बन जाएगा 5G इंटरनेट, IIIT-बेंगलुरु ने किया कमाल

29

मोबाइल नेटवर्क की सबसे बड़ी समस्या कवरेज गैप्स और सिग्नल ड्रॉप की है. अब इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी बेंगलुरु (IIIT-B) ने Reconfigurable Intelligent Surfaces (RIS) यानी स्मार्ट पैनल विकसित किए हैं. ये पैनल दीवारों या पोल पर लगाकर नेटवर्क सिग्नल को रीडायरेक्ट या फोकस कर सकते हैं, जिससे इंटरनेट स्पीड बढ़ेगी और कॉल ड्रॉप कम होंगे. खास बात यह है कि इन्हें मौजूदा 5G नेटवर्क में बिना बड़े बदलाव के आसानी से जोड़ा जा सकता है.

प्लग-एंड-प्ले सॉल्यूशन

RIS का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इन्हें मौजूदा 5G-Advanced नेटवर्क में आसानी से प्लग-एंड-प्ले की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है. यानी बिना नए टावर लगाए कवरेज को बेहतर किया जा सकता है. वहीं 6G नेटवर्क में इन्हें सीधे डिजाइन का हिस्सा बनाया जा सकता है, जिससे बीम मैनेजमेंट और परफॉर्मेंस और स्मार्ट हो जाएगी. इससे कंपनियों को कम टावर लगाने होंगे और लागत व ऊर्जा दोनों की बचत होगी.

रिसर्च और टेक्नोलॉजी डिजाइन

IIIT-B की टीम ने जो पैनल बनाया है, वह 3.5 GHz फ्रीक्वेंसी पर काम करता है, जो 5G के लिए अहम बैंड है. इसमें 16×16 ग्रिड में 256 यूनिट्स हैं, जिन्हें 1-बिट PIN डायोड कंट्रोल करता है. ये छोटे-छोटे स्विच सिग्नल की दिशा तय करते हैं, जिससे नेटवर्क कवरेज और मजबूत होती है. साथ ही यह तकनीक अनवांटेड सिग्नल को ब्लॉक करके इंटरफेरेंस कम करती है.

RIS टेक्नोलॉजी के सामने अभी चुनौतियां भी हैं. जैसे, तेज गति से चल रहे यूजर्स (कार, ट्रेन, ड्रोन) के लिए यह तुरंत सिग्नल एडजस्ट करने में दिक्कत कर सकती है. इसे हल करने के लिए AI-आधारित प्रेडिक्टिव बीमफॉर्मिंग और रियल-टाइम सिग्नल एडजस्टमेंट पर काम हो रहा है. IIIT-B की टीम आगे सॉफ्टवेयर-डिफाइंड RIS और मल्टी-पैनल टेस्टिंग पर रिसर्च कर रही है, जिससे आने वाले समय में 5G और 6G दोनों और बेहतर हो सकेंगे.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.