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रतलाम मंडी में प्याज ₹45 तो बाजार में ₹60 किलो, बिचौलिए कमा रहे मुनाफा

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रतलाम (मध्य प्रदेश): मालवा क्षेत्र की कृषि उपज मंडियों में इन दिनों प्याज के भाव में लगातार उछाल दर्ज किया जा रहा है हालांकि, नीलामी के लिए पहुंच रही प्याज की भारी आवक के चलते किसानों को इस मूल्य वृद्धि का यथोचित लाभ नहीं मिल पा रहा है। मंडी में किसानों से खरीदे जा रहे थोक मूल्य और खुदरा बाजार (Retail Market) में उपभोक्ताओं को बेचे जा रहे प्याज की कीमतों में 15 से 18 रुपये प्रति किलो तक का भारी अंतर देखने को मिल रहा है। रतलाम कृषि उपज मंडी में उत्तम गुणवत्ता वाला प्याज जहां अधिकतम 45 रुपये प्रति किलो खरीदा जा रहा है, वहीं रिटेल दुकानों पर यही प्याज 55 से 60 रुपये किलो तक बिक रहा है। नतीजतन, इस तेजी का सीधा फायदा अन्नदाता के बजाय बिचौलियों और मध्यस्थों की जेब में जा रहा है।

⚖️ थोक और खुदरा दरों में अंतर की वजह: विशेषज्ञों और व्यापारियों का गणित

बाजार विशेषज्ञों और आढ़तियों का विश्लेषण:

  • सामान्य से दोगुना अंतर: बाजार जानकारों के अनुसार सामान्यतः प्याज, लहसुन और हरी सब्जियों के थोक व खुदरा मूल्य में 5 से 10 रुपये प्रति किलो का अंतर होता है, लेकिन वर्तमान में यह अंतर असामान्य रूप से बढ़कर 18 रुपये तक पहुंच गया है।

  • नई आवक की कमी: प्याज-लहसुन कारोबार के जानकार निलेश बाफना के मुताबिक, सितंबर से नवंबर के दौरान नए प्याज की आवक रुकने से कीमतों में तेजी बनी रहती है। दक्षिण भारत से प्याज की नई खेप आने तक उपभोक्ताओं को ऊंचे दामों से राहत मिलने के आसार कम हैं।

  • अतिरिक्त खर्चे और वजन घटना: मंडी व्यापारी प्रदीप शर्मा ने बताया कि 45 रुपये में खरीदे गए प्याज पर लेबर चार्ज, बारदाना, मंडी टैक्स और लोडिंग-अनलोडिंग जोड़कर लागत 50 रुपये तक पहुंच जाती है। इसके अतिरिक्त वर्तमान गुणवत्ता के कारण प्याज में नमी सूखने से कट्टे का वजन कम होता है और प्याज सड़ने का जोखिम रहता है, जिसके चलते खुदरा विक्रेता इसे 55 से 60 रुपये प्रति किलो में बेचते हैं।

📉 मालवा में इस बार प्याज उत्पादन कम: मंडी में आवक बढ़ने से गिरे दाम

किसानों की समस्याएं और जमीनी हकीकत:

  • उत्पादन में गिरावट: पिछले वर्षों की तुलना में इस बार किसानों को भाव तुलनात्मक रूप से बेहतर मिले हैं, लेकिन मौसम की मार से समग्र उत्पादन घटने के कारण अधिकांश किसानों के पास अच्छी ग्रेडिंग वाला प्याज सीमित मात्रा में ही बचा है।

  • आवक का दबाव: किसान पूनम चंद्र चौधरी के अनुसार, मंडियों में एक साथ बड़ी संख्या में प्याज से लदी ट्रॉलियां पहुंचने के कारण व्यापारियों द्वारा बोलियों में दबाव बनाया जा रहा है, जिससे 50 रुपये बिकने योग्य प्याज भी 35 से 40 रुपये प्रति किलो पर ही बिक पा रहा है।

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