Haryana Power Privatization Cancelled: गुरुग्राम और नूंह में बिजली निजीकरण पर लगा ब्रेक, 25 साल का लाइसेंस हुआ रद्द
याणा राज्य के भीतर बिजली के निजीकरण की प्रक्रिया पर फिलहाल पूरी तरह से ब्रेक लग गया है। गुरुग्राम और नूंह जिलों में किसी निजी कंपनी को आगामी 25 वर्षों तक बिजली वितरण का अधिकार देने से जुड़ा हुआ लाइसेंस अब आधिकारिक तौर पर रद्द कर दिया गया है। पंचकूला में हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) के कार्यकारी चेयरमैन मुकेश गर्ग और सदस्य शिव कुमार की संयुक्त बेंच ने इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी कर दिए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार की ओर से विद्युत अधिनियम की धारा 108 के तहत आयोग को एक पत्र भेजा गया था, जिसके आधार पर यह बड़ा कदम उठाया गया है। इसके साथ ही आयोग ने संबंधित निजी कंपनी (EPPL) की तरफ से सुनवाई की मांग को भी सिरे से खारिज कर दिया है।
क्या है पूरा मामला: जानिए कैसे हुआ था प्राइवेट कंपनी को लाइसेंस का आवंटन
इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) ने बीते 19 अक्टूबर 2026 को अपने एक आदेश के माध्यम से ‘इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड’ (EPPL) को गुरुग्राम और नूंह के इलाकों में 25 साल की लंबी अवधि के लिए समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस (Parallel Distribution Licence) प्रदान किया था। इसके बाद कंपनी ने आगामी 21 अक्टूबर को इस प्रस्ताव पर अपनी पूर्ण सहमति भी दर्ज करा दी थी, जिसके बाद से ही इसे लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया था।
सरकार का कड़ा विरोध: धारा 108 के तहत HERC को भेजे गए थे लिखित निर्देश
निजी हाथों में बिजली वितरण की व्यवस्था सौंपे जाने के इस निर्णय के सामने आने के बाद राज्य सरकार ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई। सरकार ने विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 108 (1) का इस्तेमाल करते हुए HERC को आधिकारिक तौर पर लिखित निर्देश जारी किए। सरकार द्वारा 26 अक्टूबर 2026 को जारी किए गए इन निर्देशों में स्पष्ट रूप से यह कहा गया कि राज्य की भौगोलिक सीमा के भीतर कहीं पर भी इस प्रकार का कोई भी समानांतर वितरण लाइसेंस न तो बनाया जाना चाहिए और न ही उसे क्रियान्वित किया जाना चाहिए।
निजीकरण के विरोध में सरकार ने दी थी राजस्व और जनहित प्रभावित होने की दलील
इस पूरे मामले में सरकार की तरफ से पक्ष रखते हुए कड़े तर्क दिए गए थे। सरकार ने आयोग को बताया कि निजी कंपनियों को इस प्रकार का लाइसेंस देने से राज्य के सरकारी राजस्व पर बहुत बुरा असर पड़ेगा। इसके अलावा, इस कदम से किसानों, आम घरेलू उपभोक्ताओं और बिजली निगमों के मेहनती कर्मचारियों के बीच भारी असंतोष और आक्रोश पनप रहा है। सरकार का यह भी कहना था कि समानांतर व्यवस्था लागू होने से क्रॉस-सब्सिडी की मौजूदा व्यवस्था खत्म हो जाएगी, जिसके तहत अमीर और महंगे उपभोक्ता प्राइवेट कंपनी के पास चले जाएंगे और अंततः सारा वित्तीय घाटा सरकारी डिस्कॉम (DISCOMs) के सिर आ जाएगा। सरकार ने इसे पूरी तरह से जनहित के खिलाफ बताया, जिसके बाद आयोग ने कंपनी की दलीलों और सुनवाई की मांग को खारिज करते हुए लाइसेंस रद्द करने के आदेश जारी कर दिए।


Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.