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UPI MDR Charges Update: यूपीआई पेमेंट्स पर एमडीआर लगाने का फैसला जनवरी 2027 तक टलने की संभावना

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15 अक्टूबर 2026 से यूपीआई पेमेंट्स पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने की तैयारी चल रही थी, जिसे अब जनवरी 2027 तक टाला जा सकता है। इस नियम को लागू होने में अब बेहद कम समय बचा है, जिसके चलते मर्चेंट एसोसिएशन, फिनटेक कंपनियों और पेमेंट सर्विस देने वाली संस्थाओं ने नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) से इसे आगे बढ़ाने की पुरजोर मांग की है। सूत्रों के मुताबिक, एनपीसीआई अगले दो दिनों में इस पर कोई बड़ा फैसला ले सकता है, और इस मुद्दे को लेकर वित्त मंत्रालय के साथ भी लगातार बातचीत का दौर जारी है।

🛍️ त्योहारी सीजन में कारोबारियों की गुहार और महंगाई का दबाव

उद्योग जगत का कहना है कि वे फिलहाल इस नई व्यवस्था को अपनाने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हैं। सबसे बड़ी समस्या अलग-अलग एमडीआर दरों, नीतियों और उन्हें लागू करने को लेकर बना भारी भ्रम है।

  • त्योहारी सीजन का असर: देश में दिवाली और अन्य बड़े त्योहारों की खरीदारी का समय नजदीक है। पेमेंट इंडस्ट्री से जुड़े संगठनों का तर्क है कि त्योहारी सीजन खत्म होने तक इस फैसले को टाल दिया जाना चाहिए।

  • ग्राहकों पर बोझ: सरकार और कारोबारियों को यह अंदेशा है कि त्योहारी बिक्री के दौरान एमडीआर लगने से व्यापार की लागत बढ़ जाएगी। बाजार में पहले से ही महंगाई का दबाव है, और यदि व्यापारियों पर अतिरिक्त चार्ज का बोझ पड़ा, तो वे इसे ग्राहकों की जेब पर डाल सकते हैं, जिससे खरीदारी का उत्साह कम हो सकता है।

🔄 नया एमडीआर नियम और कार्ड पेमेंट से तुलना

एमडीआर वह फीस होती है जो व्यापारी डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने के एवज में बैंकों को चुकाते हैं। पिछले महीने यूपीआई स्टीयरिंग कमेटी ने 2,000 रुपये से अधिक के ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत यानी 40 बेसिस पॉइंट का एमडीआर तय किया था।

  • कार्ड बनाम यूपीआई: कार्ड पेमेंट के मुकाबले यूपीआई का ढांचा काफी पेचीदा नजर आता है। कार्ड नेटवर्क पर दरें लगभग एक जैसी होती हैं, जबकि यूपीआई के मामले में बिजली-पानी के बिल, लोन चुकाने और कैपिटल मार्केट से जुड़े निवेश के लिए अलग-अलग रेट रखे गए हैं। इनमें से कई भुगतानों को कार्ड के जरिए करने की अनुमति तक नहीं है।

📊 लोन और शेयर बाजार के लेन-देन में उलझन

  • कैपिटल मार्केट: ब्रोकिंग कंपनियों का कहना है कि जब कोई ग्राहक अपने ट्रेडिंग खाते में पैसे डालता है, तो यह दो लोगों के बीच सीधे ट्रांसफर (P2P) जैसा होता है, इसलिए ब्रोकिंग कंपनियों पर एमडीआर लगाना सही नहीं है।

  • लोन रीपेमेंट: एनपीसीआई के निर्देशानुसार ऑटोपे मैंडेट वाले लोन पेमेंट पर केवल 5 रुपये की फ्लैट फीस लगेगी। हालांकि, छोटे लोन लेने वाले ग्राहकों के खाते में पर्याप्त बैलेंस न होने पर ऑटो-डेबिट फेल हो जाता है और जब वे मैन्युअली किस्त चुकाते हैं, तो सिस्टम उसे सामान्य वित्तीय संस्थान पेमेंट मानकर 0.4 प्रतिशत का भारी एमडीआर चार्ज लगा देता है। इन्हीं तकनीकी और नीतिगत उलझनों को दूर करने के लिए उद्योग जगत ने एनपीसीआई से अतिरिक्त समय की मांग की है।

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