Kurukshetra News: 12 साल बाद दिवाली पर अमेरिका से घर लौटने वाले थे विक्की अरोड़ा, सड़क हादसे में दर्दनाक मौत; घर पहुंचा ताबूत
हरियाणा के कुरुक्षेत्र के अरोड़ा परिवार में इस समय मातम छाया हुआ है, जो कुछ समय पहले तक अपने बेटे के स्वागत और उसकी शादी की खुशियों की तैयारियों में डूबा हुआ था।
कुरुक्षेत्र के पिहोवा की सिकंदरा कॉलोनी के रहने वाले 34 वर्षीय विक्की अरोड़ा की अमेरिका के ओहायो में एक भीषण सड़क दुर्घटना में दर्दनाक मौत हो गई।
विक्की पिछले करीब 12 वर्षों से अमेरिका में रह रहा था और इस बार नवंबर में दिवाली के मौके पर पहली बार अपने घर लौटने की पूरी तैयारी कर चुका था। परिवार उसके स्वागत और उसके बाद उसकी शादी की योजनाएं बना रहा था, लेकिन किसी को नहीं पता था कि बेटा अपने घर जिंदा नहीं, बल्कि ताबूत में लौटेगा।
💍 दिवाली के बाद तय होनी थी शादी: पिता कश्मीरी लाल ने संजोए थे बेटे को दूल्हा देखने के सपने
परिवार की खुशियों और शादी की तैयारियों का ब्योरा:
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घर वापसी का इंतजार: विक्की के चाचा राजकुमार ने बताया कि परिवार के सभी लोग एक ही कॉलोनी में रहते हैं और इतने लंबे समय बाद बेटे के घर लौटने की खबर से पूरा परिवार बेहद उत्साहित था।
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शादी की प्लानिंग: परिवार की योजना थी कि दिवाली के आसपास जब विक्की घर पहुंचेगा, तो उसके बाद उसके लिए देखे जा रहे रिश्तों पर पक्की बातचीत की जाएगी और उसकी शादी के अरेंजमेंट शुरू होंगे।
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पिता का सपना: पिता कश्मीरी लाल अपने बेटे को दूल्हा बने और उसके सिर पर सेहरा बंधा देखने का सपना संजोए बैठे थे, जिसके लिए वे दुकान से अक्सर जल्दी घर लौट आते थे।
⚰️ ताबूत में घर पहुंचा बेटा: खुशियां चीख-पुकार और मातम में बदलीं
घटना और शव घर पहुंचने के बाद के हालात:
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सड़क हादसे का शिकार: 17 और 18 सितंबर की दरमियानी रात अमेरिका के ओहायो हाईवे पर विक्की अपने ट्राले में सामान लेकर जा रहा था, तभी सामने से गलत दिशा में आ रहे एक अन्य ट्राले को बचाने के प्रयास में उसका वाहन कंक्रीट के बैरियर से टकरा गया।
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दर्दनाक हादसा: टक्कर इतनी भयानक थी कि विक्की ट्राले की खिड़की से छिटककर करीब 20 फीट नीचे रेलवे लाइन पर जा गिरा और सिर में गंभीर चोट लगने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
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रूममेट से मिली सूचना: विक्की के रूममेट हैप्पी ने फोन कर परिवार को इस अनहोनी की जानकारी दी, जिसे दोस्तों से पुष्टि होने के बाद परिवार के सारे सपने टूट गए।
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अंतिम संस्कार: लगभग 15 दिनों की कागजी कार्रवाई के बाद रविवार को विक्की का शव उसके पैतृक घर पहुंचा, जहां भाई सोनू अरोड़ा ने उसे नम आंखों से मुखाग्नि दी।
🤝 दोस्तों की दरियादिली: क्राउडफंडिंग के जरिए जुटाए 20 लाख रुपये, अमेरिका से भारत आया शव
शव लाने में आई कठिनाइयों और दोस्तों के सहयोग की कहानी:
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आर्थिक संकट: बेटे की मौत के सदमे से जूझ रहे परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती अमेरिका से शव को भारत लाने की थी, जिसमें भारी खर्च और जटिल प्रक्रिया शामिल थी।
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फ्रेंड्स ने बढ़ाया मदद का हाथ: ऐसे कठिन समय में अमेरिका में विक्की के दोस्तों और विशेषकर उसके रूममेट हैप्पी ने मदद के लिए सोशल मीडिया पर कैंपेन शुरू किया।
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20 लाख रुपए जुटाए: इस कैंपेन में परिचितों, दोस्तों और अन्य लोगों ने आर्थिक योगदान देकर करीब 20 लाख रुपए जुटाए, जिससे शव को भारत लाने की प्रक्रिया पूरी संभव हो सकी।
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मां का साया पहले ही उठ चुका था: परिवार में अब बुजुर्ग पिता कश्मीरी लाल और भाई सोनू बचे हैं, क्योंकि विक्की की माता राजरानी का निधन करीब तीन साल पहले ही हो चुका था। परिवार की यह दुखद विदाई पूरे शहर में चर्चा का विषय बनी हुई है।
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