Shardiya Navratri 2026: झारखंड के इस अनोखे मंदिर में 9 नहीं बल्कि 16 दिनों तक होती है मां दुर्गा की पूजा
देशभर में 11 अक्टूबर से कलश स्थापना के साथ 9 दिनों तक शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाएगी। लेकिन झारखंड के लातेहार जिले के चंदवा प्रखंड में स्थित सैकड़ों साल पुराने और अतिप्राचीन मां उग्रतारा नगर मंदिर की परंपरा इन सबसे बेहद अलग है। यहां 9 दिन नहीं, बल्कि पूरे 16 दिनों तक नवरात्रि मनाने की अनूठी परंपरा है, जो सदियों से चली आ रही है। देश की ऐतिहासिक और धार्मिक मान्यताओं में विशेष स्थान रखने वाले इस मंदिर में जितिया पर्व के ठीक दूसरे दिन कलश स्थापित कर मां अष्टादशभुजा की पूजा के साथ ही 16 दिवसीय नवरात्रि की शुरुआत हो जाती है।
📜 500 साल पुरानी कैथी लिपि की पोथी से होती है पूजा
आधुनिकता के इस दौर में जहां धार्मिक अनुष्ठानों के लिए भी डिजिटल साधनों और एआई (AI) का उपयोग बढ़ने लगा है, वहीं मां उग्रतारा नगर भगवती के इस मंदिर में आज भी 500 साल से अधिक पुरानी हस्तलिखित कैथी लिपि की पोथी के आधार पर ही सभी पूजा-अनुष्ठान संपन्न किए जाते हैं।
मंदिर के सेवायत सह मुंतजिमकार पंडित गोविंद बल्लभ मिश्र और उप प्रमुख अश्विनी मिश्रा ने बताया कि सदियों पुरानी परंपरा का निर्वहन करते हुए आज भी इसी प्राचीन पांडुलिपि से मंत्रोच्चार और पूजा कराई जाती है।
🍛 माता को फल-मिठाई नहीं, बल्कि लगाया जाता है दाल-चावल और सब्जी का भोग
यह देश का इकलौता ऐसा मंदिर है जहां 16 दिनों की नवरात्रि तो होती ही है, साथ ही माता रानी को साल के 365 दिन फल या मिठाइयों के बजाय दाल-चावल और सब्जी का भोग लगाया जाता है।
-
रसोई घर में माता का प्रवेश: यहां का भोग अनुष्ठान बेहद हैरान करने वाला है। इस मंदिर में स्थापित माता रानी भोग ग्रहण करने के लिए स्वयं प्रतिदिन रसोई घर तक जाती हैं।
-
परंपरा के अनुसार, पुजारी प्रतिदिन माता की प्रतिमा को उठाकर रसोई घर में ले जाते हैं और उन्हें भोग अर्पित करते हैं। भोग लगाने के उपरांत माता की प्रतिमा को वापस उनके मुख्य स्थान पर स्थापित किया जाता है।
🍃 पान का पत्ता गिरने पर ही होती है माता की विदाई
चंदवा-टोरी रोड पर मंदागिरि पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर कई रोचक कहानियों से जुड़ा हुआ है।
-
विजयादशमी के दिन विशेष अनुष्ठान के तहत माता रानी को पान का पत्ता चढ़ाया जाता है।
-
मान्यता है कि जब तक आसन से स्वयं पान का पत्ता नीचे नहीं गिर जाता, तब तक माता का विसर्जन या विदाई नहीं की जाती है।
-
पान के पत्ते का नीचे गिरना इस बात का संकेत माना जाता है कि मां ने अपनी विदाई की अनुमति दे दी है। जब तक यह पत्ता नहीं गिरता, तब तक मंदिर में धार्मिक अनुष्ठान और महाआरती लगातार जारी रहती है।
Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.