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Maharashtra FDA New Rules: महाराष्ट्र एफडीए के कड़े निर्देश, बेबी फूड और फॉर्मूला मिल्क के पैकेट पर मां-बच्चे की तस्वीर छापने पर रोक

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महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने छोटे बच्चों के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्मूला मिल्क और अन्य बेबी फूड उत्पादों को लेकर बेहद सख्त और नए नियम जारी किए हैं। नए दिशानिर्देशों के तहत यह अनिवार्य किया गया है कि अब उत्पादों के पैकेट पर केवल यह चेतावनी लिखनी होगी कि “बच्चे के लिए मां का दूध सबसे अच्छा आहार है”, लेकिन इसके साथ ही पैकेट पर किसी भी बच्चे या मां की तस्वीर छापने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है।

🚫 विज्ञापनों, फ्री सैंपल और सोशल मीडिया प्रमोशन पर रोक, नियम तोड़ने पर लगेगा 10 लाख तक का जुर्माना

एफडीए के स्पष्ट निर्देशों के अनुसार, अब फॉर्मूला मिल्क और शिशु आहार के किसी भी प्रकार के विज्ञापन, मुफ्त सैंपल (फ्री सैंपल), गिफ्ट, कूपन, कैशबैक, इन्फ्लुएंसर प्रमोशन और सोशल मीडिया प्रचार पर सख्त रोक रहेगी। यह नियम केवल निर्माताओं (मैन्युफैक्चरर्स) तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर भी समान रूप से लागू होंगे। यदि कोई भी इन नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उस पर 10 लाख रुपये तक का भारी जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है।

⚠️ बेबी फूड में प्रिजर्वेटिव, अतिरिक्त रंग और फ्लेवर पर प्रतिबंध, सुक्रोज की मात्रा भी तय

नए नियमों के तहत बेबी फूड में कई हानिकारक चीजों पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। अब उत्पादों में प्रिजर्वेटिव, अतिरिक्त कृत्रिम रंग और फ्लेवरिंग एजेंट का इस्तेमाल प्रतिबंधित रहेगा। इसके अलावा, अतिरिक्त सुक्रोज का इस्तेमाल केवल विशेष जरूरत होने पर और कुल कार्बोहाइड्रेट के अधिकतम 20 फीसदी हिस्से तक ही किया जा सकेगा। साथ ही, उत्पादों पर भ्रामक तरीके से ‘नो एडेड शुगर’ (No Added Sugar) का दावा करने पर भी रोक लगा दी गई है। अस्पतालों और बाल रोग विशेषज्ञों को निर्देश दिए गए हैं कि वे फॉर्मूला मिल्क लेने वाले शिशुओं में दिखने वाले किसी भी संदिग्ध प्रतिकूल प्रभाव की जानकारी तुरंत साझा करें। निर्माताओं को भी किसी भी गंभीर घटना की रिपोर्ट 48 घंटे के भीतर दर्ज करानी होगी। इसके साथ ही निर्माताओं, आयातकों और ब्रांड मालिकों को हर एक बैच की ट्रेसबिलिटी (ट्रेस करने की क्षमता), ग्राहकों की शिकायतों के निवारण और जरूरत पड़ने पर उत्पाद वापस मंगाने (रिकॉल) की व्यवस्था अनिवार्य रूप से बनाए रखनी होगी।

📈 क्या है फॉर्मूला मिल्क और कितना बड़ा है इसका बाजार?

फॉर्मूला मिल्क शिशुओं के लिए तैयार किया जाने वाला दूध का एक कृत्रिम विकल्प है, जिसे आमतौर पर पाउडर के रूप में पानी में घोलकर बच्चों को पिलाया जाता है। इसमें शिशुओं की पोषण संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए प्रोटीन, फैट, कार्बोहाइड्रेट, विभिन्न विटामिन्स और मिनरल्स को शामिल किया जाता है। हालांकि, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार स्वस्थ शिशुओं के लिए जीवन के पहले 6 महीनों तक केवल और केवल मां का दूध ही सबसे उत्तम और जरूरी माना गया है। बता दें कि भारत में फॉर्मूला मिल्क का सालाना बाजार लगभग 27 हजार करोड़ रुपये का है, जिसमें नेस्ले (Nestlé), एबॉट (Abbott), डैनोन (Danone/Nutricia), मीड जॉनसन और फ्रीसलैंडकैंपिना जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं।

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