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हरियाणा के राज्य विश्वविद्यालयों में 4 साल से खाली पद होंगे खत्म: वित्त विभाग का सख्त आदेश, बहाली के लिए चाहिए होगी मंजूरी

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चंडीगढ़ (हरियाणा): हरियाणा के राज्य विश्वविद्यालयों में लंबे समय से रिक्त पड़े नए सृजित पदों को लेकर राज्य सरकार और वित्त विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है।

वित्त विभाग ने नए दिशा-निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि यदि विभाग से मंजूरी मिलने के बाद कोई भी नव-सृजित पद 4 वर्षों तक रिक्त या अनभरा रहता है, तो उसे स्वतः समाप्त (Deemed Abolished) माना जा सकता है। इसके साथ ही, चार वर्ष से अधिक समय से खाली पड़े पदों को भरने के लिए अब प्रशासनिक विभागों को वित्त विभाग के समक्ष व्यक्तिगत मामला (केस-टू-केस) प्रस्तुत कर विशेष मंजूरी लेनी होगी।

📜 17 अगस्त 2026 के पत्र से नई व्यवस्था लागू, समयबद्ध भर्ती प्रक्रिया अनिवार्य

विश्वविद्यालयों के संबंध में पुराने दिशा-निर्देशों की विस्तृत समीक्षा के बाद यह सख्त निर्णय लिया गया है:

  • आधिकारिक अधिसूचना: वित्त विभाग द्वारा जारी पत्र के तहत यह नई व्यवस्था राज्य के सभी सरकारी विश्वविद्यालयों में लागू कर दी गई है।

  • स्वीकृत सूची पर नियंत्रण: इस नियम का मुख्य उद्देश्य उन पदों पर रोक लगाना है जिन्हें मंजूरी तो मिल जाती है, लेकिन वर्षों तक बिना भर्ती के केवल स्वीकृत सूची में बनाए रखा जाता है।

  • समयसीमा का पालन: अब सभी राज्य विश्वविद्यालयों को अपने यहां सृजित नए पदों पर समयबद्ध रूप से भर्ती प्रक्रिया शुरू कर उसे पूरा करना होगा।

🔍 4 साल से अधिक पुराने खाली पदों के लिए केस-टू-केस आधार पर निर्णय

लंबे समय से अटकी भर्तियों और रिक्त पदों के लिए प्रक्रिया को और अधिक कड़ा कर दिया गया है:

  • सीधी भर्ती पर रोक: जिन पदों को वित्तीय स्वीकृति मिले 4 वर्ष से अधिक का समय बीत चुका है और वे अब तक नहीं भरे गए हैं, उन्हें सीधे भरने की अनुमति नहीं होगी।

  • औचित्य प्रस्तुत करना जरूरी: प्रशासनिक विभाग को वित्त विभाग के समक्ष फाइल भेजकर यह सिद्ध करना होगा कि उस पद की वर्तमान में क्या उपयोगिता और आवश्यकता है।

  • वित्त विभाग का विवेकाधिकार: वित्त विभाग प्रत्येक मामले की परिस्थितियों और वित्तीय भार का स्वतंत्र विश्लेषण करने के बाद ही पद पुनर्जीवित करने या भरने की अनुमति देगा।

📋 कुलपतियों और विभागाध्यक्षों को भेजे गए निर्देश, 2023 की बाकी शर्तें यथावत

प्रशासनिक अमले को आदेश की प्रति भेजकर सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा गया है:

  • पूर्व आदेशों का संदर्भ: वित्त विभाग ने स्पष्ट किया है कि 6 फरवरी 2023 को जारी निर्देश संख्या 5/6/2002-1B & C की अन्य सभी शर्तें व व्यवस्थाएं पहले की तरह प्रभावी रहेंगी; केवल विश्वविद्यालयों के नव-सृजित रिक्त पदों के प्रावधान में संशोधन किया गया है।

  • सभी अधिकारियों को सूचना: यह पत्र हरियाणा के सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों और राज्य विश्वविद्यालयों के कुलपतियों (VCs) को विधिवत प्रेषित कर दिया गया है।

  • वेबसाइट पर अपलोड: संबंधित कंप्यूटर सेल को आधिकारिक पोर्टल पर इसे सार्वजनिक करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।

📊 वित्तीय अनुशासन और वास्तविक जरूरत की समीक्षा पर रहेगा जोर

इस नए नीतिगत फैसले के दूरगामी प्रभाव विश्वविद्यालय प्रशासन और उच्च शिक्षा व्यवस्था पर दिखाई देंगे:

  • वित्तीय संसाधनों का सही उपयोग: इस व्यवस्था का सीधा उद्देश्य निष्क्रिय पड़े पदों की समीक्षा करना और राज्य के वित्तीय संसाधनों का अनुशासित प्रबंधन करना है।

  • विश्वविद्यालयों पर असर: जिन विश्वविद्यालयों में स्वीकृत पदों पर वर्षों से नियुक्तियां नहीं हुईं, उन्हें अब नए सिरे से स्वीकृति प्रक्रिया से गुजरना होगा।

  • नियमित समीक्षा: इससे विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक स्टाफ की वास्तविक जरूरतों का समय-समय पर ऑडिट और समीक्षा संभव हो सकेगी।

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