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‘ट्रस्ट में आंदोलन से जुड़े लोग नहीं’: राम मंदिर विवाद और ‘जैन-जी’ आंदोलन पर बोले भोजपाली बाबा रविंद्र गुप्ता

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नर्मदापुरम/भोपाल (मध्य प्रदेश): अयोध्या राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख सेनानी रहे ‘भोजपाली बाबा’ ने अपनी 7 सफल नर्मदा परिक्रमाएं पूरी करने के बाद अब 8वीं बार मां नर्मदा की पवित्र परिक्रमा शुरू की है।

मूल रूप से मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के रहने वाले भोजपाली बाबा का वास्तविक नाम रविंद्र गुप्ता है। उच्च शिक्षित पृष्ठभूमि से आने वाले बाबा ने दर्शनशास्त्र और मनोविज्ञान (Psychology) में ‘डबल एमए’ किया है और इसके बाद कानून की डिग्री (LLB) हासिल कर लगभग 5 वर्षों तक वकालत की। आजीवन अविवाहित रहने का संकल्प लेने वाले एक सफल वकील से संन्यास की राह चुनने तक का उनका यह सफर अध्यात्म, सेवा और राष्ट्रनिष्ठा का एक अनूठा संगम है।

🚩 राम मंदिर आंदोलन और आजीवन अविवाहित रहने का कठोर संकल्प

विद्यार्थी परिषद से संन्यास तक का सफर:

  • 1992 आंदोलन से जुड़ाव: दिसंबर 1992 से वे सक्रिय रूप से राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े रहे। उस समय वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) भोपाल के महानगर संयोजक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

  • विवाह न करने की प्रतिज्ञा: आंदोलन के दौरान उन्होंने यह कठोर संकल्प लिया था कि जब तक अयोध्या में प्रभु श्री राम का भव्य मंदिर नहीं बन जाएगा, तब तक वे आजीवन विवाह नहीं करेंगे।

  • पारिवारिक कर्तव्य: 1984 के भोपाल गैस कांड के दौरान उनके पिताजी को गंभीर दमा (अस्थमा) हो गया था, जिसके चलते वे वर्षों तक परिवार की सेवा में रहे। वर्ष 2004 में पिता के देहावसान के बाद उन्होंने पूर्ण रूप से गृहस्थ जीवन छोड़ दिया।

🌊 ‘मां नर्मदा बैरागी को वैराग्य देती हैं’: ऐसे मिला संन्यास का मार्ग

आरएसएस प्रचारक से नर्मदा भक्त बनने की यात्रा:

  • संगठनात्मक दायित्व: 90 के दशक में उन्होंने विद्यार्थी परिषद और बजरंग दल में विभिन्न दायित्व संभाले और बाद में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के समर्पित कार्यकर्ता के रूप में कार्य किया।

  • पहली परिक्रमा (2012): वर्ष 2012 में उन्होंने जीवन की पहली नर्मदा परिक्रमा की, जिसके बाद नर्मदा मैया की भक्ति में लीन होकर उन्होंने एक के बाद एक 7 परिक्रमाएं पूरी कर लीं।

  • 2024 प्राण प्रतिष्ठा का आमंत्रण: वर्ष 2017 में सभी औपचारिक सांगठनिक दायित्व छोड़ने के बावजूद, जब 2024 में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा का औपचारिक निमंत्रण उन्हें मिला, तो वे अभिभूत हो गए। उनका कहना है, “मां नर्मदा की असीम कृपा से ही मुझे सच्चा वैराग्य मिला और अब मेरा जीवन मैया के तट पर ही समर्पित है।”

🗣️ मंदिर ट्रस्ट और वर्तमान ‘जैन-जी’ आंदोलन पर भोजपाली बाबा के विचार

समसामयिक मुद्दों पर बेबाक टिप्पणी:

  • मंदिर विवाद पर दर्द: राम मंदिर आंदोलन से जुड़े आर्थिक विवादों पर दुख व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि आंदोलन के संघर्ष में तपे हुए सच्चे कारसेवकों की आत्माएं आहत हैं; ट्रस्ट में ऐसे चेहरों का होना चिंताजनक है जो आंदोलन के भावनात्मक दौर से कभी नहीं जुड़े थे।

  • आंदोलनों पर प्रतिक्रिया: वर्तमान में युवाओं के बीच चल रहे आंदोलनों पर उन्होंने कहा कि समाज को भड़काने वाले तत्वों का उद्देश्य राष्ट्र निर्माण नहीं, बल्कि राजनीतिक सत्ता के लिए माहौल तैयार करना है।

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