Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
बख्तियारपुर-मोकामा फोरलेन पर भीषण सड़क हादसा, स्कॉर्पियो ने बुलेट सवार दारोगा और उनकी पत्नी को रौंदा महाराष्ट्र में 36,211 कंपनियों के बंद होने की खबरों पर CM देवेंद्र फडणवीस का बड़ा स्पष्टीकरण, शरद पव... मुंबई में टैक्सी-ऑटो और कैब ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य: 15 अगस्त से नया नियम लागू, नहीं सी... ऑस्ट्रेलियाई धरती पर तंजीद हसन ने रचा इतिहास: टेस्ट शतक जड़ने वाले पहले बांग्लादेशी बने, डार्विन में... व्हाट्सएप ला रहा है धांसू AI फीचर: संदिग्ध चैट और फ्रॉड मैसेज पर तुरंत मिलेगा अलर्ट, प्राइवेसी रहेगी... 15 अगस्त को मनाई जाएगी हरियाली तीज, सुहागिन महिलाओं के जीवन में लाती है अखंड सौभाग्य बदलती लाइफस्टाइल में डाइट से गायब हो रहा फाइबर, पाचन और समग्र स्वास्थ्य के लिए है बेहद जरूरी Batwara 1947 Review: सालों बाद साथ आई सनी देओल और राजकुमार संतोषी की जोड़ी, नफरत के दौर में इंसानियत... शेयर बाजार की उथल-पुथल में FPIs का बड़ा धमाका: निफ्टी-सेंसेक्स को पछाड़कर कमाया 37% तक रिटर्न, जानिए... बलूचिस्तान में स्वतंत्रता दिवस पर खूनी एयरस्ट्राइक: मासूमों के कत्लेआम पर वाशिंगटन की चुप्पी पर उठे ...

बदलती लाइफस्टाइल में डाइट से गायब हो रहा फाइबर, पाचन और समग्र स्वास्थ्य के लिए है बेहद जरूरी

3

हेल्थ डेस्क: आधुनिक जीवनशैली, भागदौड़ भरी दिनचर्या और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खानपान की वजह से वर्तमान में अधिकांश लोगों की दैनिक थाली से आवश्यक डाइटरी फाइबर (Dietary Fiber) गायब होता जा रहा है।

मानव शरीर के समुचित संचालन और आंतरिक अंगों के स्वस्थ कार्यप्रणाली के लिए कई पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है, जिनमें फाइबर एक अत्यंत महत्वपूर्ण तत्व है। भोजन में पर्याप्त फाइबर न होने पर लंबे समय तक कब्ज (Constipation), पेट फूलना (Bloating), अपच और आंतों से जुड़ी कई गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। वैज्ञानिक रूप से फाइबर पौधों से प्राप्त होने वाला एक विशेष प्रकार का जटिल कार्बोहाइड्रेट है, जिसे हमारा पाचन तंत्र पूरी तरह पचा नहीं पाता, बल्कि यह आंतों की सफाई और मेटाबॉलिज्म को दुरुस्त रखने में प्रमुख भूमिका निभाता है।

📊 उम्र और लिंग के अनुसार रोजाना कितने फाइबर की होती है जरूरत? मेयो क्लिनिक की रिपोर्ट

प्रसिद्ध वैश्विक स्वास्थ्य संस्थान मेयो क्लिनिक (Mayo Clinic) के दिशानिर्देशों के अनुसार, शरीर को सुचारू रूप से कार्य करने के लिए आयु और लिंग के आधार पर फाइबर की दैनिक मात्रा निर्धारित की गई है:

  • 50 वर्ष या उससे कम उम्र की महिलाएं: प्रतिदिन लगभग 25 ग्राम फाइबर।

  • 50 वर्ष या उससे कम उम्र के पुरुष: प्रतिदिन लगभग 38 ग्राम फाइबर।

  • 50 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाएं: प्रतिदिन लगभग 21 ग्राम फाइबर।

  • 50 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुष: प्रतिदिन लगभग 30 ग्राम फाइबर।

