: मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में अनोखा पारिवारिक विवाद, पत्नी द्वारा करवा चौथ का व्रत न रखने पर पति ने थाने में दी शिकायत
शिवपुरी: मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के बदरवास थाना क्षेत्र से एक बेहद अनोखा और चौंकाने वाला मामला प्रकाश में आया है, जो इन दिनों सोशल मीडिया और स्थानीय चर्चाओं में सुर्खियों का केंद्र बना हुआ है। यह घटना न केवल पारिवारिक संबंधों की पेचीदगियों को उजागर करती है, बल्कि पुलिस के पास पहुंचने वाले अनूठे मामलों की फेरहिस्त में भी एक नया अध्याय जोड़ती है। विजरावन गांव के निवासी बारेलाल आदिवासी ने स्थानीय पुलिस थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है कि उनकी पत्नी मिथलेश आदिवासी ने उनके नाम से करवा चौथ का निर्जला व्रत नहीं रखा और न ही रात को चंद्रमा के दर्शन कर पूजा की। हालांकि, इस पहली नजर में साधारण लगने वाले वाकये के पीछे पति-पत्नी के बीच लंबे समय से पनप रहा आपसी मनमुटाव और गहरा अविश्वास छिपा हुआ है।
व्रत न रखने से डरा पति, बोला- पत्नी मुझे नुकसान पहुंचाना चाहती है, चाहता हूं तलाक
आम तौर पर करवा चौथ के इस पावन पर्व को सुहागिनों के अटूट प्रेम, समर्पण और विश्वास का प्रतीक माना जाता है, लेकिन बारेलाल के मामले में यही त्योहार दोनों के बीच तकरार की मुख्य वजह बन गया। शिकायती आवेदन में बारेलाल का तर्क है कि पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पत्नियां अपने पति की दीर्घायु के लिए यह उपवास रखती हैं। पत्नी द्वारा व्रत और पूजा से साफ इनकार करने को बारेलाल ने अपनी सुरक्षा से जोड़ लिया। उन्होंने पुलिस के समक्ष यह गंभीर आशंका जताई कि उनकी पत्नी का मन उनके प्रति साफ नहीं है और वह उन्हें शारीरिक रूप से नुकसान पहुंचा सकती है। इस बात से తీవ్ర आहत होकर बारेलाल ने अपनी पत्नी से सभी नाते-रिते तोड़ने और तत्काल तलाक लेने का मन बना लिया तथा सीधे थाने पहुंचकर गुहार लगाई कि साहब! मेरी पत्नी ने मेरे लिए व्रत नहीं रखा है, बल्कि वह मुझे रास्ते से हटाना चाहती है।
कानूनी दृष्टिकोण और पुलिस की भूमिका: पारिवारिक मामलों को सुलझाने की पहल
कानून के जानकारों के अनुसार, किसी पर्व विशेष या व्रत का पालन करना या न करना पूरी तरह से व्यक्तिगत निर्णय के दायरे में आता है और इसके लिए भारतीय कानूनों में कोई दंडनीय प्रावधान नहीं है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि पुलिस ऐसे अजीबोगरीब मामलों में क्या कार्रवाई करे? बदरवास थाना प्रशासन ने इस आवेदन को किसी संज्ञेय अपराध के रूप में दर्ज करने के बजाय एक संवेदनशील घरेलू विवाद के रूप में लिया है। कोलारस के एसडीओपी संजय मिश्रा ने इस बात पर स्पष्टता दी कि पुलिस की प्राथमिक प्राथमिकता हमेशा टूटते हुए परिवारों को बचाने और आपसी समझौते की राह तलाशने की होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए आवेदन मिलते ही मामले की गंभीरता को समझा गया है।
महिला परामर्श केंद्र के जरिए होगी काउंसलिंग, दूर की जाएगी गलतफहमी
इस पारिवारिक कलह को कानूनी मुकदमों या एफआईआर (FIR) की दिशा में ले जाने के बजाय, पुलिस प्रशासन ने इसे महिला परामर्श केंद्र के माध्यम से सुलझाने का मार्ग चुना है। तय किया गया है कि एक अनुभवी महिला पुलिस अधिकारी की देखरेख में बारेलाल और मिथलेश दोनों को आमने-सामने बैठाकर लंबी बातचीत कराई जाएगी। अक्सर यह देखा जाता है कि व्रत न रखने या पूजा न करने जैसी बातें सतह पर नजर आने वाले कारण भर होती हैं, जबकि असल विवाद घर के भीतर की वैचारिक दूरियों, संवादहीनता या आपसी तनाव से उपजा होता है। काउंसलिंग के जरिए दोनों के बीच की गलतफहमियों को दूर करने का सार्थक प्रयास किया जाएगा।
ग्रामीण परिवेश की सामाजिक परंपराएं और पुलिस की सुलह की कोशिश
शिवपुरी के इस ग्रामीण और आदिवासी बहुल इलाके में सामाजिक ताना-बाना आज भी बेहद पारंपरिक और रूढ़ियों से जुड़ा हुआ है। यहाँ त्योहारों और धार्मिक अनुष्ठानों का निर्वहन केवल आस्था का विषय नहीं बल्कि सामाजिक प्रतिष्ठा से भी जोड़ा जाता है, जिसके कारण छोटी-छोटी बातें कई बार बड़े घरेलू विवाद का रूप ले लेती हैं। फिलहाल, बदरवास थाना पुलिस यह पुरजोर कोशिश कर रही है कि करवा चौथ के इस बहाने थाने तक पहुंचे इस मनमुटाव को आपसी संवाद और समझाइश के जरिए शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त कराया जा सके।
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