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पलामू टाइगर रिजर्व ने 5 जिलों से मांगी लाइसेंसी हथियारों की सूची: शिकार रोकने और वन्यजीव सुरक्षा के लिए बड़ा कदम

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पलामू (झारखंड): पलामू टाइगर रिजर्व (PTR) क्षेत्र में वन्यजीवों की सुरक्षा को पुख्ता करने और अवैध शिकार की घटनाओं पर पूर्ण विराम लगाने के लिए प्रबंधन ने बड़ा कदम उठाया है।

पीटीआर प्रबंधन ने पलामू, गढ़वा, लातेहार, गुमला और लोहरदगा जिलों के उपायुक्तों (DC) को आधिकारिक पत्र लिखकर उनके जिले में जारी किए गए लाइसेंसी हथियारों और लाइसेंस धारकों का पूरा ब्योरा मांगा है। इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि टाइगर रिजर्व क्षेत्र और उसके आस-पास मौजूद हथियारों का दुरुपयोग वन्यजीवों के शिकार के लिए न हो सके।

📋 लातेहार जिले ने सौंपी 10 लाइसेंस की जानकारी, 4 जिलों से रिपोर्ट का इंतजार

जिलों से प्राप्त आंकड़ों और वर्तमान स्थिति:

  • लातेहार की रिपोर्ट: पीटीआर प्रबंधन के पत्र के बाद अब तक केवल लातेहार जिला प्रशासन ने अपनी जानकारी साझा की है, जिसके अनुसार पीटीआर सीमा क्षेत्र में 10 लाइसेंसी हथियार मौजूद हैं।

  • चार जिलों से रिपोर्ट प्रतीक्षित: पलामू, गढ़वा, गुमला और लोहरदगा जिला प्रशासन की ओर से अभी तक संबंधित क्षेत्रों के लाइसेंसी हथियारों की सूची उपलब्ध नहीं कराई गई है।

📜 10 किलोमीटर के दायरे में हथियार लाइसेंस के लिए PTR की सहमति अनिवार्य

वन्यजीव संरक्षण अधिनियम और सुरक्षा गाइडलाइन:

  • सहमति की अनिवार्यता: नियमों के अनुसार, पलामू टाइगर रिजर्व की सीमा से सटे 10 किलोमीटर के दायरे में किसी भी नए हथियार लाइसेंस को जारी करने या नवीनीकरण के लिए पीटीआर के निदेशक या उपनिदेशक स्तर के अधिकारियों की पूर्व सहमति अनिवार्य है।

  • उपायुक्तों को पत्र: पीटीआर प्रबंधन ने सभी 5 जिलों के डीसी को पत्र भेजकर आग्रह किया है कि वे सीमावर्ती क्षेत्रों में हथियार लाइसेंस से जुड़े मामलों में पीटीआर के साथ जानकारी साझा करें और तय नियमों का पालन सुनिश्चित कराएं।

🛡️ ‘शिकार रोकने के लिए हथियारों का डेटा होना जरूरी’: उपनिदेशक प्रजेशकांत जेना

पीटीआर प्रबंधन का आधिकारिक पक्ष:

  • उपनिदेशक का बयान: पलामू टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक प्रजेशकांत जेना ने बताया कि सीमावर्ती सभी 5 जिलों से हथियारों का ब्योरा एकत्र किया जा रहा है ताकि वन विभाग को यह स्पष्ट जानकारी रहे कि संरक्षित क्षेत्र के इर्द-गिर्द कितने हथियार मौजूद हैं।

  • अवैध शिकार पर नजर: इस डेटाबेस के जरिए यह निगरानी रखी जाएगी कि किसी लाइसेंसी हथियार का इस्तेमाल संरक्षित वन्यजीवों के शिकार या किसी गैर-कानूनी गतिविधि में तो नहीं किया जा रहा है।

🌲 इको-सेंसिटिव जोन में सख्त निगरानी, गाइडलाइन का होगा कड़ाई से पालन

पर्यावरण और सुरक्षा से जुड़े मानक:

  • इको-सेंसिटिव जोन पर फोकस: पलामू टाइगर रिजर्व अपने इको-सेंसिटिव जोन को लेकर पूरी तरह सतर्क है और वहां की गतिविधियों पर निरंतर नजर रख रहा है।

  • सख्त नियमों का क्रियान्वयन: रिजर्व के 10 किलोमीटर के दायरे में स्थित लाइसेंसी हथियारों को लेकर केंद्र व राज्य सरकार द्वारा जारी विशेष दिशा-निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन कराया जाएगा।

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