हिंदू धर्म में रंग पंचमी के त्योहार को विशेष धार्मिक मान्यता मिली हुई है. ये त्योहार होली के पांच दिन बाद चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि पर मनाया जाता है. इस त्योहार को देव पंचमी और श्री पंचमी भी कहा जाता है. मान्यता है कि रंग पंचमी के दिन देवी-देवता पृथ्वी पर रंग खेलने आते हैं. रंग पंचंमी देवी-देवताओं की होली मानी जाती है. उनको रंग-गुलाल लगाया जाता है.
द्वापर युग में हुई थी त्योहर की शुरुआत
रंग पंचमी के दिन भगवान की विशेष पूजा-अर्चना भी की जाती है. हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रंग पंचमी के त्योहार की शुरुआत द्वापर युग में मानी जाती है. मान्यता है कि रंग पंचमी के दिन ही भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी ने रंग खेला था. इस दिन भगवान की विशेष पूजा-अर्चना के साथ-साथ उनको विशेष चीजें अर्पित की जाती है. माना जाता है कि इससे जीवन खुशियों से भरा हुआ रहता है.
कब है रंग पंचमी ?
हिंदू वैदिक पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि की शुरुआच कल यानी 18 मार्च को रात 10 बजकर 9 मिनट पर हो रही है. वहीं इस पंचमी तिथि का समापन 20 मार्च को रात को 12 बजकर 36 मिनट पर होगा. हिंदू धर्म में उदया तिथि मानी जाती है. ऐसे में उदया तिथि के अनुसार, रंग पचमी का त्योहार इस साल 19 मार्च मनाया जाएगा.
भगवान को ये चीजें करें अर्पित
- इस दिन पूजा के समय देवी लक्ष्मी और जगत के पालहार भगवान श्री हरि विष्णु को लाल रंग का गुलाल अर्पित करना चाहिए. इससे धन की परेशानियां दूर होती हैं. जीवन खुशहाल रहता है.
- इस दिन देवी लक्ष्मी को सफेद रंग की मिठाई या खीर अर्पित करनी चाहिए. इससे धन धान्य में बढ़ोतरी होने लगती है.
- इस दिन भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी को लाल रंग के वस्त्र और इसी कलर का गुलाल अर्पित करना चाहिए. इससे वैवाहिक जीवन मधुर रहता है.
रंग पंचमी का महत्व
रंग पंचमी पर रंग उड़ाया जाता है. मान्यता है कि इससे दैवीय शक्तियां प्रसन्न होती हैं. लोगों के कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सुख-शांति आती है. रंग पंचमी त्योहार जीवन में सकारात्मकता लाता है. ये त्योहार प्रेम और भाईचारे का प्रतीक है. इस दिन भगवान के आशीर्वाद से घर में समृद्धि रहती है.
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