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हजारीबाग में भारत की ‘प्रथम रक्षा पंक्ति’ का हिस्सा बने 140 जवान, IG धीरेंद्र संभाजी कुटे ने ली सलामी

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हजारीबाग (झारखंड): सहायक प्रशिक्षण केंद्र, सीमा सुरक्षा बल (BSF) मेरू कैंप हजारीबाग के ऐतिहासिक रानी लक्ष्मीबाई परेड ग्राउंड में शनिवार को दीक्षांत परेड समारोह पूरी गरिमा और उत्साह के साथ संपन्न हुआ।

इस भव्य दीक्षांत परेड में 140 नव-प्रशिक्षित आरक्षकों ने राष्ट्र सेवा और सीमाओं की सुरक्षा के लिए पूर्ण निष्ठा की शपथ ली। शपथ ग्रहण के दौरान गूंजे ‘भारत माता की जय’ के नारों से समूचा परिसर देशभक्ति के रंग में सराबोर हो गया।

🎖️ 44 सप्ताह तक चला कठिन बुनियादी प्रशिक्षण: कदमताल से जवानों ने जीता दिल

कड़े प्रशिक्षण और अनुशासन की मिसाल:

  • कठिन साधना का समापन: ‘देश हमें सब कुछ देता है, हम भी तो कुछ देना सीखे’ के मूल मंत्र को आत्मसात करते हुए जवानों ने 44 सप्ताह का अत्यधिक कठिन, शारीरिक और मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण बुनियादी प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया।

  • आकर्षक कदमताल: दीक्षांत परेड में हिस्सा ले रहे जवानों के सधे हुए कदमों और अनुशासित तालमेल ने उपस्थित सभी अतिथियों और अधिकारियों का दिल जीत लिया।

  • सांस्कृतिक विविधता का संगम: इस बैच में केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक सहित देश के कोने-कोने से आए युवाओं ने हिस्सा लिया।

  • बीएसएफ बैंड की गूंज: समारोह के दौरान पारंपरिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और सीमा सुरक्षा बल के सुमधुर बैंड की राष्ट्रभक्ति धुनों ने वातावरण को अत्यंत भावुक और गौरवमयी बना दिया।

⚔️ आधुनिक हथियार, कानून और उग्रवाद से निपटने की दी गई ट्रेनिंग: IG ने गिनाईं खूबियां

प्रशिक्षण का तकनीकी दायरा और विशेषज्ञता:

  • बहुआयामी ट्रेनिंग मॉड्यूल: प्रशिक्षण केंद्र के महानिरीक्षक (IG) धीरेंद्र संभाजी कुटे ने बताया कि जवानों को केवल शारीरिक मजबूती ही नहीं, बल्कि अत्याधुनिक स्वचालित हथियार चलाने, सामरिक युद्ध कौशल और विभिन्न विधिक कानूनों की गहन समझ दी गई है।

  • अंतरराष्ट्रीय नियम व मानवाधिकार: जवानों को अंतरराष्ट्रीय सीमा प्रबंधन के नियम, मानवाधिकार संरक्षण तथा आतंकवाद व उग्रवाद से निपटने के विशिष्ट गुर सिखाए गए हैं।

  • समग्र विकास: इसके अतिरिक्त खेलकूद, अनुशासन और नागरिक-सैन्य समन्वय (सिविक एक्शन) की गतिविधियां भी प्रशिक्षण पाठ्यक्रम का अहम हिस्सा रहीं।

🛡️ पश्चिमी सीमाओं और नक्सल मोर्चों पर होगी तैनाती: देश की प्रथम रक्षा पंक्ति में शामिल

जवानों का आगामी कार्यक्षेत्र:

  • संवेदनशील क्षेत्रों में पोस्टिंग: दीक्षांत परेड पूरी करने वाले ये नव-प्रशिक्षित जवान अब देश के विभिन्न हिस्सों में अपनी सेवाएं देंगे। विशेष रूप से इन्हें आंतरिक सुरक्षा के तहत नक्सल प्रभावित संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात किया जाएगा।

  • पश्चिमी सीमांत की सुरक्षा: इसके अलावा पंजाब और जम्मू-कश्मीर से सटी अंतरराष्ट्रीय सीमा की विषम भौगोलिक परिस्थितियों और चुनौतियों के बीच इन जवानों को देश की संप्रभुता की रक्षा का दायित्व सौंपा जाएगा।

  • प्रथम रक्षा पंक्ति का गौरव: इस औपचारिक दीक्षांत के साथ ही वे आधिकारिक तौर पर सीमा सुरक्षा बल—भारत की प्रथम रक्षा पंक्ति के पूर्ण सदस्य बन गए हैं।

💐 महानिरीक्षक ने जवानों के परिजनों को दी बधाई: राष्ट्र सेवा के लिए हजारीबाग का गौरव

अभिभावकों का सम्मान और गौरव के क्षण:

  • सपूतों का राष्ट्र को समर्पण: महानिरीक्षक धीरेंद्र संभाजी कुटे ने नव-आरक्षकों के माता-पिता और परिजनों को बधाई देते हुए कहा कि अपने सपूतों को बीएसएफ में भेजकर उन्होंने देश की रक्षा में अमूल्य योगदान दिया है, जिसे राष्ट्र सदैव सम्मान के साथ याद रखेगा।

  • माता-पिता की खुशी: परेड ग्राउंड में मौजूद परिजनों ने अपने बच्चों को वर्दी में देख गर्व व्यक्त किया।

  • हजारीबाग के लिए ऐतिहासिक पल: मेरू स्थित बीएसएफ प्रशिक्षण केंद्र से प्रशिक्षित होकर निकले ये जांबाज अब देश की हिफाजत करेंगे, जो स्थानीय स्तर पर भी गौरव और सम्मान का विषय है।

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