Darjeeling Black Deer Sighting: पश्चिम बंगाल के डाउ हिल जंगलों में दिखा दुर्लभ काला हिरण, पर्यटकों और वन विभाग में बढ़ी उत्सुकता
पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग और कर्सियांग के पहाड़ी इलाके इन दिनों पर्यटकों से पूरी तरह गुलजार हैं. नवरात्रि के दौरान यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेने पहुँच रहे पर्यटकों को एक बेहद दुर्लभ और अद्भुत नजारा देखने को मिला है. कर्सियांग वन मंडल के अंतर्गत आने वाले डाउ हिल के घने जंगलों में एक बार फिर दुर्लभ काला हिरण दिखाई दिया है. इस अनोखे वन्यजीव को अपनी आँखों के सामने देखकर पर्यटकों के साथ-साथ वन विभाग के अधिकारियों और वन्यजीव प्रेमियों में भी भारी उत्सुकता और उत्साह बढ़ गया है.
📸 ट्रेकिंग के दौरान पर्यटकों ने कैमरे में कैद की तस्वीरें, इस साल सामने आया दूसरा मामला
पाइन के ऊंचे-ऊंचे पेड़ों से घिरे डाउ हिल के जंगलों में पर्यटकों का एक समूह जब ट्रेकिंग कर रहा था, तभी समूह के एक सदस्य की नजर अचानक पूरी तरह काले रंग के एक हिरण पर पड़ी. पर्यटक ने बिना एक पल गंवाए तुरंत अपने कैमरे में इस दुर्लभ वन्यजीव की तस्वीरें और वीडियो कैद कर लिए. जंगल के बीच काले हिरण को देखकर पर्यटकों ने अपनी खुशी जाहिर की. खास बात यह है कि डाउ हिल के जंगलों में काले हिरण की मौजूदगी का यह मामला पहली बार सामने नहीं आया है, बल्कि इस साल की शुरुआत में कर्सियांग के डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (DFO) देबेश पांडे ने भी इसी जंगल में ऐसे ही एक हिरण को अपनी आँखों से देखा था और उसकी तस्वीरें ली थीं. एक ही क्षेत्र में बार-बार इस तरह के दुर्लभ वन्यजीवों का दिखना वन विभाग के लिए एक बहुत सकारात्मक संकेत माना जा रहा है.
🧬 क्या है मेलानिज्म? जानिए क्यों हो जाते हैं कुछ जानवर काले और क्या है वन विभाग की प्रतिक्रिया
विज्ञान के अनुसार, जानवरों के शरीर में ‘मेलानिज्म’ (Melanism) नामक पिगमेंट पाया जाता है, जो उनकी त्वचा और बालों के रंग को निर्धारित करने का मुख्य काम करता है. जब किसी जानवर के शरीर में इस पिगमेंट का उत्पादन सामान्य से अधिक होने लगता है, तो उसका रंग बेहद गहरा या पूरी तरह काला दिखाई देने लगता है. यह एक प्रकार की आनुवंशिक विशेषता होती है, जो कभी-कभी काले तेंदुओं या अन्य जीवों में भी देखी जाती है. डाउ हिल के जंगलों में दिखे इन हिरणों को ‘बार्किंग डियर’ प्रजाति का माना जा रहा है, हालांकि इसके पीछे मेलानिज्म ही मुख्य वजह है या नहीं, इसकी पुष्टि के लिए वैज्ञानिक जांच की जा रही है. कर्सियांग के DFO देबेश पांडे के मुताबिक, इस क्षेत्र में पहले भी दुर्लभ काले तेंदुए देखे जा चुके हैं, और अब काले हिरणों की यह मौजूदगी इस जंगल की समृद्ध जैव विविधता को दर्शाती है, हालाँकि वन विभाग शिकारियों के खतरे को लेकर भी पूरी तरह सतर्क है.
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