Jharkhand Pride: सरायकेला का चांडिल डैम राष्ट्रीय राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए नामांकित; पूरे राज्य का बढ़ाया मान
सरायकेला। स्वर्णरेखा नदी के आंचल में बसा सरायकेला-खरसावां जिले का प्रसिद्ध चांडिल डैम आज केवल जल का विशाल भंडार मात्र नहीं है, बल्कि यह उन हजारों विस्थापित परिवारों के त्याग, समर्पण और उम्मीदों का सजीव प्रतीक बन चुका है, जिन्होंने कभी देश के विकास के लिए अपनी उपजाऊ जमीनें कुर्बान कर दी थीं।
अब यही चांडिल डैम पूरे देश में झारखंड का परचम लहराने के लिए पूरी तरह तैयार है। बेहतरीन जल प्रबंधन, जन-सरोकार और बहुआयामी उपयोगिता की बेमिसाल मिसाल पेश करते हुए इस डैम को देश के प्रतिष्ठित ‘राष्ट्रपति पुरस्कार’ (National President’s Award) के लिए नामांकित किया गया है।
📊 केंद्र सरकार के पोर्टल पर आंकड़े अपलोड: झारखंड के 67 बांधों में से केवल चांडिल का हुआ चयन
स्वर्णरेखा परियोजना के कार्यपालक अभियंता संजय कुमार ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर अपार खुशी व्यक्त करते हुए बताया कि चयन प्रक्रिया से संबंधित सभी महत्वपूर्ण तकनीकी रिपोर्ट और आंकड़े केंद्र सरकार के अधिकृत पोर्टल पर अपलोड कर दिए गए हैं।
उन्होंने जानकारी दी कि पूरे झारखंड में कुल 67 बांध हैं, जिनमें से 58 पूरी तरह से चालू स्थिति में हैं, 5 निर्माणाधीन हैं, 3 पीएचईडी (PHED) और 1 बिजली बोर्ड के अधीन हैं। राज्य के इन सभी बांधों के बीच से अकेले चांडिल डैम का चयन होना यह साबित करता है कि इसकी कार्यकुशलता, सुरक्षा मानक और जल प्रबंधन राष्ट्रीय स्तर पर सबसे बेहतरीन हैं। अब भारत सरकार द्वारा गठित विशेषज्ञों की जूरी इसकी अंतिम स्क्रीनिंग कर परिणाम घोषित करेगी।
☀️ 600 मेगावाट का तैरता हुआ सोलर प्लांट: हरित ऊर्जा का नया हब बनेगा चांडिल जलाशय
कार्यपालक अभियंता संजय कुमार ने बताया कि चांडिल डैम अब केवल सिंचाई और जल भंडारण तक सीमित नहीं रह गया है।
इस विशाल जलाशय में जल्द ही 600 मेगावाट क्षमता का तैरता हुआ सोलर पावर प्लांट (Floating Solar Plant) आकार लेने जा रहा है। पारंपरिक और आधुनिक पावर प्लांटों की तुलना में यह अपने आप में एक अनोखी, पर्यावरण-अनुकूल और विशाल परियोजना होगी, जो पूरे राज्य को जगमगाएगी।
🏆 विस्थापितों के त्याग और स्वाभिमान को मिलेगी नई पहचान: क्षेत्र में खुशी का माहौल
इंजीनियर संजय कुमार ने पूर्ण विश्वास व्यक्त किया है कि जब विस्थापितों के सामाजिक लाभ, डैम की संरचनात्मक मजबूती और भविष्य की हरित ऊर्जा की उपयोगिता का राष्ट्रीय स्तर पर मूल्यांकन होगा, तो चांडिल डैम सबसे शीर्ष पर खड़ा दिखाई देगा।
उन्होंने कहा कि यदि यह पुरस्कार चांडिल डैम को मिलता है, तो यह इस पूरे क्षेत्र के ग्रामीणों, विस्थापितों और झारखंड के स्वाभिमान को एक नया आयाम और पहचान देगा।
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