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टोरियाखुर्द स्कूल से कबाड़ी को भेजी जा रही थीं पाठ्यपुस्तकें, DPC ने दिए जांच के आदेश

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शिवपुरी (मध्य प्रदेश): जिले के नरवर विकासखंड अंतर्गत ग्राम टोरियाखुर्द स्थित शासकीय प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालय से सरकारी पाठ्यपुस्तकों को कबाड़ में बेचने का गंभीर मामला सामने आया है।

ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए विद्यालय के शिक्षक हरनाथ मौर्य को लोडिंग वाहन में भारी मात्रा में किताबें भरकर ले जाते समय रंगे हाथ पकड़ लिया। ग्रामीणों का आरोप है कि शिक्षक लगभग 5 क्विंटल (500 किलोग्राम) सरकारी किताबें गैरकानूनी ढंग से कबाड़ी को बेचने ले जा रहे थे। इस घटना के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग और पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।

🚚 लोडिंग ऑटो में बोरियां भरकर ले जाने की थी तैयारी: ग्रामीणों ने घेराव कर रोकी गाड़ी

घटनाक्रम और मौके की स्थिति:

  • परिसर से लोडिंग: जानकारी के मुताबिक, स्कूल परिसर से लोडिंग वाहन में बोरियों और बंडलों में बांधकर किताबें चढ़ाई जा रही थीं।

  • ग्रामीणों का धावा: स्थानीय ग्रामीणों को जैसे ही गुप्त रूप से किताबें ले जाए जाने का अंदेशा हुआ, उन्होंने तत्काल मौके पर पहुंचकर वाहन को चारों तरफ से घेर लिया।

  • निशुल्क पुस्तकों की खेप: जांच करने पर गाड़ी में छात्रों को निशुल्क वितरण के लिए भेजी जाने वाली पाठ्यपुस्तकों की बड़ी खेप बरामद हुई, जिसका वजन लगभग 5 क्विंटल आंका गया। ग्रामीणों ने आक्रोश जताते हुए कहा कि जहां छात्र किताबों के लिए परेशान रहते हैं, वहीं शासन के पैसे से छपी पुस्तकों को कौड़ियों के भाव कबाड़ में बेचा जा रहा है।

🗣️ पकड़े जाने पर शिक्षक की सफाई: ‘पुरानी सामग्री थी, नियमों के तहत हो रहा था निस्तारण’

आरोपी शिक्षक का पक्ष और नियमों का उल्लंघन:

  • लिखित आदेश का अभाव: ग्रामीणों द्वारा घेराव करने पर शिक्षक हरनाथ मौर्य ने दावा किया कि ये सभी किताबें पुरानी और अनुपयोगी रद्दी थीं, जिन्हें विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप हटाया जा रहा था। हालांकि, मौके पर शिक्षक कोई भी आधिकारिक अनुमति पत्र या पंचनामा नहीं दिखा सके।

  • कबाड़ निस्तारण के नियम: शासकीय नियमानुसार पुरानी पाठ्यपुस्तकों को कबाड़ घोषित करने के लिए शाला प्रबंधन समिति (SMC) का प्रस्ताव पास होना आवश्यक है।

  • नीलामी की अनिवार्यता: इसके अलावा BRC या संकुल प्राचार्य की अनुमति के बाद ही आधिकारिक समिति की उपस्थिति में सार्वजनिक नीलामी की जाती है और राशि सरकारी कोष में जमा होती है, जिसका यहां अभाव दिखा।

📢 ग्रामीणों में भारी आक्रोश: निष्पक्ष जांच और कठोर कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों के प्रमुख सवाल और चेतावनी:

  • बिना नीलामी के परिवहन: ग्रामीणों ने प्रश्न उठाया कि बिना किसी वैध समिति और सार्वजनिक नीलामी के गुपचुप तरीके से निजी लोडिंग वाहन में किताबें कैसे भरी जा रही थीं।

  • सत्र की किताबों का संशय: ग्रामीणों ने मांग की है कि जांच कराई जाए कि क्या केवल रद्दी थी या चालू शैक्षणिक सत्र की नई किताबों को भी खपाया जा रहा था।

  • आंदोलन की चेतावनी: ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा है कि यदि दोषी शिक्षक और इसमें संलिप्त अधिकारियों पर त्वरित विभागीय व दंडात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो वे जिला स्तर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे।

📋 DPC का बयान: ‘किताबें बेचने की कोई अनुमति नहीं, होगी सख्त विभागीय कार्रवाई’

प्रशासनिक रुख और जांच के निर्देश:

  • अनुमति से इनकार: जिला परियोजना समन्वयक (DPC) दफेदार सिंह सिकरवार ने कहा कि टोरियाखुर्द स्कूल से किताबों के निस्तारण या बिक्री को लेकर विभाग से कोई आदेश जारी नहीं हुआ है।

  • जांच दल गठित: मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच प्रतिवेदन तलब किया गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जांच में दोष सिद्ध होते ही संबंधित शिक्षक के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

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