पूरी दुनिया के साथ-साथ भारत के सामने भी इस वक्त सबसे बड़ा संकट महंगाई का बना हुआ है। इसी गंभीर चिंता को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के गवर्नर ने आगामी पॉलिसी रेट के ऐलान के दौरान सामने रखा है। आरबीआई के नए महंगाई अनुमानों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में देश की खुदरा महंगाई दर 6 फीसदी तक पहुंच सकती है। खास बात यह है कि यह वही समय होता है जब देश में त्योहारों का सीजन होता है, यानी आम लोगों को इस फेस्टिव सीजन में महंगाई से कड़ा मुकाबला करना पड़ सकता है।
आरबीआई का मानना है कि इस स्थिति का असर दिसंबर महीने में होने वाली मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में भी देखने को मिल सकता है, जिसके चलते एक और रेट हाइक ( ब्याज दर में बढ़ोतरी) की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इस बढ़ती महंगाई के पीछे सबसे बड़े कारण कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और अल नीनो का प्रभाव हैं, जिनका सीधा असर आम आदमी की थाली और रोजमर्रा के बजट पर पड़ रहा है।
📊 आरबीआई ने बढ़ाया महंगाई का अनुमान
रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष के लिए महंगाई के अनुमान को 5 फीसदी से बढ़ाकर 5.2 फीसदी कर दिया है। इस बदलाव के पीछे मुख्य वजहें निम्नलिखित हैं:
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कच्चे तेल की कीमतें: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती लागत और वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव के कारण आयातित महंगाई और फ्यूल के दाम बढ़ रहे हैं।
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रुपये की कमजोरी: इस साल भारतीय मुद्रा (रुपया) में आई कमजोरी के कारण आयात होने वाली चीजें और भी महंगी हो गई हैं।
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तिमाही-दर-तिमाही अनुमान: केंद्रीय बैंक ने दूसरी तिमाही के लिए महंगाई का अनुमान 4.9%, दिसंबर तिमाही के लिए 6%, चौथी तिमाही (Q4) के लिए 5.7% और वित्त वर्ष 2028 की जून तिमाही के लिए 5.6% तय किया है।
⚠️ महंगाई बढ़ने के मुख्य जोखिम और कारण
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कच्चे तेल का संकट: पश्चिम एशिया के संघर्षों के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतें काफी ऊपर चली गई हैं। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, जिससे ट्रांसपोर्टेशन और प्रोडक्शन की लागत बढ़ जाती है।
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अल नीनो और मानसून का असर: मौसम से जुड़े जोखिम सबसे गंभीर हैं। भारत में अल नीनो का संबंध आमतौर पर कम या असमान बारिश से रहा है, जिससे कृषि उत्पादन और खाद्यान्न की सप्लाई पर बुरा असर पड़ता है। मानसून की कमी के कारण सब्जियों, अनाज और अन्य कृषि उत्पादों की कीमतों में उछाल आया है।
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वैश्विक केंद्रीय बैंकों का रुख: अमेरिका के फेडरल रिजर्व, यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) और बैंक ऑफ जापान जैसे दुनिया भर के बड़े सेंट्रल बैंक भी महंगाई के नए जोखिमों से निपटने के लिए अपनी नीतियों को सख्त कर रहे हैं।
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