NTA Reforms Report: परीक्षा के दिन रैलियों और जुलूसों पर रोक लगाने की मांग, संसदीय समिति ने की बड़ी सिफारिश
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में सुधारों और उसे अधिक मजबूत बनाने के लिए गठित संसदीय समिति ने जिला प्रशासन से एक महत्वपूर्ण अपील की है। समिति ने परीक्षाओं के दौरान छात्रों के लिए शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने, यातायात को पूरी तरह सुचारू रखने और परीक्षार्थियों को किसी भी प्रकार की अनावश्यक परेशानी से बचाने पर विशेष जोर दिया है। संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में सिफारिश की है कि देश या राज्य में किसी भी अहम प्रतियोगी परीक्षा के दिन जिला प्रशासन को किसी भी रैली, जुलूस या जनसभा की अनुमति नहीं देनी चाहिए, ताकि यातायात बाधित न हो, कानून-व्यवस्था के पर्याप्त इंतजाम पहले से सुनिश्चित हों और कोई भी परीक्षार्थी बाहरी व्यवधानों का शिकार न बने।
राज्यसभा सदस्य मुकुल वासनिक की अध्यक्षता वाली शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल संबंधी संसद की स्थायी समिति ने राज्यसभा के सभापति को यह रिपोर्ट सौंपी है। यह सिफारिशें ऐसे समय में आई हैं जब NEET परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने के विवाद और NTA की प्रशासनिक खामियों के चलते देशभर में बड़े पैमाने पर छात्रों के प्रदर्शन हुए थे।
🚫 रैलियों और जनसभाओं पर रोक की जरूरत
PTI के मुताबिक, समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि परीक्षा के दिन निकलने वाली रैलियों, जुलूसों या बड़ी सभाओं के कारण परीक्षार्थियों को परीक्षा केंद्र तक पहुंचने में भारी देरी हो सकती है, जिससे वे निर्धारित समय पर सेंटर नहीं पहुंच पाते।
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समिति ने सिफारिश की है कि लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 में संशोधन किया जाए ताकि जिला प्रशासन परीक्षा के दिन किसी भी प्रकार के आयोजनों की अनुमति न दे।
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यह भी सुनिश्चित किया जाए कि ट्रैफिक सुचारू रहे ताकि किसी भी छात्र को टाले जा सकने वाले बाहरी व्यवधानों का सामना न करना पड़े।
⏰ देरी से पहुंचने वाले छात्रों और औपचारिकताेओं पर सुझाव
अब तक NTA के परामर्श के अनुसार छात्रों को केंद्र पर समय से पहले पहुंचने की सलाह दी जाती है, लेकिन प्रक्रियागत दिक्कतों के कारण कुछ मिनट की देरी होने पर भी छात्रों को प्रवेश नहीं मिलता, जिससे उनकी पूरे साल की मेहनत बेकार हो जाती है। इस पर समिति ने व्यावहारिक सुझाव दिए हैं:
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विलंब पर प्रवेश: समिति का मानना है कि यदि कोई छात्र कुछ वास्तविक कारणों से देर से पहुंचता है, तो कारण दर्ज करने वाले लिखित वचनपत्र पर हस्ताक्षर करवाकर उसे परीक्षा कक्ष में प्रवेश दिया जाए। हालांकि, छात्र को केवल बचा हुआ समय ही मिलेगा और कोई अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा।
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औपचारिकताएं परीक्षा के बीच न हों: परीक्षा के दौरान निरीक्षकों द्वारा हस्ताक्षर कराने और अन्य जांच संबंधी औपचारिकताएं पूरी करने से दबाव में परीक्षा दे रहे छात्रों का ध्यान भटकता है। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि ऐसी औपचारिकताएं परीक्षा शुरू होने से पहले या समाप्त होने के बाद के 15 मिनट के अलग समय में पूरी की जाएं।
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