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सुकमा: पोलमपल्ली पोटाकेबिन में 47 छात्राओं की बिगड़ी तबीयत; दूषित भोजन-पानी की आशंका, अस्पताल में मची अफरा-तफरी

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सुकमा (छत्तीसगढ़): सुकमा जिले के पोटाकेबिन में छात्राओं के लगातार बीमार पड़ने का एक गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है। पोलमपल्ली स्थित बालिका पोटाकेबिन में बीते 24 अगस्त से शुरू हुआ छात्राओं के बीमार पड़ने का सिलसिला अब बढ़कर 47 तक पहुंच गया है। बड़ी संख्या में छात्राओं में अचानक तेज बुखार, उल्टी और दस्त (Dvomiting & Diarrhea) जैसे लक्षण सामने आने के बाद उन्हें त्वरित उपचार के लिए दोरनापाल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया जा रहा है। लगातार बढ़ते मामलों ने इस आवासीय विद्यालय में रहकर पढ़ाई कर रही करीब 350 छात्राओं के स्वास्थ्य, सुरक्षा और स्वच्छता व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।

🏥 दो दिनों में 47 छात्राएं पहुंचीं अस्पताल: 23 अब भी भर्ती, 1 गंभीर सुकमा रेफर

अस्पताल में भर्ती और स्वास्थ्य स्थिति का विवरण:

  • मरीजों की संख्या में उछाल: शुक्रवार को पोटाकेबिन की 39 छात्राओं को दोरनापाल अस्पताल लाया गया था, जबकि शनिवार सुबह 8 और छात्राओं की तबीयत बिगड़ने से कुल बीमार छात्राओं का आंकड़ा 47 हो गया।

  • उपचार व डिस्चार्ज: प्राथमिक उपचार के बाद स्वास्थ्य में सुधार होने पर कई छात्राओं को वापस भेजा गया, जबकि 23 छात्राएं वर्तमान में दोरनापाल अस्पताल में भर्ती हैं।

  • गंभीर छात्रा रेफर: एक छात्रा की हालत अधिक नाजुक होने के कारण उसे विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी के लिए सुकमा जिला अस्पताल रेफर किया गया है।

❓ बीमारी की वजह बनी पहेली: दूषित भोजन या पेयजल संक्रमण की आशंका

संभावित कारण और तकनीकी जांच:

  • लक्षणों की प्रकृति: छात्राओं में एक साथ उल्टी, दस्त, पेट दर्द और बुखार के लक्षण दिखने से स्वास्थ्य विभाग को फूड पॉइजनिंग या वॉटरबॉर्न इन्फेक्शन (जलजनित संक्रमण) का अंदेशा है।

  • सैंपलिंग और टेस्ट: वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की पैथोलॉजी टीम द्वारा खून, उल्टी और पानी के सैंपल जांच हेतु संकलित किए जा रहे हैं।

🚰 350 छात्राओं के स्वास्थ्य पर संकट: मेस और स्वच्छता व्यवस्था पर उठे सवाल

आवासीय परिसर की व्यवस्थाओं पर उठते सवाल:

  • मेस के खाने की गुणवत्ता: इतने बड़े पैमाने पर बच्चों के बीमार पड़ने के बाद पोटाकेबिन में बनने वाले भोजन की गुणवत्ता और खाद्यान्न के रखरखाव पर सवाल उठ रहे हैं।

  • पेयजल की शुद्धता: पोटाकेबिन परिसर में लगे बोरवेल, पानी की टंकियों और वाटर प्यूरीफायर की नियमित सफाई को लेकर भी जांच की मांग की जा रही है।

📢 परिजनों में आक्रोश व चिंता: प्रशासन से जांच और सख्त कदम उठाने की मांग

अभिभावकों की मांग और प्रशासनिक प्रतिक्रिया:

  • अभिभावकों की चिंता: छात्राओं के लगातार अस्पताल में भर्ती होने से पालकों में गहरा आक्रोश है; उन्होंने मांग की है कि परिसर का संपूर्ण सैनिटाइजेशन कराया जाए और लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई हो।

  • बीईओ (BEO) कोंटा का आधिकारिक बयान: बीईओ चंद्र कुमार यारदा ने बताया, “घटना की सूचना मिलते ही हमने दोरनापाल अस्पताल पहुंचकर डॉक्टरों से बच्चों के स्वास्थ्य की जानकारी ली है। सभी बच्चों का समुचित इलाज जारी है और स्थिति पर निरंतर निगरानी रखी जा रही है। आवश्यकतानुसार उच्च स्तरीय चिकित्सा प्रबंध सुनिश्चित किए जाएंगे।”

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