Haryana Dengue Alert: हरियाणा में डेंगू का डरावना प्रकोप, एक महीने में दोगुने हुए मामले; स्वास्थ्य विभाग ने जारी किए 53 हजार से ज्यादा नोटिस
चंडीगढ़: हरियाणा राज्य में इन दिनों डेंगू और मलेरिया जैसी खतरनाक मच्छर जनित बीमारियों का संक्रमण बहुत तेजी से पांव पसार रहा है। स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की बार-बार चेतावनियों के बावजूद आम जनता द्वारा जरूरी एहतियाती गाइडलाइंस का पालन न किए जाने के कारण हालात लगातार चिंताजनक होते जा रहे हैं। राज्य में पिछले महज एक महीने के भीतर डेंगू के मामलों में दोगुने से भी अधिक की भारी बढ़ोतरी दर्ज की जा चुकी है, जिसके बाद प्रदेशभर में अब तक कुल 774 से अधिक पुष्ट मामले सामने आ चुके हैं।
प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, लापरवाही बरतने वालों को 53 हजार से अधिक नोटिस
बढ़ते संक्रमण को रोकने के लिए राज्य के नगरपालिका उप-नियमों के तहत प्रशासन ने अब पूरी तरह सख्ती बरतनी शुरू कर दी है। लापरवाही बरतने और घरों या आसपास पानी जमा रखने वाले लोगों पर शिकंजा कसते हुए कुल 53,051 कानूनी नोटिस जारी किए गए हैं। इनमें से अकेले स्वास्थ्य विभाग की विशेष टीमों द्वारा 51,729 और शहरी स्थानीय निकाय विभाग द्वारा 1,322 नोटिस थमाए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पूरे प्रदेश में चलाई गई व्यापक चेकिंग ड्राइव के दौरान हैरान करने वाली बात यह सामने आई कि करीब 1 लाख 12 हजार घरों के अंदर मच्छर का लारवा पनपता हुआ मिला, जो लोगों की भारी लापरवाही को साफ तौर पर उजागर करता है।
पंचकूला और गुरुग्राम में सबसे ज्यादा मरीज, राहत की बात की मौत नहीं
स्वास्थ्य विभाग से मिले आंकड़ों के मुताबिक, इस साल पूरे हरियाणा में सबसे अधिक डेंगू के मामले पंचकूला जिले में रिपोर्ट हुए हैं। इसके अलावा गुरुग्राम में 75, सोनीपत में 68, फरीदाबाद में 65 और झज्जर जिले में डेंगू के 62 मामले सामने आ चुके हैं। हालांकि, इस सबके बीच सबसे राहत भरी बात यह रही है कि इस सीजन में इस जानलेवा बीमारी की वजह से किसी भी मरीज की मौत का कोई मामला रिपोर्ट नहीं हुआ है।
जांच के लिए फिक्स किए गए दाम और अस्पतालों में पुख्ता इंतजाम
प्रदेश में डेंगू की समय पर और सटीक जांच सुनिश्चित करने के लिए कुल 27 प्रयोगशालाएं (लैब) बनाई गई हैं। इसके साथ ही तमाम सिविल अस्पतालों और अन्य सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में डेंगू के मरीजों के इलाज के लिए विशेष रूप से 267 वार्ड और कुल 1,070 बेड आरक्षित (रिजर्व) किए गए हैं। आम जनता को महंगे खर्च से बचाने के लिए सरकार ने प्राइवेट लैब और अस्पतालों में डेंगू की जांच का अधिकतम शुल्क 600 रुपये तय कर दिया है ताकि लोग आसानी से अपनी जांच करा सकें।
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