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‘आप भी हमारे भाई’… बहनों ने पेड़ों को बांधी राखियां, लिया ये संकल्प

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मानव जीवन में पेड़-पौधे कितने जरूरी हैं, इसका मूल्य हमें उस वक्त पता चला था, जब हमने कोरोना का वह भयावह मंजर देखा था. ऑक्सीजन की कमी से लोग दम तोड़ रहे थे, हॉस्पिटलों में जगह नहीं थी, पूरी दुनिया में हाहाकार मचा हुआ था, लेकिन उस समय पेड़ ही थे, जो हमें शुद्ध वायु देकर जीवन दान दे रहे थे. अब इन्हीं पेड़ों को बचाने के लिए मद्य प्रदेश के जबलपुर वासियों ने ‘सेव जबलपुर सेव लंग्स’ के नाम की एक अनोखी पहल शुरू की है.

रक्षाबंधन पर्व के एक दिन पहले, टेलीकॉम फैक्ट्री में लगे पेड़ों को राखियां बांधकर उन्हें कटने से बचाने का संकल्प लिया गया. इस मुहिम के तहत सामाजिक संगठनों ने पेड़ों के साथ रक्षाबंधन मनाया, जो दर्शाता है कि पेड़ों को संरक्षित करने के लिए समाज में कितना गहरा सम्मान और भावना है.

टेलीकॉम फैक्ट्री में पेड़ों को बांधी राखियां

टेलीकॉम फैक्ट्री की लगभग 70 एकड़ जमीन पर करीब 18 हजार पेड़ लगे हुए हैं, जिनमें से कई 100 पुराने हैं. हाल ही में फैक्ट्री की इस जमीन को बेचने का प्रस्ताव सामने आया है, जिससे इस क्षेत्र के लोगों में जंगल के खत्म होने का भय पैदा हो गया है. यह जंगल जबलपुर के पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह न केवल हरियाली प्रदान करता है, बल्कि शुद्ध वायु का भी स्रोत है. जबलपुर वासियों ने इस जमीन को बेचने का विरोध किया है और इसके बजाय इसे एक फ्रेंडली गार्डन के रूप में विकसित करने की मांग की है.

PM मोदी ने की थी ‘मां के नाम एक पेड़’ लगाने की अपील

डॉ. पवन स्थापक का कहना है कि जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘मां के नाम पर एक पेड़’ लगाने की अपील कर रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर इन हजारों साल पुराने पेड़ों को काटने का प्रस्ताव दिया जा रहा है, जो पर्यावरण के लिए हानिकारक है. हाल ही में जबलपुर ने पर्यावरण के मामले में देश में छठवां स्थान प्राप्त किया है, जो इस शहर की पर्यावरण के प्रति सजगता को दर्शाता है. यही वजह है कि जबलपुर ने पर्यावरण प्रदूषण के मामले में अव्वल स्थान पाया है. इस स्थान को ईको फ्रेंडली पार्क घोषित कर देना चाहिए, जिससे लोगों को शुद्ध वायु भी मिलेगी.

डॉ. अपर्णा स्थापक और अपूर्वा स्थापक का कहना है कि टेलीग्राम फैक्ट्री में लगे कई हजारों पेड़ों को बचाने के लिए ‘सेव जबलपुर सेव लंग्स’ के नाम पर एक मुहिम चलाई जा रही है. हम सभी इसी मुहिम के तहत आज पेड़ों के साथ रक्षाबंधन का त्योहार मनाने आए हैं, क्योकि रक्षाबंधन एक प्रेम और विश्वास का त्योहार होता है.

पेड़ों की रक्षा करनी चाहिए

हम पेड़ों पर राखी बांधकर देश के सारे भाइयों से प्रतिज्ञा लेना चाहते हैं कि जैसे राखी बांधने के बाद आप हमारी रक्षा की करते हैं, वैसे ही इन पेड़ों की रक्षा करें. यह पेड़ हमें शुद्ध वायु देते हैं, छाया देते हैं. हमने इन पेड़ों पर राखी बांधकर पूरे देश के भाइयों से पेड़ों की रक्षा करने का वचन मांगा है. साथ ही इस मुहिम को आगे बढ़ाने का आह्वान किया है. हमारा मानना है कि इस प्रकार के कदमों से ही शहर का पर्यावरण संरक्षित रह सकेगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक हरा-भरा भविष्य सुनिश्चित हो सकेगा.

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