दंतेवाड़ा कलेक्ट्रेट में कुत्तों के हमले से बचकर पहुंचा दुर्लभ माउस डियर, वन विभाग ने सुरक्षित रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ा
दंतेवाड़ा (छत्तीसगढ़): बस्तर संभाग अंतर्गत दंतेवाड़ा जिले में बुधवार को वन्यजीवों से जुड़ा एक दुर्लभ और संवेदनशील मामला सामने आया। एक दुर्लभ प्रजाति के माउस डियर (मूषक मृग) पर आवारा कुत्तों के झुंड ने अचानक हमला कर दिया। कुत्तों से अपनी जान बचाकर भागते हुए यह छोटा वन्यजीव सीधे दंतेवाड़ा कलेक्ट्रेट परिसर के भीतर दाखिल हो गया। कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद चौकन्ने कर्मचारियों की नजर जैसे ही इस दुर्लभ जीव पर पड़ी, उन्होंने बिना देरी किए तुरंत स्थानीय वन विभाग को सूचना दी। सूचना मिलते ही वन विभाग की त्वरित रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंच गई।
🩺 वन विभाग की टीम ने किया सुरक्षित रेस्क्यू, प्राथमिक उपचार के बाद रखी निगरानी
वनमंडलाधिकारी (DFO) के कुशल मार्गदर्शन में वन अमले ने तत्परता दिखाते हुए रेस्क्यू अभियान चलाया:
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सुरक्षित तरीके से पकड़ा: वन कर्मियों ने बिना किसी नुकसान के माउस डियर को सुरक्षित रूप से अपने कब्जे में लिया।
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पशु चिकित्सक द्वारा जांच: पशु चिकित्सा अधिकारी को बुलाकर माउस डियर के शरीर पर आई खरोंचों और चोटों की गहन चिकित्सकीय जांच कराई गई और आवश्यक प्राथमिक उपचार दिया गया।
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व्यवहार पर नजर: उपचार के बाद वन विभाग के कर्मचारियों ने कुछ समय तक उसके स्वास्थ्य, गतिविधि और सामान्य व्यवहार पर लगातार नजर रखी।
🌲 स्वास्थ्य परीक्षण में फिट मिलने के बाद बचेली के घने जंगल में छोड़ा गया
चिकित्सीय निगरानी पूरी होने के बाद वन्यजीव को उसके प्राकृतिक वातावरण में वापस लौटाया गया:
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पूरी तरह स्वस्थ: विस्तृत स्वास्थ्य परीक्षण के उपरांत जब पशु चिकित्सक ने माउस डियर को पूरी तरह स्वस्थ और सामान्य घोषित कर दिया, तब उसे छोड़ने की प्रक्रिया शुरू हुई।
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बचेली वन क्षेत्र में वापसी: वन विभाग की विशेष टीम ने माउस डियर को बचेली वन परिक्षेत्र के अनुकूल व सुरक्षित प्राकृतिक आवास में ले जाकर स्वच्छंद विचरण के लिए छोड़ दिया।
📜 वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची-1 में शामिल है दुर्लभ ‘माउस डियर’
माउस डियर भारत में पाए जाने वाले सबसे छोटे खुर वाले स्तनधारी जीवों में से एक है:
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अत्यंत दुर्लभ प्रजाति: माउस डियर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की सर्वोच्च ‘अनुसूची-I’ (Schedule-I) में सूचीबद्ध एक अत्यंत संरक्षित वन्यजीव है।
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संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता: राष्ट्रीय स्तर पर इसके संरक्षण और सुरक्षा को विशेष प्राथमिकता दी जाती है। वन विभाग की समय पर सक्रियता से इस दुर्लभ प्रजाति के वन्यजीव की जान बचाई जा सकी।
📢 रिहायशी इलाकों में वन्यजीव दिखने पर वन विभाग को दें सूचना, न करें छेड़छाड़
वन विभाग ने आम नागरिकों और ग्रामीणों से वन्यजीव सुरक्षा को लेकर विशेष सावधानी बरतने की अपील की है:
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पास जाने या घेरने से बचें: आबादी वाले क्षेत्रों में यदि कोई भी जंगली जानवर या दुर्लभ जीव दिखाई दे, तो उसे पकड़ने, भगाने या अनावश्यक रूप से घेरने का प्रयास कतई न करें।
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चोट लगने का खतरा: मानवीय हस्तक्षेप और भीड़ देखकर वन्यजीव भयभीत हो जाते हैं और हड़बड़ाहट में स्वयं को गंभीर चोट पहुंचा सकते हैं।
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तत्काल सूचना दें: वन्यजीव दिखने पर तत्काल निकटतम वन चौकी, रेंज कार्यालय या वन अमले को सूचित करें, ताकि विशेषज्ञों द्वारा उनका सुरक्षित रेस्क्यू सुनिश्चित किया जा सके।
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