मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण को 14 प्रतिशत तक सीमित रखे जाने संबंधी हाईकोर्ट के निर्णय के बाद राज्य की राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। फैसले के विरोध में कांग्रेस ने कानूनी लड़ाई लड़ने और सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का ऐलान किया है, वहीं दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी ने इसके लिए सीधे तौर पर कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकारों की गलतियों को जिम्मेदार ठहराया है। भाजपा का कहना है कि कांग्रेस ने राजनीतिक लाभ के लिए जल्दबाजी में आधे-अधूरे कानूनी प्रावधानों के साथ अध्यादेश जारी किया था, जिसका खामियाजा आज युवाओं को भुगतना पड़ रहा है।
🔍 भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल का बयान: “सरकार ओबीसी को 27% आरक्षण दिलाने के लिए वचनबद्ध”
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने इंदौर में पार्टी की मासिक बैठक के दौरान कहा कि कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव से पहले राजनीतिक फायदा उठाने की जल्दबाजी में ओबीसी आरक्षण बढ़ाने का कदम उठाया था, लेकिन उसे मजबूत कानूनी आधार देने में गंभीर चूक की। अब कांग्रेस अपनी गलतियों की जिम्मेदारी लेने के बजाय भाजपा सरकार पर बेबुनियाद आरोप लगा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में भाजपा सरकार ओबीसी वर्ग के सशक्तिकरण और उन्हें 27 प्रतिशत आरक्षण दिलाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है तथा सभी कानूनी विकल्पों पर गंभीरता से विचार कर रही है।
📢 कमलनाथ और जीतू पटवारी का पलटवार, सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने पलटवार करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल (वर्ष 2019) में अन्य राज्यों की तर्ज पर ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण दिया गया था, लेकिन भाजपा सरकारों ने हमेशा इसे समाप्त करने का षड्यंत्र रचा। वर्तमान सरकार की कमजोर पैरवी के कारण ही अदालत में यह स्थिति बनी है। वहीं, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा है कि कांग्रेस इस मामले को लेकर अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी। दूसरी ओर, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने भी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कमलनाथ सरकार ने अध्यादेश लाते समय संवैधानिक प्रावधानों की अनदेखी की थी, जबकि वर्तमान भाजपा सरकार इस मामले में पूरी तरह गंभीर है।
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