Maharashtra Water Crisis: गल्हाटी परियोजना का जलस्तर शून्य होने से ग्रामीणों में चिंता, सरकार से वैकल्पिक पानी की मांग
महाराष्ट्र के जालना जिले के अंबड तालुका स्थित बारसवाड़ा की महत्वपूर्ण ‘गल्हाटी मध्यम परियोजना’ इस साल मानसून की बेरुखी के चलते पूरी तरह सूख चुकी है। इस जल परियोजना पर प्रत्यक्ष रूप से निर्भर करीब 15 से 20 गांवों के सामने अब पीने के पानी के साथ-साथ खेती और पशुओं के लिए पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। हैरानी की बात यह है कि अक्टूबर महीने के शुरुआती दिनों में ही बांध का पूरी तरह सूख जाना क्षेत्र के लिए एक बड़ी आपदा का संकेत दे रहा है।
🌾 खरीफ के बाद अब रबी सीजन की फसल पर भी संकट: वापसी की बारिश न होने से किसानों की बढ़ी चिंता
पर्याप्त बारिश न होने के कारण इस बार किसानों का खरीफ सीजन पहले ही बेहद मुश्किल भरा रहा था। किसानों को उम्मीद थी कि मानसून की वापसी के दौरान होने वाली बारिश से इस परियोजना में पानी जमा हो जाएगा, जिससे आगामी रबी सीजन की फसल के लिए सिंचाई में मदद मिल जाएगी। लेकिन, लौटते मानसून ने भी पूरी तरह निराश किया और बारिश न होने के कारण अब रबी सीजन की फसल पूरी तरह खतरे में पड़ गई है। स्थानीय किसानों के लिए यह परियोजना सिंचाई और जीविकोपार्जन का मुख्य आधार रही है।
👥 ग्रामीणों ने प्रशासन से लगाई गुहार: पीने के पानी और पशुओं के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग
परियोजना के सूख जाने से न केवल किसानों के सामने खेती का संकट है, बल्कि आने वाले दिनों में इंसानों और बेजुबान पशुओं के लिए पीने के पानी की भारी किल्लत होने की आशंका है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर सरकार और जिला प्रशासन ने समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया और पानी की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की, तो हालात बेहद भयावह हो जाएंगे। प्रभावित क्षेत्र के लोगों ने सरकार से तत्काल मांग की है कि टैंकरों या अन्य माध्यमों से पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की जाए और किसानों को इस संकट से उबारने के लिए त्वरित राहत उपाय किए जाएं।
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