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Bittu Tabahi Ajnar River: आनंद महिंद्रा और CM मोहन यादव ने की तारीफ, अब अजनार बचाओ समिति ने खोला मोर्चा

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राजगढ़ (मध्य प्रदेश): जिले के ब्यावरा शहर के बीच से बहने वाली अजनार नदी के कायाकल्प को लेकर अब सोशल मीडिया और जमीन पर श्रेय की नई जंग छिड़ गई है।

नदी की सफाई के वायरल वीडियोज से चर्चा में आए सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर बिट्टू तबाही उर्फ सुरेंद्र सिंह चौधरी ने दावा किया कि उन्होंने अकेले दम पर कड़ी मेहनत कर दूषित हो चुकी नदी की सूरत बदल दी। उनके इस जज्बे को देखकर उद्योगपति आनंद महिंद्रा से लेकर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक ने उनकी मुक्तकंठ से सराहना की। इतना ही नहीं, नीदरलैंड्स की विख्यात संस्था ‘द ओशियन क्लीनअप’ के सीईओ बोयान स्लॉट ने भी उन्हें अपनी अंतरराष्ट्रीय टीम में शामिल होने का खुला प्रस्ताव दिया।

हालांकि, अब अजनार बचाओ समिति, स्थानीय नागरिकों और नगर पालिका प्रशासन ने सामने आकर इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे यह पूरा मामला चर्चा के केंद्र में आ गया है।

📹 26 जनवरी 2026 से शुरू की थी सफाई: आनंद महिंद्रा और सीएम मोहन यादव ने की थी सराहना

बिट्टू तबाही का पक्ष और उपलब्धियां:

  • निजी खर्च और अकेले शुरुआत: बिट्टू तबाही का दावा है कि उन्होंने 26 जनवरी 2026 से बिना किसी सरकारी बजट या भारी मशीनरी के अपने स्तर पर नदी की सफाई शुरू की। उन्होंने अपनी जेब से करीब 30 हजार रुपये खर्च कर उपकरण और डस्टबिन खरीदे।

  • 1.3 मिलियन फॉलोअर्स: सफाई के वीडियोज इंस्टाग्राम और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर शेयर किए जाने के बाद वे रातों-रात वायरल हो गए और उनके 1.3 मिलियन से अधिक फॉलोअर्स हो गए। कई यूजर्स ने उन्हें आधुनिक भारत का ‘दशरथ मांझी’ तक कहना शुरू कर दिया।

  • आनंद महिंद्रा का समर्थन: महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने एक्स (X) पर उनकी तारीफ करते हुए उन्हें ‘माई काइंड ऑफ इन्फ्लुएंसर’ करार दिया।

  • सीएम हाउस में सम्मान: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बिट्टू को भोपाल बुलाकर सम्मानित किया और कहा कि जल संरक्षण के लिए युवाओं की यह सच्ची पहल पूरे मध्य प्रदेश के लिए गौरव की बात है।

  • विदेशी संस्था का ऑफर: समुद्री और नदी प्रदूषण पर काम करने वाली प्रसिद्ध डच कंपनी ‘द ओशियन क्लीनअप’ (The Ocean Cleanup) के सीईओ बोयान स्लॉट (Boyan Slat) ने भी बिट्टू को नीदरलैंड्स आकर साथ काम करने का न्योता दिया।

👥 कहानी का दूसरा पहलू: ‘2016 से चल रहा है अभियान, अकेले का नहीं सामूहिक प्रयास’

अजनार बचाओ समिति और नगर पालिका के गंभीर आरोप:

  • वर्ष 2016 से जारी मुहिम: अजनार बचाओ समिति और नगर पालिका का कहना है कि अजनार नदी की सफाई कोई अचानक शुरू हुआ अभियान नहीं है। पिछले 6 से 7 वर्षों से सामाजिक संगठन, पर्यावरण प्रेमी और नगर पालिका संयुक्त रूप से श्रमदान कर रहे हैं।

  • समिति के साथ काम करने की बात: समिति के अध्यक्ष राम भील ने आरोप लगाया कि बिट्टू भी अन्य स्वयंसेवकों की तरह समिति के सामूहिक अभियानों में शामिल होते थे, लेकिन सोशल मीडिया पर उन्होंने पूरी नदी की सफाई को अपने अकेले के पराक्रम के रूप में प्रचारित कर दिया।

  • नगर पालिका सीएमओ का बयान: नगर पालिका सीएमओ इकरार अहमद ने भी स्पष्ट किया कि 2016 से लगातार प्रशासन और स्थानीय लोग इस पर काम कर रहे हैं। इतनी विशाल नदी की संपूर्ण सफाई किसी एक अकेले व्यक्ति के बस की बात नहीं है।

🗣️ आरोपों पर बिट्टू तबाही की सफाई: ‘लोग चले जाते थे, पर मैं लगातार डटा रहा’

आरोपों को खारिज करते हुए बिट्टू का तर्क:

  • सहयोग को स्वीकारा: बिट्टू तबाही ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने कभी प्रशासन और जनता के सहयोग से इनकार नहीं किया है।

  • निरंतरता का दावा: उनका कहना है कि जब विभिन्न संस्थाएं फोटो खिंचवाकर या कुछ घंटे अभियान चलाकर लौट जाती थीं, तब भी वे अकेले गंदे पानी में उतरकर लगातार कचरा निकालते रहते थे।

  • जन-जागरूकता का उद्देश्य: बिट्टू के मुताबिक, वीडियो बनाने का मकसद शोहरत पाना नहीं बल्कि युवाओं को स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना था।

⚖️ अजनार नदी की सफाई का असली हीरो कौन: शोहरत, श्रेय और जमीनी हकीकत की जंग

ब्यावरा की जमीनी सच्चाई और बहस:

  • सोशल मीडिया बनाम धरातल: अजनार नदी की सफाई का मुद्दा अब सिर्फ पर्यावरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह डिजिटल शोहरत, सामूहिक श्रमदान और व्यक्तिगत श्रेय के बीच की बहस बन चुका है।

  • जनता के बीच सवाल: स्थानीय स्तर पर अब यह चर्चा गर्म है कि इस अभियान का असली हकदार कौन है—सालों से बिना किसी प्रचार के पसीना बहाने वाली समिति और प्रशासन, या फिर कैमरे के सामने उतरकर राष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे को पहचान दिलाने वाले बिट्टू तबाही।

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