Indira Gandhi Krishi Vishwavidyalaya: कृषि वैज्ञानिक डॉ. घनश्याम साहू ने दी सलाह, ऐसे बचाएं अपनी धान, फल और सब्जियां
सितंबर के आखिरी सप्ताह में रायपुर सहित छत्तीसगढ़ के कई जिलों में हुई मूसलाधार बारिश और बाढ़ के कारण बस्तर संभाग समेत लगभग आधा दर्जन जिले जलमग्न हो गए थे। हालांकि अक्टूबर की शुरुआत के साथ ही अब मानसून की विदाई शुरू हो चुकी है, लेकिन पिछले सप्ताह हुई इस जोरदार बारिश का गंभीर असर अब किसानों के खेतों और फसलों पर साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। भारी जलभराव के कारण फल, फूल, अनाज के खेत और हरी सब्जियां काफी हद तक प्रभावित हुई हैं, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।
🐛 खेतों में पानी भरने से बढ़ी फसलों की बीमारियां: कृषि वैज्ञानिकों ने दी बचाव की सलाह
लगातार बारिश के बाद खेतों में लगभग 2 से ढाई फीट तक पानी भर जाने के कारण फल-फूल, सब्जियों और अन्य फसलों में सड़न और कीटों का संक्रमण तेजी से शुरू हो गया है। मौसम में अचानक आए बदलाव और तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण फसलों में कीट-पतंगों और फफूंद जनित बीमारियों की संभावना काफी बढ़ जाती है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि समय रहते किसान उचित कीटनाशकों और सुरक्षात्मक उपायों का उपयोग करें, तो वे अपनी बची हुई फसल को काफी हद तक सुरक्षित रख सकते हैं।
🔬 इंदिरा गांधी कृषि विवि के एक्सपर्ट की राय: नीम ऑयल और कॉपर ऑक्सी क्लोराइड के इस्तेमाल की सलाह
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के प्रमुख कृषि वैज्ञानिक डॉ. घनश्याम साहू ने बताया कि मानसून के जाने और ठंड के आगाज के बीच का यह ‘ट्रांजिशन फेज’ कीटों और बीमारियों के पनपने के लिए सबसे अनुकूल होता है। इस अवस्था में पपीते में रॉटिंग (गलन), लीफ ब्लाइट, अमरूद व अनार में धब्बा रोग, तथा धान, सोयाबीन, मूंग और उड़द जैसी फसलों में हरा माहू, भूरा माहू और टिड्डों का आक्रमण बढ़ जाता है। उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि वे फफूंद जनित बीमारियों के नियंत्रण के लिए ब्लू कॉपर या कॉपर ऑक्सी क्लोराइड का उपयोग करें तथा कीटों से बचाव के लिए दैहिक कीटनाशक या नीम ऑयल (Neem Oil) का स्प्रे करें। खारुन और महानदी के कछार में पानी भरने से सब्जियों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है, जिसे लेकर कृषि विभाग लगातार किसानों को जागरूक कर रहा है।
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