Chhattisgarh Politics: पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने सरकार पर बोला हमला, धान खरीदी और बेरोजगारी के मुद्दों को लेकर घेरा
भिलाई: छत्तीसगढ़ में आगामी दिसंबर माह में होने वाले नगरीय निकाय चुनावों को लेकर सियासी पारा लगातार चढ़ता जा रहा है। भिलाई नगर निगम के 70 वार्डों में होने वाले आगामी चुनावों से ठीक पहले कांग्रेस पार्टी ने अपनी रणनीति को धार देते हुए शुक्रवार को एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की। इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान पार्टी ने अपनी चुनावी तैयारियों की जमीनी समीक्षा की और आगामी चुनाव में शानदार जीत दर्ज करने का बड़ा दावा किया है।
दिग्गज नेताओं की मौजूदगी में हुआ शक्ति प्रदर्शन, महापौर पद पर जीत का दावा
आयोजित इस चुनावी बैठक में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, चुनाव पर्यवेक्षक धनेंद्र साहू, सह-पर्यवेक्षक दीपक दुबे, पूर्व गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू, भिलाई नगर के विधायक देवेंद्र यादव, महापौर नीरज पाल सहित पार्टी के तमाम पार्षद और बड़ी संख्या में स्थानीय नेता व कार्यकर्ता उपस्थित रहे। इस बैठक में कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ जुटने के कारण इसे कांग्रेस के एक बड़े शक्ति प्रदर्शन के रूप में भी देखा जा रहा है। वरिष्ठ नेताओं ने कार्यकर्ताओं को बूथ स्तर पर सक्रिय रहने, आपसी समन्वय बनाने और अधिक से अधिक वार्डों में पार्टी प्रत्याशियों को जिताने के लिए जरूरी मंत्र दिए।
धान खरीदी और बेरोजगारी के मुद्दे पर पूर्व सीएम ने सरकार को घेरा
संबोधन के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने धान खरीदी के मुद्दे को लेकर मौजूदा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने अभी तक धान खरीदी को लेकर अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है, जबकि यदि समय पर धान खरीदा जाता तो अन्नदाता किसान अपनी दिवाली और अधिक बेहतर तरीके से मना पाते। इसके अलावा उन्होंने बेरोजगारी, वोट चोरी, जीएसटी और आंतरिक सुरक्षा जैसे गंभीर राष्ट्रीय व स्थानीय मुद्दों पर भी सरकार को आड़े हाथों लिया।
बीजेपी सरकार और सांसद विजय बघेल पर साधा तीखा निशाना
पूर्व सीएम ने कड़े शब्दों में आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार हर मोर्चे पर पूरी तरह विफल साबित हुई है। इस दौरान उन्होंने दुर्ग लोकसभा सीट से बीजेपी सांसद विजय बघेल पर भी जमकर निशाना साधा और उनके बयानों पर सवाल खड़े किए। भूपेश बघेल ने तंज कसते हुए कहा कि दो बार सांसद रहने के बावजूद युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर या भर्तियां क्यों नहीं निकाली गईं? उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य दोनों ही सरकारें केवल चुनिंदा उद्योगपतियों के हितों को साधने में लगी हुई हैं।
Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.