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Dhanbad Water Crisis: धनबाद के बलियापुर में जल संकट गहराया; 12 पंचायतों के 27 गांवों में एक महीने से जलापूर्ति ठप

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धनबाद। झारखंड के धनबाद जिले अंतर्गत आने वाले बलियापुर प्रखंड में पेयजल का संकट लगातार गंभीर रूप धारण करता जा रहा है। प्रखंड की लगभग 12 पंचायतों में स्थित 27 गांवों में पिछले एक महीने से जलापूर्ति पूरी तरह से ठप पड़ी हुई है। रेलवे निर्माण कार्य के दौरान मुख्य पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो जाने के बाद से पानी की सप्लाई अचानक बंद हो गई थी। कई सप्ताह बीत जाने के बावजूद जिम्मेदार विभाग द्वारा अब तक इस पाइपलाइन को दुरुस्त नहीं किया जा सका है, जिसके कारण क्षेत्र की एक बड़ी आबादी को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पानी जुटाने में भारी मशक्कत करनी पड़ रही है।

🚜 रखितपुर रेलवे अंडरपास निर्माण में टूटी पाइपलाइन: मरम्मत के लंबे इंतजार से बढ़ा संकट

स्थानीय निवासियों के अनुसार, रखितपुर रेलवे अंडरपास के समीप चल रहे निर्माण कार्य के दौरान अचानक जलापूर्ति की मुख्य पाइपलाइन टूट गई थी।

पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होते ही संबंधित सभी इलाकों में पानी का प्रवाह बंद हो गया। शुरुआत में ग्रामीणों को उम्मीद थी कि प्रशासनिक विभाग जल्द ही पाइपलाइन की मरम्मत करवाकर पानी की आपूर्ति बहाल कर देगा, लेकिन समय बीतने के साथ-साथ ग्रामीणों का इंतजार लंबा होता गया और आज स्थिति बेहद चिंताजनक मोड़ पर पहुंच चुकी है।

🪣 चापाकल और कुओं पर लगी लंबी लाइनें: पानी के लिए दूर-दूर भटकने को मजबूर ग्रामीण

अब आलम यह है कि करीब एक महीने से नल के जरिए लोगों के घरों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है।

हर रोज सुबह होते ही ग्रामीणों को पीने और निस्तार के पानी के इंतजाम की चिंता सताने लगती है। जिन इलाकों में इक्का-दुक्का चापाकल और कुएं चालू स्थिति में हैं, वहां भोर से ही लोगों की भारी भीड़ जमा हो जाती है। कई परिवारों को पानी लाने के लिए काफी दूरी तय करनी पड़ रही है, जिससे खासकर महिलाओं, बुजुर्गों और स्कूल जाने वाले बच्चों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

🧼 वैकल्पिक स्रोतों पर निर्भर रहने की मजबूरी: दैनिक कार्य प्रभावित

पीने के पानी के अलावा खाना बनाने, कपड़े धोने, मवेशियों और नहाने जैसे आवश्यक दैनिक कार्यों के लिए भी लोगों को पूरी तरह से वैकल्पिक और दूषित स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की इस जलापूर्ति योजना पर भरोसा इसलिए जताया गया था ताकि घर-घर तक नियमित और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो सके, किंतु एक महीने से सप्लाई ठप रहने से उन्हें एक बार फिर पुराने दिनों की भांति पानी के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है।

⏳ मरम्मत कार्य में देरी से ग्रामीणों में भारी आक्रोश: प्रशासनिक सुस्ती पर उठे सवाल

क्षेत्रीय निवासियों में इस बात को लेकर गहरा असंतोष है कि मुख्य पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने की जानकारी होने के बाद भी इसकी मरम्मत में इतनी देरी क्यों की जा रही है।

ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि समस्या की गंभीरता को जानते हुए भी विभागीय अधिकारियों और ठेकेदारों के समाधान की गति अत्यंत धीमी है। पानी जैसी बुनियादी और अनिवार्य आवश्यकता के लिए जनता को रोजाना परेशान होना पड़ रहा है, जबकि जिम्मेदार महकमा केवल मूकदर्शक बना बैठा है।

🪧 आर-पार की लड़ाई के मूड में स्थानीय जनप्रतिनिधि और ग्रामीण: आंदोलन की दी चेतावनी

पानी की किल्लत से परेशान होकर अब स्थानीय ग्राम प्रधान (मुखिया) और ग्रामीण इस मुद्दे को लेकर आर-पार के संघर्ष के मूड में नजर आ रहे हैं।

जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने संयुक्त रूप से चेतावनी जारी की है कि यदि जल्द से जल्द क्षतिग्रस्त पाइपलाइन को ठीक कर जलापूर्ति पूर्ववत चालू नहीं की गई, तो वे सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे।

📢 पानी कोई सुविधा नहीं, बुनियादी अधिकार है: जल्द समाधान न होने पर होगा विरोध

मुखिया और ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि पानी कोई लग्जरी या अतिरिक्त सुविधा नहीं, बल्कि जीवन की प्राथमिक और बुनियादी जरूरत है।

लगभग एक महीने से पानी बंद रहने के बाद भी समस्या का समाधान न निकालना सीधे तौर पर ग्रामीणों की तकलीफों की अनदेखी करना है। ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों में कहा है कि अब केवल मौखिक आश्वासनों से काम नहीं चलेगा, अधिकारियों को धरातल पर काम करके पानी की सप्लाई बहाल करनी होगी।

🚰 जल निगम और जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग: टैंकर से पानी देने की अपील

प्रभावित ग्रामीणों ने पेयजल एवं स्वच्छता विभाग तथा जिला प्रशासन से इस मामले में तुरंत संज्ञान लेने का अनुरोध किया है।

उनकी मांग है कि प्रभावित 27 गांवों में पेयजल की बहाली के लिए मरम्मत कार्य में तेजी लाई जाए। साथ ही, जब तक पाइपलाइन की स्थायी मरम्मत पूरी नहीं हो जाती, तब तक प्रभावित इलाकों में पानी के टैंकरों या अन्य वैकल्पिक माध्यमों से नि:शुल्क पेयजल उपलब्ध कराया जाए।

☀️ उमस भरी गर्मी में बिगड़े हालात: विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी नजरें

बलियापुर के इन गांवों में पानी की भारी किल्लत अब बेहद कष्टदायी रूप ले चुकी है।

एक तरफ उमस और गर्मी के कारण पानी की खपत बढ़ गई है, तो दूसरी तरफ सप्लाई बंद होने से लोगों के धैर्य का बांध टूट रहा है। अब पूरे क्षेत्र की नजरें जिला प्रशासन और संबंधित विभाग के अगले कदम पर टिकी हैं। देखना होगा कि विभाग कब तक इस पाइपलाइन को ठीक कराता है, क्योंकि देरी होने की स्थिति में ग्रामीणों का यह आक्रोश बड़े जन-आंदोलन का रूप ले सकता है।

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