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Rajasthan News: राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) चुनाव में सियासी घमासान, अध्यक्ष पद पर आमने-सामने दो दिग्गज नेताओं के बेटे

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राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन यानी आरसीए की सत्ता का यह नया संग्राम अब खेल से कहीं ज्यादा रसूखदार नेताओं और उनके राजनीतिक वारिसों की प्रतिष्ठा की सीधी लड़ाई बन चुका है। संस्था के सभी 6 प्रमुख पदों पर आए कुल 29 नामांकनों में सबसे बड़ा और चौंकाने वाला पहलू ‘6 प्रमुख नेता पुत्रों’ की आमने-सामने की दावेदारी है। संस्था के सर्वोच्च अध्यक्ष पद पर कैबिनेट मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के सुपुत्र धनंजय सिंह खींवसर और दिग्गज नेता राजेंद्र राठौड़ के सुपुत्र पराक्रम सिंह राठौड़ सीधे तौर पर आमने-सामने खड़े हैं।

👥 मदन दिलावर, जसवंत यादव और घनश्याम तिवाड़ी के बेटों ने भी ठोकी ताल

उधर, उपाध्यक्ष पद के लिए कैबिनेट मंत्री मदन दिलावर के बेटे पवन दिलावर मैदान में हैं, जबकि सचिव एवं उपाध्यक्ष पद के लिए विधायक जसवंत यादव के बेटे मोहित यादव ने ताल ठोकी है। इसके अलावा, सचिव व कोषाध्यक्ष पद के लिए राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी के बेटे आशीष तिवाड़ी ने भी पर्चा दाखिल कर दिया है। खेल की इस हरी-भरी पिच पर इन तमाम नेता पुत्रों के भारी जमावड़े ने खेल संघों में परिवारवाद और सत्ता के खुले रसूख को लेकर एक नया और बड़ा सियासी बवाल खड़ा कर दिया है।

🏟️ नेताओं के बेटों को सत्ता की सीढ़ी चढ़ाने का सबसे बड़ा सियासी अखाड़ा

आरसीए की चुनावी पिच इस बार राजनीति के बड़े दिग्गजों के बेटों को सत्ता की ऊंची सीढ़ी चढ़ाने का सबसे बड़ा और प्रमुख अखाड़ा बन गई है। अध्यक्ष की सबसे प्रतिष्ठित और मलाईदार कुर्सी के लिए मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के पुत्र धनंजय सिंह खींवसर और वरिष्ठ नेता राजेंद्र राठौड़ के पुत्र पराक्रम सिंह राठौड़ के बीच वर्चस्व की सीधी जंग छिड़ चुकी है।

⚖️ राजनीतिक विरासत और परिवारवाद को चमकाने का लग रहा गंभीर आरोप

शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के बेटे पवन दिलावर उपाध्यक्ष पद के लिए पांच अन्य प्रत्याशियों के बीच ताल ठोक रहे हैं, वहीं बहरोड़ विधायक डॉ. जसवंत सिंह यादव के बेटे मोहित यादव ने सचिव और उपाध्यक्ष दोनों ही अहम पदों पर पर्चा भरा है। दूसरी ओर, सांसद घनश्याम तिवाड़ी के बेटे आशीष तिवाड़ी सचिव और कोषाध्यक्ष दोनों पदों की दौड़ में मजबूती से शामिल हैं। विरोधी राजनीतिक खेमों और आम खेल प्रेमियों का सीधा और गंभीर आरोप है कि खेल संघों से असल और जमीनी क्रिकेटरों तथा अनुभवी खेल प्रशासकों को पूरी तरह दरकिनार करके केवल अपनी राजनीतिक विरासत और परिवारवाद को चमकाने का खुला खेल खेला जा रहा है।

🗳️ बेहद ताकतवर चुनावी समीकरण और पर्दे के पीछे की जबरदस्त घेराबंदी

कुल 38 मतदाताओं वाले इस बेहद छोटे लेकिन अत्यधिक ताकतवर चुनावी समीकरण में 6 प्रमुख नेता पुत्रों की मौजूदगी ने तमाम जिला क्रिकेट संघों के बीच जबरदस्त खींचतान पैदा कर दी है। पर्दे के पीछे से सत्ता और संगठन के बड़े दिग्गज नेता अपने-अपने बेटों को आरसीए की इन मलाईदार कुर्सियों पर बिठाने के लिए अलग-अलग जिला संघों की घेराबंदी और बाड़ेबंदी की कोशिशों में पूरी तरह जुटे हुए हैं।

⚔️ नामांकन पत्रों की जांच के बाद 28 सितंबर को नाम वापसी पर टिकी सबकी नजरें

पुराने और निष्ठावान खेल प्रशासकों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश देखा जा रहा है कि जब भी आरसीए के चुनाव आते हैं, तब राजनीतिक दल अपने वारिसों को संस्था पर थोपने में कोई कसर नहीं छोड़ते। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या खेल संघों में सुधार के तमाम दावे केवल कागजी साबित होंगे और क्रिकेट की पूरी बागडोर एक बार फिर से राजनीतिक घरानों की निजी जागीर बनकर रह जाएगी। नामांकन पत्रों की जांच का दौर पूरा होने के बाद अब सबकी निगाहें 28 सितंबर को होने वाली नाम वापसी पर टिकी हुई हैं। यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या किसी आंतरिक दबाव के चलते कुछ नेता अपने कदम पीछे खींचते हैं या फिर आरसीए की पिच पर नेता पुत्रों के बीच एक कड़ा और आर-पार का मुकाबला देखने को मिलेगा।

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