Punjab School Education: पंजाब में अध्यापकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाने पर रोक, शिक्षा विभाग ने जारी किए सख्त निर्देश
अमृतसर (पंजाब): स्कूलों में विद्यार्थियों की पढ़ाई का स्तर प्रभावित न हो और कक्षाओं का संचालन सुचारू रहे, इसे ध्यान में रखते हुए पंजाब स्कूल शिक्षा विभाग ने अध्यापकों को गैर-शैक्षणिक व प्रशासनिक कार्यों में तैनात न करने के संबंध में बेहद सख्त निर्देश जारी किए हैं।
विभाग द्वारा राज्य के सभी जिलों के डिप्टी कमिश्नरों (DC) को प्रेषित आधिकारिक पत्र में स्पष्ट किया गया है कि कानून के अनुसार निर्धारित स्वीकृत कार्यों के अलावा अध्यापकों से कोई अन्य गैर-शैक्षणिक कार्य न तो लिया जाए और न ही उनकी ऐसी कोई तैनाती की जाए। विभाग के संज्ञान में यह आया था कि अध्यापकों को लंबे समय तक जिला व उप-मंडल स्तर के प्रशासनिक कार्यों में लगाया जा रहा था, जिससे कक्षाओं में पढ़ाई का माहौल बाधित हो रहा था।
🗓️ 30 सितंबर के बाद शिक्षकों को वापस स्कूलों में भेजने के निर्देश: पढ़ाई का नुकसान रोकना प्राथमिकता
समय-सीमा और शैक्षणिक निरंतरता:
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मतदाता सूची संशोधन: पत्र में विशेष रूप से मतदाता सूचियों के विशेष संशोधन कार्य का उल्लेख किया गया है, जिसमें बड़ी संख्या में शिक्षक तैनात हैं।
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समय पर वापसी: विभाग ने आदेश दिया है कि यह प्रक्रिया 30 सितंबर को पूरी हो रही है, इसलिए इसके तुरंत बाद शिक्षकों को स्कूलों से बाहर न रखा जाए और उन्हें तत्काल शिक्षण कार्य के लिए वापस भेजा जाए।
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अध्ययन पर प्रभाव: बार-बार शिक्षकों के बाहर रहने से कक्षाओं की निरंतरता और छात्रों के सीखने के परिणाम (Learning Outcomes) पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिसकी भरपाई बाद में संभव नहीं हो पाती।
⚖️ केवल 3 विशेष कार्यों के लिए ही लगाई जा सकेगी अध्यापकों की ड्यूटी: आरटीई एक्ट का हवाला
स्वीकृत श्रेणियों का विवरण:
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आरटीई एक्ट 2009 का प्रावधान: बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (RTE Act) तथा उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार शिक्षकों को गैर-शिक्षण कार्यों से मुक्त रखना अनिवार्य है।
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तीन स्वीकृत कार्य: कानून के तहत अध्यापकों को केवल चुनाव, जनगणना और आपदा प्रबंधन से जुड़े कार्यों में ही तैनात किया जा सकता है।
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न्यूनतम उपयोग: इन तीन स्वीकृत कार्यों के लिए भी अध्यापकों की तैनाती केवल आवश्यकता के अनुसार न्यूनतम रखी जाए।
⏰ स्कूल समय के बाद या छुट्टियों के दिन करवाई जाए स्वीकृत ड्यूटी: गैर-शिक्षण स्टाफ को प्राथमिकता
कार्यप्रणाली में बदलाव:
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समय का चयन: डिप्टी कमिश्नरों को निर्देशित किया गया है कि स्वीकृत ड्यूटियां जहां तक संभव हो स्कूल समय के बाद या गैर-शिक्षण दिवसों (अवकाश) में ही करवाई जाएं।
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गैर-शिक्षण स्टाफ का उपयोग: किसी भी कार्य के लिए शिक्षकों से पहले कार्यालयों में उपलब्ध गैर-शिक्षण कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जाए।
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अतिरिक्त बोझ नहीं: जो अध्यापक पहले से ही चुनाव संबंधी दायित्व संभाल रहे हैं, उन पर अन्य जिला स्तरीय कार्यों का अतिरिक्त भार बिल्कुल न डाला जाए।
🚫 सर्वेक्षण और तस्दीक कार्यों के लिए मांग पर पूर्ण रोक: विशेष परिस्थिति में पूर्व मंजूरी अनिवार्य
सख्त प्रशासनिक अनुपालन:
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सर्वे और सत्यापन पर रोक: सभी जिला एवं उप-मंडल स्तर के अधिकारियों को पाबंद किया गया है कि वे सामान्य प्रशासनिक कार्यों, सर्वेक्षणों या तस्दीक के लिए शिक्षकों की मांग न करें।
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मुख्यालय की अनुमति: यदि किसी अत्यंत विशेष मामले में अध्यापकों की तैनाती जरूरी हो, तो उसके लिए स्कूल शिक्षा विभाग की पूर्व मंजूरी लेना अनिवार्य होगा।
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अक्षरशः पालन: विभाग ने सभी उपायुक्तों को इन निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा है, ताकि शिक्षकों का पूरा ध्यान छात्रों के पठन-पाठन पर ही केंद्रित रहे।
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