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सावधान! असली जैसे दिखने वाले ‘फेक UPI ऐप’ से हो रही ठगी: स्क्रीन पर दिखता है सक्सेस मैसेज, खाते में नहीं आते पैसे

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यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने दैनिक जीवन में डिजिटल लेनदेन को बेहद सरल और त्वरित बना दिया है। हालांकि, इसके व्यापक प्रसार के साथ ही साइबर जालसाजों ने ठगी के नए और परिष्कृत तरीके ईजाद कर लिए हैं। अब ठग हूबहू असली जैसे दिखने वाले ‘फेक यूपीआई ऐप’ के माध्यम से दुकानदारों और आम नागरिकों को फर्जी भुगतान का झांसा दे रहे हैं। इन क्लोन ऐप्स में भुगतान सफल (Payment Successful) होने का विजुअल मैसेज और ऑडियो साउंड तक सुनाई देता है, किंतु वास्तविकता में राशि विक्रेता या प्राप्तकर्ता के बैंक खाते में कभी जमा नहीं होती। ऐसे में केवल स्क्रीन या साउंड बॉक्स के बजाय बैंक खाते में वास्तविक क्रेडिट की पुष्टि करना आवश्यक हो गया है।

📱 हूबहू असली जैसे दिखते हैं फर्जी ऐप्स, टेलीग्राम के जरिए फैलाया जा रहा जाल

साइबर फ्रॉड के लिए तैयार किए गए ये नकली यूपीआई ऐप्स इंटरफेस और डिजाइन के मामले में बिल्कुल ओरिजिनल ऐप्स की तरह प्रतीत होते हैं।

जालसाज Google Pay, PhonePe और Paytm जैसे लोकप्रिय और विश्वसनीय यूपीआई प्लेटफॉर्म्स के क्लोन ऐप्स का उपयोग कर रहे हैं। इन फर्जी ऐप्स में ट्रांजैक्शन पूरा होते ही स्क्रीन पर सक्सेसफुल पेमेंट का नोटिफिकेशन, ट्रांजैक्शन आईडी और साउंड नोटिफिकेशन तक एक्टिव हो जाता है। जांच में यह भी सामने आया है कि इन मैलिशियस ऐप्स के एपीके (APK) लिंक्स टेलीग्राम और अन्य सोशल मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के जरिए प्रसारित किए जा रहे हैं। खासकर भीड़भाड़ वाले छोटे दुकानदारों, खुदरा व्यापारियों और दैनिक सेवा प्रदाताओं को इसका प्रमुख शिकार बनाया जा रहा है।

⚠️ स्क्रीन पर दिखा पेमेंट पर बैंक में नहीं पहुंचे पैसे: ऐसे पहचानें फर्जीवाड़ा

जालसाज किसी भी दुकान पर खरीदारी के बाद काउंटर पर लगे क्यूआर (QR) कोड को अपने फर्जी ऐप से स्कैन करने का नाटक करते हैं।

इसके बाद वे मोबाइल स्क्रीन पर पेमेंट सक्सेस का फर्जी स्क्रीनशॉट या साउंड अलर्ट दिखा देते हैं, जिससे दुकानदार को विश्वास हो जाता है कि भुगतान प्राप्त हो चुका है। हालांकि, तकनीकी रूप से कोई भी वित्तीय लेनदेन नहीं हुआ होता है। इसलिए किसी भी ग्राहक द्वारा दिखाए गए मोबाइल स्क्रीनशॉट या ऐप साउंड को अंतिम प्रमाण न मानें। राशि प्राप्त होने के बाद हमेशा अपने मूल यूपीआई ऐप की ‘पासबुक/हिस्ट्री’ अथवा बैंक के आधिकारिक SMS व स्टेटमेंट में जाकर क्रेडिट बैलेंस की पुष्टि करें। जब तक खाते में वास्तविक पैसे न दिखें, तब तक सामान सौंपने में जल्दबाजी न करें।

🛡️ यूपीआई का उपयोग करते समय हमेशा रखें इन सुरक्षा नियमों का ध्यान

डिजिटल लेनदेन को सुरक्षित बनाए रखने के लिए कुछ बुनियादी साइबर सुरक्षा नियमों का पालन अनिवार्य है:

  • पिन की गोपनीयता: अपना यूपीआई पिन (UPI PIN) कभी किसी के साथ साझा न करें। ध्यान रहे कि पिन का उपयोग केवल पैसे भेजने (डेबिट) के लिए होता है, पैसे प्राप्त (क्रेडिट) करने के लिए कभी पिन दर्ज करने की आवश्यकता नहीं होती।

  • विवरण की जांच: भुगतान करने से पहले हमेशा प्राप्तकर्ता का पंजीकृत नाम और यूपीआई आईडी स्क्रीन पर अवश्य क्रॉस-वेरिफाई करें।

  • आधिकारिक प्लेटफॉर्म: यूपीआई ऐप्स केवल गूगल प्ले स्टोर (Google Play Store) या एप्पल ऐप स्टोर (Apple App Store) जैसे प्रामाणिक स्रोतों से ही डाउनलोड करें। किसी अज्ञात लिंक या लुभावने कैशबैक के लालच में थर्ड-पार्टी APK फाइल इंस्टॉल न करें।

  • नेटवर्क व डिवाइस सुरक्षा: सार्वजनिक, खुले या असुरक्षित वाई-फाई नेटवर्क पर यूपीआई लेनदेन करने से बचें और अपने फोन व पेमेंट ऐप्स पर बायोमेट्रिक या मजबूत स्क्रीन लॉक लगाकर रखें।

🚨 संदिग्ध लेनदेन होने पर तुरंत दर्ज कराएं शिकायत, डायल करें 1930

अपने बैंक खातों और यूपीआई लेनदेन इतिहास (Transaction History) की नियमित रूप से समीक्षा करते रहना अत्यंत आवश्यक है।

यदि खाते में कोई भी अज्ञात, अनाधिकृत या संदिग्ध डेबिट/क्रेडिट दिखाई देता है, तो बिना विलंब किए तुरंत अपने बैंक के हेल्पलाइन नंबर पर सूचित करें और संबंधित खाते या यूपीआई सेवाओं को अस्थायी रूप से ब्लॉक कराएं। इसके अतिरिक्त, वित्तीय साइबर फ्रॉड की स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें अथवा आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in पर जाकर अपनी शिकायत समय रहते दर्ज कराएं ताकि धन की त्वरित रिकवरी की जा सके।

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