Haryana Industrial Policy Update: हरियाणा में नियंत्रित क्षेत्रों के लिए औद्योगिक अनुमति प्रक्रिया हुई आसान, ऑनलाइन स्व-प्रमाणन लागू
हरियाणा सरकार ने नियंत्रित क्षेत्रों में औद्योगिक परियोजनाओं को स्थापित करने और उनकी अनुमति मिलने की प्रक्रिया को बेहद सरल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब निर्धारित शर्तों और नियमों के तहत औद्योगिक प्रयोजन के लिए ऑनलाइन स्व-प्रमाणन (Self-Certification) के माध्यम से प्राप्त होने वाली अनुमति को सीधे तौर पर निदेशक की ओर से जारी अनुमति के बराबर ही माना जाएगा। हालांकि, इस नई व्यवस्था का लाभ उठाने वाले सभी आवेदकों को अपने द्वारा दी गई सभी जानकारियों और दस्तावेजों की सत्यता खुद सुनिश्चित करनी होगी। यदि आवेदन में कोई भी तथ्य गलत पाया जाता है, झूठा बयान दिया जाता है या किसी महत्वपूर्ण जानकारी को छिपाया जाता है, तो वह अनुमति शुरुआत से ही पूरी तरह शून्य (अमान्य) मान ली जाएगी।
📋 नियमों में संशोधन और ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया
नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग की ओर से 6 अक्टूबर को जारी की गई आधिकारिक अधिसूचना के माध्यम से ‘पंजाब अनुसूचित सड़क एवं नियंत्रित क्षेत्र अनियमित विकास प्रतिबंध नियम, 1965’ में हरियाणा राज्य के लिए विशेष संशोधन किए गए हैं।
-
स्व-प्रमाणन का महत्व: संशोधित नियमों के तहत आवेदक को अपनी परियोजना से जुड़ी जरूरी जानकारी, आवश्यक दस्तावेज और संबंधित वचनबद्धता खुद प्रमाणित करके ऑनलाइन पोर्टल पर प्रस्तुत करनी होगी।
-
सरल व्यवस्था: नियम 26ए में किए गए बदलावों के अनुसार, स्व-प्रमाणन के जरिए प्रस्तुत जानकारी को ही इस नियम के तहत वैध आवेदन माना जाएगा और इस पर अन्य जटिल प्रावधानों की जगह सीधे नियमों के तहत कार्रवाई होगी।
-
शब्दावली स्पष्टता: संशोधन के दौरान ‘अनुरूप उपयोग’, ‘अनुरूप क्षेत्र’ और ‘स्व-प्रमाणन’ जैसे शब्दों को भी स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है, जिससे निवेशकों और उद्यमियों को किसी प्रकार की दुविधा न हो।
⚠️ गलत तथ्य पाए जाने पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान
सरकार ने जहां एक तरफ कारोबार को सुगम बनाने के लिए स्व-प्रमाणन की यह बड़ी सुविधा दी है, वहीं इसके साथ कड़े जवाबदेही के प्रावधान भी जोड़े गए हैं। यदि कोई व्यक्ति या कंपनी झूठे बयानों, गलत तथ्यों या अहम जानकारियों को छिपाकर औद्योगिक परियोजना की अनुमति हासिल करती है, तो वह परमिशन जारी होने की तारीख से ही रद्द मानी जाएगी।
नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुराग अग्रवाल की ओर से जारी यह अधिसूचना नियंत्रित क्षेत्रों में निवेश और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा बदलाव है। अन्य गैर-औद्योगिक मामलों में निदेशक की निर्धारित शर्तों को पूरा करने के बाद ही पुरानी प्रक्रिया के तहत अनुमति दी जाएगी।
Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.