Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
MP Dairy Shifting Project: रतौना-हफसिली डेयरी प्रोजेक्ट में निगम का कड़ा एक्शन, जमा राशि भी की गई रा... Dr. Harisingh Gour University: स्टैनफोर्ड और एल्सेवियर की सूची में सागर यूनिवर्सिटी के 12 प्रोफेसर श... Ramanujganj Van Vatika: तीन महीने में पूरी होगी रामानुजगंज वन वाटिका की तस्वीर, ओपेन जिम और चिल्ड्रे... Raipur Health News: नवरात्रि उपवास में गरबा के साथ कैसे रखें सेहत का ख्याल? जानिए एनर्जी बढ़ाने के आ... Bhilai News: सीएम के कार्यक्रम में बच्चों को घंटों बैठाए रखने पर विवाद, कांग्रेस ने की कार्रवाई की म... Raipur Crime News: आमानाका थाना क्षेत्र में 3 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म, AIIMS का सिक्योरिटी गार्... Bastar Local Products: दंतेवाड़ा के जैविक चावल और वनोपज को मिली नई पहचान, महिला FPO ने शुरू किया ब्र... Kavirdha News: कवर्धा में किसानों का बड़ा आंदोलन खत्म, गन्ने का भाव बढ़कर हुआ 425 रुपये, सरकार ने मा... Kanker News: कांकेर के सीएएफ कैंप में अनोखी पहल, जवान रूपधर चौहान अपने हाथों से बना रहे हैं मां दुर्... Jagdalpur News: बस्तर बाढ़ पीड़ितों के लिए प्रशासन का बड़ा कदम, 25 करोड़ से अधिक की राहत राशि सीधे ख...

फर्जी सर्टिफिकेट बनवाकर 40 साल से पुलिस में कर रहा था नौकरी, ऐसे खुल गई इंदौर के इस नटवरलाल की पोल…

43

इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में फर्जी सर्टिफिकेट बनवाकर 40 साल से एक व्यक्ति पुलिस की नौकरी कर रहा था। रिटायरमेंट से पहले उसकी पोल खुल गई। 1983 में सत्यनारायण वैष्णव नाम का व्यक्ति आरक्षक के तौर पर भर्ती हुआ था। 2006 में पुलिस को सत्यनारायण के खिलाफ एक शिकायत मिली थी। यह शिकायत इंदौर के ग्वालटोली थाना में हुई। शिकायत में लिखा गया था कि सत्यनारायण नाम का जो शख्स 23 सालों से पुलिस की नौकरी कर रहा है उसने फर्जी तरीके से पुलिस की नौकरी हासिल की है।

सत्यनारायण की 23 साल की नौकरी के बाद पहली शिकायत पुलिस को मिली। लोक अभियोजन अधिकारी संजीव श्रीवास्तव ने बताया कि पुलिस विभाग में कार्यरत सत्यनारायण वैष्णव के खिलाफ फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनवाकर पुलिस में नौकरी करने का आरोप लगा था। सिपाही के कारनामे से पुलिस डिपार्टमेंट भी सोच में पड़ गया। सत्यनारायण ब्राह्मण समुदाय का था और कोरी समाज की जाति का सर्टिफिकेट बनवाकर उसने पुलिस की नौकरी हासिल की थी।

शिकायत मिलने के बाद पुलिस इस मामले की जांच कर रही थी। भोपाल पुलिस विभाग से सत्यनारायण की जाति प्रमाण पत्र की जांच की गई जिसमें पाया गया कि यह जाति प्रमाण पत्र फर्जी तरीके से बनवाया गया है। पुलिस ने इस मामले की जांच के बाद 2013 में पूरा केस कोर्ट में पेश किया। इस मामले की सुनवाई कोर्ट में हुई जिसके बाद कोर्ट ने सत्यनारायण को रिटायरमेंट से पहले 10 साल की सजा सुना दी है।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.