Sabudana Health Benefits and Risks: व्रत में खूब खाया जाने वाला साबूदाना सेहत के लिए कितना फायदेमंद? जानिए इसके नुकसान
शारदीय नवरात्रि की शुरुआत के साथ ही बाजारों में फलाहारी चीजों की मांग बढ़ जाती है, और इनमें साबूदाना (Sabudana) सबसे ज्यादा खाया और पसंद किया जाने वाला खाद्य पदार्थ है। सोशल मीडिया पर भी व्रत के दौरान साबूदाना से बनने वाली तमाम रेसिपीज वायरल होती हैं, और कई लोग शाम के फलाहार में इसे नियमित रूप से शामिल करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि साबूदाना असल में क्या है, यह कैसे बनता है, इसमें कौन-कौन से पोषक तत्व होते हैं और यदि इसे रोजाना खाया जाए तो यह आपकी सेहत पर क्या असर डाल सकता है?
🥔 साबूदाना सिर्फ स्टार्च है और कुछ नहीं : डॉक्टर जयेश शर्मा
रायपुर के सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. जयेश शर्मा के अनुसार, नवरात्रि में खाए जाने वाले फूड्स में साबूदाना सबसे बड़ा मुख्य भोजन (Staple) माना जाता है। खाने में स्वादिष्ट लगने वाला साबूदाना असल में हाइली प्रोसेस्ड और प्योर स्टार्च होता है, जो हमारी सेहत के लिए बहुत ज्यादा फायदेमंद नहीं माना जाता है। इसके अलावा, यह कोई देसी खाद्य पदार्थ भी नहीं है, क्योंकि जिस टैपिओका (Tapioca) प्लांट की जड़ से इसे तैयार किया जाता है, वह मुख्य रूप से ब्राजील में उगता है।
जाने-माने फूड एंड साइंस लेखक कृष अशोक भी बताते हैं कि साबूदाना एक अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड है जिसमें सिर्फ कार्बोहाइड्रेट और स्टार्च होता है। व्रत के दौरान इसे खाने से शरीर में सिर्फ कार्ब्स जाते हैं, जो ब्लड शुगर लेवल को तेजी से बढ़ा सकते हैं। बॉब और बबल टी में भी इसी स्टार्च का इस्तेमाल किया जाता है।
🥗 व्रत के दौरान क्या खाना चाहिए और साबूदाना कैसे बनता है?
डॉक्टर जयेश शर्मा का कहना है कि व्रत के दौरान हम अक्सर साबूदाना या मीठी चीजों (जैसे काजू कतली आदि) का शॉर्टकट अपना लेते हैं, जिससे व्रत का पूरा स्वास्थ्य लाभ नहीं मिल पाता है।
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बेहतर विकल्प: उपवास के दौरान अनाज के विकल्प के रूप में राजगीरा या कुट्टू का सेवन करना चाहिए, जिनमें हाई फाइबर और हाई प्रोटीन पाया जाता है। इसके अलावा बादाम, अखरोट, काजू जैसे नट्स, सीड्स, दही या छाछ को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए।
साबूदाना कैसे तैयार किया जाता है? साबूदाना मुख्य रूप से टैपिओका की जड़ से तैयार होता है, जिसे कसावा (Cassava) भी कहा जाता है। ये जड़ें बड़े शकरकंद जैसी दिखती हैं। फैक्ट्रियों में इन्हें धोने के बाद इनके ऊपरी भूरे छिलके को हटा दिया जाता है। इसके बाद अंदर के हिस्से को पीसकर पेस्ट बनाया जाता है, जिसे पानी में घोलकर फिल्टर किया जाता है ताकि रेशे अलग हो जाएं और केवल सफेद स्टार्च बचे। अंत में इसे सुखाकर दानों का आकार दिया जाता है और पॉलिश करके पैक किया जाता है।
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