विशेषज्ञों का कहना है कि शारीरिक संरचना और व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थितियों के अनुसार हर व्यक्ति की जरूरत में थोड़ा अंतर हो सकता है। इसलिए डाइट में फाइबर की मात्रा धीरे-धीरे बढ़ानी चाहिए और इसके साथ प्रचुर मात्रा में जल का सेवन सुनिश्चित करना अनिवार्य है।

❤️ कब्ज से मुक्ति, वजन नियंत्रण और दिल की सेहत: जानिए फाइबर के चमत्कारी फायदे

भोजन में पर्याप्त फाइबर शामिल करने से शरीर को कई प्रकार के प्रत्यक्ष स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होते हैं:

  • पाचन तंत्र में सुधार: फाइबर आंतों में पहुंचकर मल को नरम, भारी और सुगठित बनाता है, जिससे आंतों की गतिशीलता (Bowel Movement) बेहतर होती है और पुरानी कब्ज की समस्या से प्राकृतिक राहत मिलती है।

  • वजन नियंत्रण (Weight Management): फाइबर युक्त भोजन पचने में समय लेता है, जिससे पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है। इससे अस्वस्थ क्रेविंग कम होती है और वजन घटाने में मदद मिलती है।

  • ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण: घुलनशील (Soluble) फाइबर पानी में घुलकर जेल जैसा रूप ले लेता है, जिससे ग्लूकोज का अवशोषण धीमा होता है और ब्लड शुगर अचानक नहीं बढ़ता। साथ ही यह धमनियों में खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) के स्तर को घटाकर हृदय रोग के जोखिम को कम करता है।

🍎 फाइबर के सबसे बेहतरीन प्राकृतिक स्रोत: फल, दालें, नट्स और साबुत अनाज

डाइटरी फाइबर मुख्य रूप से संपूर्ण वनस्पति आधारित प्राकृतिक आहार में भरपूर मात्रा में पाया जाता है।

सेब, नाशपाती, रास्पबेरी, संतरा, हरी पत्तेदार सब्जियां, हरी मटर, बीन्स, दालें, बादाम, अखरोट और चिया सीड्स इसके उत्कृष्ट स्रोत हैं। सेब और नाशपाती को अच्छी तरह धोकर छिलके सहित खाना अधिक गुणकारी होता है। मेयो क्लिनिक के आंकड़ों के अनुसार, एक मध्यम आकार के नाशपाती में लगभग 5.5 ग्राम, एक मध्यम सेब में करीब 4.4 ग्राम और एक कप रास्पबेरी में लगभग 8 ग्राम फाइबर होता है। वहीं, एक कप पकी हुई साबुत दाल से शरीर को करीब 15.6 ग्राम फाइबर प्राप्त होता है। जब भी बाजार से साबुत अनाज (Oats, Whole Wheat) खरीदें, तो पैकेट पर फाइबर कंटेंट की जांच अवश्य करें।

⚠️ डाइट में फाइबर शामिल करते समय रखें इन सावधानियों का ध्यान

यदि आपकी डाइट में वर्तमान में फाइबर कम है, तो इसकी मात्रा को अचानक बहुत अधिक न बढ़ाएं।

फाइबर की मात्रा एकाएक बढ़ाने से पेट में अतिरिक्त गैस, भारीपन और मरोड़ (ऐंठन) की समस्या हो सकती है। हमेशा फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों की मात्रा को धीरे-धीरे चरणबद्ध तरीके से बढ़ाएं। इसके साथ ही दिन भर में पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, क्योंकि पानी के बिना फाइबर आंतों में सख्त हो सकता है। जिन व्यक्तियों को अल्सर, अल्सरेटिव कोलाइटिस या आंतों से संबंधित अन्य विशिष्ट बीमारियां हैं, उन्हें अपने आहार में किसी भी प्रकार का बदलाव करने से पूर्व योग्य चिकित्सक या क्लीनिकल डाइटिशियन से परामर्श अवश्य लेना चाहिए।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.