Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Delhi Electric Buses: दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा, 150 नई इलेक्ट्रिक बसें और 13 नए मॉनिटरि... Bihar Flood News: छपरा में बाढ़ का पानी उतरने के बाद नई मुसीबत, मलबे और महामारियों के साए में जीने क... Moradabad Crime News: मुरादाबाद में दिव्यांग व्यक्ति की घर के अंदर निर्ममता से हत्या, खून से लथपथ मि... Delhi Police Social Media Crackdown: अफवाह फैलाने वाले 500 से ज्यादा पोस्ट डिलीट, 4 एफआईआर दर्ज और 1... Jammu and Kashmir Waqf Board Controversy: वक्फ बोर्ड के जुमे के खुतबे वाले प्रस्ताव पर छिड़ा विवाद, ... Atiq Ahmed Land Chakia Prayagraj: माफिया अतीक अहमद के कब्जे वाली जमीन पर बनेगी पद्मलोक आवासीय योजना,... Rahul Gandhi and Abhijit Dipke Appeal: इंद्रप्रस्थ पुनर्जागरण न्यास की अपील, त्योहारों के सीजन में द... Bhagalpur Viral Video: भागलपुर में ट्रेन की खिड़की से मोबाइल चुरा रहा चोर हवा में लटका, 100 मीटर तक ... IKG PTU Convocation: आईके गुजराल पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी का 14वां दीक्षांत समारोह आयोजित, सीएम मा... Amritsar News: सुल्तानविंड गेट के पास नगर निगम का एक्शन, अवैध रूप से चल रही मीट की दुकानें सील

Supreme Court on Firecrackers: धार्मिक भावनाओं और जनस्वास्थ्य के बीच संतुलन जरूरी, सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

5

दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण और पटाखों के इस्तेमाल से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी की भी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाए बिना लोगों को पटाखों से होने वाले नुकसान के प्रति जागरूक करना बेहद जरूरी है। CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि अदालत ऐसा व्यावहारिक रास्ता अपनाना चाहती है जिसमें धार्मिक भावनाओं और आम जनता के स्वास्थ्य के बीच एक सही संतुलन बना रहे।

सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने सवाल उठाया कि पटाखे फोड़ने का धर्म से आखिर क्या लेना-देना है? इस पर एमिकस क्यूरी अपराजिता सिंह ने कहा कि हर बार पटाखों के इस्तेमाल के समर्थन में धार्मिक भावनाओं का तर्क दिया जाता है, जबकि यदि देवताओं को यह पता चले कि उनके नाम पर बच्चे बीमार पड़ रहे हैं, तो वे भी इससे दुखी होंगे।

🛑 ‘सिर्फ आदेश देने से जमीन पर लागू नहीं होते प्रतिबंध’

सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी अपराजिता सिंह ने कोर्ट के समक्ष यह बात रखी कि अदालत में एक-दो घंटे पटाखे चलाने की समय सीमा तय करना सुनने में अच्छा लगता है, लेकिन जमीन पर ऐसे प्रतिबंधों को प्रभावी रूप से लागू करना बेहद कठिन होता है। पुलिस हर समय और हर गली में मौजूद नहीं रह सकती, इसलिए केवल कागजी आदेश जारी करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने सुझाव दिया कि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) इस मामले में उपलब्ध वैज्ञानिक जानकारी और स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को ध्यान में रखकर विचार कर सकता है।

CJI सूर्यकांत ने भी इस बात से सहमति जताई कि अदालत को कोई भी प्रतिबंध लगाने का आदेश देने से पहले यह अच्छी तरह देखना होगा कि उसे जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकता है या नहीं। उन्होंने जोर दिया कि व्यावहारिक और लागू किए जा सकने वाले उपायों पर ही ध्यान देना चाहिए।

📢 जागरूकता बढ़ाने और सुरक्षित विकल्प अपनाने पर जोर

CJI सूर्यकांत ने कहा कि अदालत किसी की भी धार्मिक भावनाओं को आहत नहीं करना चाहती, लेकिन समाज में जागरूकता बढ़ाना और लोगों को स्वेच्छा से कम नुकसानदेह तरीके अपनाने के लिए प्रेरित करना सबसे बेहतरीन रास्ता है।

  • कम प्रदूषण वाले विकल्प: लोगों को यह समझाने की आवश्यकता है कि कौन से पटाखे ज्यादा नुकसानदेह हैं और कौन से अपेक्षाकृत कम प्रदूषण फैलाते हैं।

  • जन-जागरूकता सामग्री: अदालत ने कम प्रदूषण वाले विकल्पों को बढ़ावा देने और पटाखों के इस्तेमाल को सीमित रखने के लिए जन-जागरूकता सामग्री तैयार करने का सुझाव भी दिया।

CJI ने लोगों से अपील की कि वे त्योहार मनाते समय पर्यावरण और प्रदूषण को कम करने का पूरा ध्यान रखें। इस मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.