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बरेली-देहरादून अंतरराज्यीय ड्रग नेटवर्क का पर्दाफाश, 2.60 करोड़ की हेरोइन के साथ जब्बार खां गिरफ्तार

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बरेली (उत्तर प्रदेश): उत्तराखंड सरकार के ‘ड्रग्स फ्री देवभूमि’ अभियान के बीच एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) और उत्तर प्रदेश की मीरगंज पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाकर एक बड़े अंतरराज्यीय ड्रग सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है।

पुलिस टीम ने सटीक सूचना पर घेराबंदी कर बरेली के फरीदपुर निवासी शातिर तस्कर जब्बार खां को गिरफ्तार किया है। आरोपी के कब्जे से अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगभग 2.60 करोड़ रुपये आंकी गई उच्च गुणवत्ता वाली हेरोइन बरामद की गई है। गिरफ्तारी के बाद पुलिस पूछताछ में जब्बार द्वारा किए गए चौंकाने वाले खुलासों ने दोनों राज्यों की सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों के होश उड़ा दिए हैं।

🚗 महीने में 25 से 30 बार देहरादून के फेरे: शक से बचने के लिए अपनाता था ‘स्मार्ट’ पैंतरा

तस्करी की कार्यप्रणाली और पुलिस जांच के तथ्य:

  • दैनिक आवाजाही: पुलिस जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि आरोपी जब्बार खां महीने में लगभग 25 से 30 बार बरेली से देहरादून की यात्रा करता था।

  • सामान्य वाहनों का उपयोग: किसी भी सुरक्षा एजेंसी की नजरों से बचने के लिए वह निजी कार, कैब या सामान्य रोडवेज बसों का इस्तेमाल सामान्य यात्री की तरह करता था ताकि उस पर किसी को संदेह न हो।

  • छोटी खेप की रणनीति: पकड़े जाने के बड़े जोखिम से बचने के लिए वह एक साथ भारी मात्रा ले जाने के बजाय छोटी-छोटी खुराकों में हेरोइन देहरादून तक पहुंचाता था।

🎓 एजुकेशन हब, हॉस्टल्स और पीजी तस्करों के निशाने पर: छात्रों को बनाते थे पैडलर

युवाओं को नशे के जाल में फंसाने का खतरनाक तरीका:

  • छात्रों पर नजर: देहरादून देश का बड़ा एजुकेशन हब है, जहां देश भर से लाखों विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। निजी शिक्षण संस्थानों, इंजीनियरिंग व मेडिकल कॉलेजों और कोचिंग संस्थानों के आसपास संचालित हॉस्टल व पीजी तस्करों के मुख्य टारगेट पर रहते हैं।

  • मुफ्त में लत लगाने का खेल: तस्कर सीधे परिसरों में घुसने के बजाय संपन्न परिवारों के उन छात्रों से संपर्क साधते थे जो पहले से नशे की ओर आकर्षित होते थे। शुरुआत में उन्हें मुफ्त में नशा देकर आदी बनाया जाता था।

  • छात्रों के जरिए नेटवर्क विस्तार: एक बार लत लग जाने के बाद उन्हीं छात्रों को मजबूर कर अन्य सहपाठियों तक माल पहुंचाने और नेटवर्क फैलाने का जरिया बना लिया जाता था।

💰 चार गुना तक भारी मुनाफा: 2 हजार की हेरोइन 8 हजार में खपाने का खेल

मुनाफे का गणित और प्रमुख डिलीवरी पॉइंट्स:

  • स्थानीय खरीद स्रोत: जांच में पुष्टि हुई है कि हेरोइन की खेप बरेली के फरीदपुर, फतेहगंज पश्चिमी और मीरगंज के ग्रामीण इलाकों से उठाई जाती थी।

  • रेट का बड़ा अंतर: बरेली में जिस हेरोइन की दर 1,500 से 2,000 रुपये प्रति ग्राम होती थी, उसे देहरादून में छात्रों और युवाओं को 6,000 से 8,000 रुपये प्रति ग्राम तक की ऊंची कीमत पर बेचा जाता था।

  • वीकेंड पार्टियों में खपत: इसी चार गुना मुनाफे के चलते यह नेटवर्क धड़ल्ले से चल रहा था। इसके अलावा राजपुर रोड, मसूरी डायवर्जन, सहस्त्राधारा और झाझरा के लक्जरी विला, कैफे और वीकेंड रेव पार्टियों में भी इस नशे की भारी मांग दर्ज की गई है।

👮‍♀️ एसपी साउथ अंशिका वर्मा का बयान: बैकवर्ड-फॉरवर्ड लिंकेज खंगालने में जुटी पुलिस

अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष और आगे की कार्रवाई:

  • संयुक्त कार्रवाई की सफलता: एसपी साउथ अंशिका वर्मा ने बताया कि एएनटीएफ और थाना मीरगंज पुलिस की संयुक्त घेराबंदी में 2.60 करोड़ रुपये मूल्य की हेरोइन जब्त कर आरोपी को दबोचा गया है।

  • 20 से 25 फेरों की पुष्टि: पूछताछ में आरोपी ने कबूल किया है कि वह बीते कुछ समय में 20 से अधिक बार देहरादून माल पहुंचाने जा चुका है और यह पूरा सिंडिकेट उत्तराखंड के बड़े ड्रग माफियाओं से जुड़ा हुआ है।

  • वित्तीय लेनदेन की जांच: पुलिस अब आरोपी के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल (CDR), डिजिटल चैट और बैंक खातों के वित्तीय लेनदेन का फोरेंसिक विश्लेषण कर रही है, ताकि इस सिंडिकेट के मुख्य सरगना और बैकवर्ड सप्लायरों तक पहुंचकर उन पर कड़ा कानूनी शिकंजा कसा जा सके।

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