Vidisha Deepawali News: विदिशा के खाई मोहल्ला में गूंज रही पारंपरिक कारीगरों की कला, लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों को दे रहे हैं अंतिम रूप
विदिशा: प्रकाश पर्व दीपावली का असर अब मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के बाजारों से लेकर दूर-दराज के गली-मोहल्लों तक साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। दीवाली के इस उल्लास के बीच विदisha के प्रसिद्ध खाई मोहल्ला क्षेत्र में पारंपरिक मूर्तिकार अपने पूरे परिवार के साथ मिलकर पूरी शिद्दत, लगन और मेहनत के साथ मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की मनमोहक प्रतिमाओं को अंतिम स्वरूप प्रदान करने में दिन-रात जुटे हुए हैं।
पीढ़ियों से चला आ रहा है पुश्तैनी हुनर, पारंपरिक कारीगर सतीश प्रजापति ने साझा किए अपने अनुभव
कारीगरों के घरों और परिसरों में बड़े पैमाने पर तैयार की जा रही ये कलात्मक मूर्तियां इस बात की स्पष्ट गवाही दे रही हैं कि हमारे पारंपरिक शिल्पकारों के हाथों में कितना अद्भुत और अनमोल हुनर समाया है। अपने इस पुश्तैनी और पारंपरिक काम को पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ा रहे मूर्तिकार सतीश प्रजापति बताते हैं कि मूर्तिकला उनके परिवार में पीढ़ियों से चली आ रही है। उनके पूर्वज भी इसी कला से जुड़े हुए थे और आज वे खुद पूरी ईमानदारी के साथ इस विरासत को संभाल रहे हैं। उन्होंने इस सीजन में लगभग 1,700 से 2,000 रुपये तक की कीमत वाली बेहद सुंदर और आकर्षक मूर्तियां तैयार की हैं।
ग्राहकों की पसंद और आधुनिक रुझान का रखा जा रहा पूरा ध्यान, सोनम प्रजापति ने दी जानकारी
इस पारंपरिक कार्य से जुड़ीं मूर्तिकार सोनम प्रजापति बताती हैं कि उनके यहां दीपावली के अवसर पर दीए, डोबलियां, मां लक्ष्मी, भगवान गणेश, हाथी, मोर, कमल पुष्प और गणगौर समेत देवी-देवताओं के विभिन्न स्वरूपों की मूर्तियां बनाई जाती हैं। वर्तमान समय में मूर्तियों का मुख्य ढांचा तैयार होने के बाद अब उन पर रंगों की फिनिशिंग और सजावट का कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है। हालांकि, महंगाई बढ़ने के कारण कारीगरों के सामने भी कुछ आर्थिक चुनौतियां जरूर बढ़ी हैं, लेकिन ग्राहकों की पसंद और बजट को ध्यान में रखते हुए ही मूर्तियों का निर्माण किया गया है, और उन्हें पूरी उम्मीद है कि ये कलाकृतियां लोगों को बेहद पसंद आएंगी।
छह इंच से लेकर ढाई फीट तक की मूर्तियों की है सबसे अधिक मांग, उचित दामों पर उपलब्ध कराई जा रही हैं कलाकृतियां
कारीगरों के घरों में फर्श पर रंग-बिरंगी और चमक बिखेरती मूर्तियां बेहद करीने से सजाकर रखी गई हैं। कहीं माता लक्ष्मी कमल के आसन पर विराजमान हैं, तो कहीं भगवान गणेश के साथ उनका जोड़ा बेहद मनभावन रूप में नजर आ रहा है। सोनम प्रजापति के अनुसार, बाजार में 6 इंच से लेकर दो से ढाई फीट तक की साइज वाली मूर्तियों की सबसे अधिक मांग बनी हुई है। लोग विशेष तौर पर गणेश-लक्ष्मी का संयुक्त जोड़ा खरीदना पसंद करते हैं। हालांकि कच्चे माल जैसे रंग, जरी और बोरियों के दाम में बढ़ोतरी हुई है, फिर भी कलाकारों की यही कोशिश रहती है कि ग्राहकों को बाजार में उचित और किफायती दरों पर ही मूर्तियां मिल सकें।
स्थानीय बाजारों के साथ भोपाल, राजगढ़ और सांची तक पहुंच रही हैं खाई मोहल्ला के कलाकारों की कलाकृतियां
बाजार में वर्तमान रुझान को देखते हुए ज्यादातर लोग अब गणेश जी और लक्ष्मी जी की एक साथ वाली मूर्तियों को प्राथमिकता दे रहे हैं। यहां हर रूप में प्रतिमाएं उपलब्ध हैं, जैसे कमल पर विराजमान लक्ष्मी जी, कुबेर महाराज, हाथी और मोर की कलाकृतियां। इसके अलावा, अब लोग अन्य जगहों से आने वाली मूर्तियों की तर्ज पर आधुनिक डेकोरेशन और आकर्षक वस्त्रों से सजी हुई भव्य प्रतिमाओं की मांग करने लगे हैं। स्थानीय कारीगरों ने भी ग्राहकों की इस मांग को बखूबी समझते हुए अपनी कला में नयापन और आधुनिकता को शामिल करना शुरू कर दिया है। विदिशा के खाई मोहल्ला के इन हुनरमंद कलाकारों की मेहनत से तैयार की गई ये मूर्तियां न केवल स्थानीय बाजारों की शोभा बढ़ा रही हैं, बल्कि अपनी चमक भोपाल, राजगढ़ और सांची तक बिखेर रही हैं।
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