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लाल आतंक के साए में भी बेदाग रही छवि, जानिए लातेहार के खरवार बहुल गांव की गौरवगाथा

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लातेहार (झारखंड): जिले में कभी नक्सलियों और उग्रवादी संगठनों का एकछत्र वर्चस्व हुआ करता था। उस दौर में शायद ही कोई ऐसा सुदूर इलाका बचा था जहां नक्सलियों का खौफ न हो, लेकिन लातेहार सदर थाना क्षेत्र का ‘ओरवाई’ एक ऐसा अनूठा गांव रहा है, जहां के ग्रामीणों ने कभी भी उग्रवाद का दामन नहीं थामा। भीषण दबाव, धमकियों और प्रलोभनों के बावजूद इस गांव के किसी भी नागरिक ने मुख्यधारा छोड़कर बंदूक नहीं उठाई। आज जब इलाके में शांति स्थापित हो चुकी है, तो यहां के निवासी पूरे आत्मसम्मान और फक्र के साथ बेदाग जीवन जी रहे हैं।

🚫 न प्रलोभन में आए और न दबाव में झुके: ग्रामीणों ने कभी नहीं दिया उग्रवादियों का साथ

ग्रामीणों के संघर्ष और अडिग संकल्प का इतिहास:

  • नक्सलियों का गढ़ था इलाका: कुछ वर्ष पूर्व तक लातेहार जिला माओवादी गतिविधियों का प्रमुख केंद्र माना जाता था, जहां नक्सलियों के एक फरमान पर जनजीवन पूरी तरह ठहर जाता था।

  • संगठन में शामिल करने का दबाव: ओरवाई गांव के चारों ओर घने जंगलों में नक्सलियों की सक्रिय आवाजाही रहती थी। वे अक्सर गांव में आकर युवाओं को कभी पैसों का लालच तो कभी हथियारों का डर दिखाकर संगठन में भर्ती करने का प्रयास करते थे।

  • ग्रामीणों का अटूट फैसला: स्थानीय ग्रामीण दुबराज सिंह, बालमुकुंद सिंह और ग्राम प्रधान जगलाल सिंह के अनुसार, तमाम विपरीत परिस्थितियों के बाद भी गांव के किसी भी व्यक्ति ने कभी नक्सलियों की मदद नहीं की और न ही उनके किसी गैरकानूनी कृत्य में भागीदार बने।

🏕️ माओवादी, TSPC और JJMP का था जमावड़ा: फिर भी कायम रहा शांति का माहौल

ओरवाई गांव की सामाजिक संरचना और पृष्ठभूमि:

  • विभिन्न संगठनों का प्रभाव: गांव के आसपास के जंगलों में पहले भाकपा (माओवादी) और बाद में टीएसपीसी व जेजेएमपी जैसे उग्रवादी गुटों का दबदबा रहा।

  • सार्वजनिक स्थलों पर मौजूदगी: कई बार सशस्त्र दस्ते सार्वजनिक चौपालों या पेड़ों के नीचे आकर विश्राम करते थे, परंतु ग्रामीणों ने न तो उनसे कोई सहयोग लिया और न ही उन्हें शरण दी।

  • खरवार जनजाति बहुल गांव: लगभग 100 परिवारों वाले इस गांव में अधिकांश आबादी खरवार जनजाति की है। यह पूरा समुदाय अपनी सादगी, पारंपरिक मूल्यों और शांतिप्रिय जीवनशैली के लिए जाना जाता है।

👏 ‘समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं यहां के लोग’: उप प्रमुख ने सराहा

स्थानीय जनप्रतिनिधियों की प्रतिक्रिया:

  • जंगलों के बीच बहादुरी की मिसाल: लातेहार प्रखंड के उप प्रमुख राजकुमार प्रसाद ने कहा कि घने जंगलों से घिरे होने के कारण यह इलाका अत्यधिक संवेदनशील था।

  • एक भी युवा नहीं भटका: उन्होंने गर्व व्यक्त किया कि सबसे भीषण दौर में भी इस गांव का एक भी युवा भटकाव की राह पर नहीं गया और न ही गांव का नाम किसी नक्सली अपराध से जुड़ा, जो समूचे झारखंड के लिए अनुकरणीय है।

👮 पुलिस और जनता के बीच मजबूत विश्वास: एसडीपीओ ने की ग्रामीणों की तारीफ

सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस का सकारात्मक संदेश:

  • एसडीपीओ संदीप कुमार गुप्ता का वक्तव्य: लातेहार एसडीपीओ संदीप कुमार गुप्ता ने ग्रामीणों के अदम्य साहस की सराहना करते हुए कहा कि ओरवाई गांव के लोग समाज के लिए सच्चा आदर्श हैं।

  • उग्रवाद के खात्मे की ओर जिला: उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों के निरंतर अभियानों और आम जनता के सहयोग से लातेहार जिला अब लगभग उग्रवाद मुक्त हो चुका है।

  • सच्चे मित्र के रूप में पुलिस: पुलिस प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी परिस्थिति में असामाजिक तत्वों के झांसे में न आएं। पुलिस ग्रामीणों की सुरक्षा और विकास के लिए सदैव तत्पर है।

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