Noida Child PGI Negligence: नोएडा के चाइल्ड पीजीआई में डॉक्टर और स्टाफ की लापरवाही, पिता को खुद सिरिंज में भरनी पड़ी दवा
नोएडा: नोएडा के सेक्टर-30 स्थित चाइल्ड पीजीआई (Child PGI) की इमरजेंसी में डॉक्टर और स्टाफ की कथित लापरवाही का एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे एक वीडियो में एक पिता अपने बीमार शिशु के लिए खुद सिरिंज में दवा भरता हुआ साफ दिखाई दे रहा है। इस घटना के सामने आने के बाद अस्पताल की इमरजेंसी में मरीजों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं और स्वास्थ्य कर्मियों की जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, छपरौला गाँव का रहने वाला एक युवक अपने बीमार बच्चे का इलाज कराने के लिए चाइल्ड पीजीआई पहुँचा था। वहाँ इमरजेंसी वार्ड की बदहाल व्यवस्था देखकर वह हैरान रह गया। वायरल वीडियो में पिता खुद अपने बच्चे के लिए सिरिंज में दवा तैयार करते नजर आ रहा है। हालाँकि, वीडियो से यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि दवा की सही खुराक क्या थी, पिता ने वह दवा बच्चे को दी थी या नहीं, और उस वक्त अस्पताल के डॉक्टर व नर्सिंग स्टाफ कहाँ गायब थे।
🌧️ फॉल सीलिंग से टपकता पानी और बदहाल व्यवस्थाएं
नोएडा के चाइल्ड पीजीआई के इमरजेंसी वार्ड की व्यवस्थाओं को लेकर पहले भी लगातार सवाल उठते रहे हैं। कभी यहाँ फॉल सीलिंग से पानी टपकता मिलता है, तो कभी पूरी फॉल सीलिंग ही अचानक मरीजों के ऊपर आ गिरती है। इस तरह की कई वीडियो पहले भी चाइल्ड पीजीआई से सामने आ चुकी हैं, जिसके बावजूद अस्पताल के अधिकारियों द्वारा व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के केवल बड़े-बड़े दावे ही किए जाते रहे हैं। अब एक बार फिर इस नए वायरल वीडियो ने चाइल्ड पीजीआई की सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है।
🔍 वायरल वीडियो के बाद अस्पताल प्रशासन ने दिए जांच के आदेश
यह वीडियो सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर चौतरफा सवाल उठने लगे हैं। इस मामले पर संज्ञान लेते हुए पीजीआई की कार्यवाहक निदेशक डॉ. जोशना मदान ने बताया कि वायरल वीडियो की गंभीरता से जाँच कराई जाएगी। जाँच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना के वक्त असल परिस्थितियाँ क्या थीं और संबंधित मेडिकल स्टाफ की ओर से किसी प्रकार की लापरवाही बरती गई थी या नहीं।
इस घटना ने एक बार फिर सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों की इमरजेंसी सेवाओं पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। बीमार बच्चों को लेकर जब परिजन अस्पताल पहुँचते हैं, तो वे पहले से ही गहरे मानसिक तनाव में होते हैं। ऐसे में उन्हें समय पर उचित चिकित्सा सहायता और स्पष्ट मार्गदर्शन मिलना बेहद जरूरी है। यदि किसी मरीज के परिजन को खुद दवा तैयार करने जैसी विषम परिस्थितियों का सामना करना पड़े, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था पर एक बड़ा तमाचा है और इसकी निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए।
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