Pauri Garhwal Elephant Tusks Missing Case: उत्तराखंड के वन विभाग कार्यालय से 35 किलो हाथी दांत गायब, महकमे में मचा हड़कंप; पुलिस जांच शुरू
पौड़ी गढ़वाल: देवभूमि उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले से एक बेहद चौंकाने वाला और गंभीर मामला प्रकाश में आया है। यहां वन विभाग के एक सरकारी कार्यालय से 35.41 किलोग्राम कुल वजन के पांच बेशकीमती हाथी दांत रहस्यमय तरीके से गायब हो गए हैं। इस सनसनीखेज घटना के सामने आते ही पूरे वन विभाग के भीतर हड़कंप मच गया है। सबसे बड़ा और गंभीर सवाल यह है कि आखिर सरकारी अभिलेखों और सुरक्षा के बीच सुरक्षित रखे गए हाथी दांत कब और कैसे गायब हो गए? इस पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए विभागीय जांच के साथ-साथ स्थानीय थाने में पुलिस प्राथमिकी भी दर्ज करा दी गई है, और जांच के दायरे में कार्यालय के कर्मचारियों के साथ-साथ स्टोर को अन्यत्र शिफ्ट करने वाले लोग भी शामिल हैं।
लैंसडौन वन प्रभाग की लालढांग रेंज का है मामला, केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण के निर्देश पर चल रही थी दस्तावेजों और वस्तुओं की जांच
यह पूरा मामला पौड़ी जिले के अंतर्गत आने वाले लैंसडौन वन प्रभाग की लालढांग रेंज के कार्यालय से जुड़ा हुआ है। आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण के स्पष्ट निर्देशों के तहत राज्य के तमाम रेंज कार्यालयों में पूर्व में जब्त और बरामद किए गए हाथी दांतों व अन्य वन्यजीव अवशेषों की भौतिक जांच की जा रही थी। इसी अभियान के तहत जब लालढांग रेंज के कार्यालय में रखे गए हाथी दांतों की सूची का मिलान किया गया, तो यह बड़ा गोलमाल सामने आया।
कुछ दिन पहले ही किया गया था कार्यालय का स्टोर शिफ्ट, 18 अक्टूबर को गिनती के दौरान पांच हाथी दांत मिले गायब
प्राप्त विवरण के अनुसार, कुछ ही दिन पूर्व कार्यालय के स्टोर को दूसरी जगह स्थानांतरित (शिफ्ट) किया गया था। इसके पश्चात आगामी 18 अक्टूबर को जब हाथी दांतों की आधिकारिक गिनती और मिलान किया गया, तब यह बात स्पष्ट हुई कि 35.41 किलोग्राम वजन वाले कुल पांच हाथी दांत मौके से नदारद हैं। इस खुलासे के बाद से विभाग के उच्च अधिकारियों के होश उड़ गए और तुरंत इसकी आंतरिक पड़ताल शुरू कर दी गई।
स्टोर शिफ्टिंग के दौरान गायब होने का लगाया जा रहा है अंदेशा, स्थानीय ग्रामीणों से भी की गई पूछताछ
हाथी दांतों के गायब होने के बाद सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यह घटना वास्तव में किस समयावधि में हुई। शुरुआती तौर पर यह आशंका जताई जा रही है कि संभवतः स्टोर को एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करने के दौरान ही इन्हें गायब किया गया हो। हालांकि, इस संभावना पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं कि यदि स्टोर शिफ्टिंग के वक्त ऐसा हुआ, तो किसी भी जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी को इसकी भनक क्यों नहीं लगी। सूत्रों का कहना है कि इस कार्य में लगाए गए आसपास के क्षेत्र के कुछ ग्रामीणों से भी पूछताछ की जा चुकी है, लेकिन फिलहाल कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा है। विभाग अब यह खंगाल रहा है कि इन हाथी दांतों को आखिरी बार कब देखा गया था और उनकी अभिरक्षा की कानूनी जिम्मेदारी किसकी थी।
डीएफओ की अध्यक्षता में विशेष जांच समिति का गठन, यमकेश्वर थाने में जीरो एफआईआर दर्ज कर कोटद्वार ट्रांसफर
मामले की संवेदनशीलता को भांपते हुए वन विभाग ने फौरन विभागीय जांच का आदेश दे दिया है। हरिद्वार के प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया गया है। इसके अतिरिक्त, लैंसडौन वन प्रभाग के डीएफओ ने इस मामले में लापरवाही बरतने के संदेह में तीन कर्मचारियों से स्पष्टीकरण भी तलब किया है। विभागीय स्तर पर यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि क्या स्टोर शिफ्टिंग के दौरान सुरक्षा और तय मानकों का पालन किया गया था या नहीं। इस बीच, पुलिस में भी औपचारिक प्राथमिकी दर्ज करा दी गई है। पौड़ी जिले के यमकेश्वर थाने में इस मामले में ‘जीरो एफआईआर’ दर्ज की गई है, जिसे आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए कोटद्वार थाने में स्थानांतरित किया जा रहा है। पौड़ी गढ़वाल के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सर्वेश पंवार ने बताया कि उनके निर्देशों के अनुपालन में सोमवार को कोटद्वार की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) और क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट (CIU) की संयुक्त टीमों ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया है। फिलहाल वन विभाग और पुलिस दोनों ही अपने-अपने स्तर पर इस मामले की तह तक जाने का प्रयास कर रहे हैं।
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