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होलिका दहन पर नवग्रह की शांति के लिए करें ये उपाय, जानें महत्व और परंपरा

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हिन्दू धर्म में होलिका दहन का बहुत महत्व है. धार्मिक दृष्टि से देखा जाए तो होलिका दहन को एक पवित्र परंपरा माना गया है. इस साल होलिका का दहन 24 मार्च दिन रविवार को किए जाएगा. घर परिवार में सुख-समृद्धि बनाए रखने के लिए लोग हर साल होलिका दहन के साथ पूजा करते है. ऐसी धार्मिक मान्यता है कि होलिका दहन के साथ कई तरह की बुराईयां समाप्त हो जाती हैं. ज्योतिषयों के अनुसार, नवग्रह की शांति के लिए भी यह दिन खास माना जाता है. इस दिन कुछ आसान उपायों से आप नवग्रहों को भी शांत कर सकते हैं. नवग्रहों की शांति के लिए लोगों को क्या करना होगा. इसके बारे में जानने के लिए पढ़ें ये लेख…

 यदि लोगों को जीवन में नवग्रह से संबंधित परेशानी है तो उनकी शांति के लिए लोग होलिका दहन के दिन आसान उपाय कर सकते हैं. होलिका दहन से पहले लोग नवग्रह की सामग्री एकत्रित कर लें. इसके बाद होलिका दहन के समय इन सभी सामग्री को लाल कपड़े में बांध लें और उसके बाद इस पोटली को 7 बार घुमाकर होलिका की अग्नि में को अर्पित कर दें, इससे नवग्रह शांत होते हैं और जीवन में आने वाली बाधाओं से छुटकारा मिलता है.

नवग्रह सामग्री का महत्व

मान्यता ये भी है कि होलिका की अग्नि में डाली जाने वाली पोटली में रखी गई चीजों का अपना अलग-अलग महत्व है. जैसे कि इसमें सूर्य के लिए गेहूं, चंद्रमा के लिए चावल, मंगल के लिए लाल मसूर की दाल, बुध के लिए हरी मूंग, बृहस्पति के लिए चने की दाल, शुक्र के लिए चीनी, शनि के लिए काला तिल, राहु के लिए दूर्वा घास और केतु की शांति के लिए कुशा रखी जाती है.

होलिका की अग्नि में ऐसे अर्पित करें लकड़ियां

अगर आपके ऊपर सूर्य ग्रह की महादशा चल रही हो और सूर्य आपको कष्ट दे रहा हो अथवा आपका सूर्य आपकी कुंडली में कमजोर हो, राहु से ग्रस्त हो, अथवा सूर्य के कारण मारकेश आदि का भय हो तो होलिका की अग्नि की परिक्रमा कर उसमें मदार की लकड़ी अर्पित करें. इसी प्रकार चन्द्रमा, राहु से ग्रसित हो अथवा जन्मकुण्डली में अशुभ स्थानों पर बैठे चन्द्रमा की महादशा पीड़ा दे रही हो या फिर नीच राशि का चन्द्रमा मानसिक उलझन प्रस्तुत कर रहा हो तो चन्द्रमा के अनिष्ट प्रभाव को कम करने के लिए पलाश की लकड़ी को होलिका की अग्नि में अर्पित करें.

मंगल को अनुकूल बनाने के लिए खैर (खादिर) वनस्पति, बुध के अनिष्ट को शांत करने के लिए अपामार्ग की लकड़ी, बृहस्पति के विपरीत प्रभाव को दूर करने के लिए पीपल की लकड़ी, शुक्र के अनिष्ट प्रभाव को कम करने के लिए गूलर की लकड़ी, शनि को अनुकूल बनाने के लिए शमी की लकड़ी, राहु की शांति के लिए दूब और केतु की शांति हेतु कुशा को होलिका की अग्नि में समर्पित करें.

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