Eknath Shinde Shock to Mahayuti: महाराष्ट्र में महायुति में घमासान, डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने निर्दलीय उम्मीदवार सचिन सानप को दिया खुला समर्थन
महाराष्ट्र के पुणे से उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने एक बड़ा राजनीतिक ऐलान करते हुए मंत्री उदय सामंत के ओएसडी और पुणे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र विधान परिषद चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार सचिन सानप को खुला समर्थन देने की घोषणा कर दी है। सचिन सानप इस चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में हैं और उनका मुकाबला सीधे तौर पर बीजेपी के उम्मीदवार कौस्तुभ गावडे से है। कई दिनों से राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर सस्पेंस बना हुआ था, जिस पर अब एकनाथ शिंदे ने अपनी चुप्पी तोड़ दी है।
शिंदे की शिवसेना कल से सचिन सानप के पक्ष में अपने प्रचार अभियान की आधिकारिक शुरुआत करेगी। बीजेपी उम्मीदवार के खिलाफ निर्दलीय उम्मीदवार को समर्थन देने के इस कदम को राजनीतिक हलकों में महायुति गठबंधन के भीतर बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है।
🗳️ 23 अक्टूबर को होगा मतदान, 27 को होगी वोटों की गिनती
पुणे के एक नवरात्रि कार्यक्रम के दौरान एकनाथ शिंदे ने मीडिया से बातचीत में पुष्टि की कि उनकी शिवसेना पार्टी ने पुणे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से सचिन सानप को अपना समर्थन दिया है। हालांकि, उनका यह भी मानना है कि सत्ताधारी महायुति गठबंधन विधान परिषद चुनाव की अन्य सीटों पर मिलकर जीत हासिल करेगा।
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चुनावी कार्यक्रम: पुणे ग्रेजुएट्स, नागपुर ग्रेजुएट्स, छत्रपति संभाजीनगर ग्रेजुएट्स, पुणे टीचर्स और अमरावती टीचर्स निर्वाचन क्षेत्रों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान होगा, जबकि डाले गए वोटों की गिनती 27 अक्टूबर को की जाएगी। इन क्षेत्रों के पंजीकृत मतदाता और शिक्षक इस प्रक्रिया में हिस्सा लेंगे।
🌾 विपक्ष के हमलों पर एकनाथ शिंदे का पलटवार
सूखे के दौरान किसानों को दी गई सहायता राशि और राहत कार्यों को लेकर विपक्ष की ओर से की जा रही आलोचना का कड़ा जवाब देते हुए एकनाथ शिंदे ने कहा कि विरोधी नेताओं के पास सरकार की आलोचना करने के अलावा और कोई काम नहीं बचा है। उन्होंने कहा, “पहले इन नेताओं ने राज्य में सूखा घोषित करने की माँग की थी, और अब जब सरकार ने सूखा घोषित कर सहायता पहुँचा दी है, तो ये उसी पर सवाल उठा रहे हैं।”
शिंदे ने किसानों को 5,000 रुपये की अग्रिम राशि देने के फैसले पर सवाल उठाने वालों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि राजनीतिक दलों को अपनी राजनीति को एक तरफ रखकर इस संकट की घड़ी में किसानों के साथ मजबूती से खड़ा होना चाहिए। सरकार की कमियाँ निकालने के बजाय विपक्ष को मिलकर अन्नदाताओं का समर्थन करना चाहिए।
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