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मध्य प्रदेश में अब रातभर गुलजार रहेंगे बाजार, राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने ‘मध्य प्रदेश कार्यस्थल सशक्तिकरण संहिता 2026’ को दी हरी झंडी

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भोपाल (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश में होटल, मॉल, रेस्टोरेंट और अन्य कमर्शियल (व्यावसायिक) प्रतिष्ठान अब केवल दिन में ही नहीं, बल्कि संपूर्ण रात्रि (24 घंटे और सातों दिन) खुले रह सकेंगे।

मध्य प्रदेश विधानसभा द्वारा विधेयक पारित किए जाने के उपरांत अब महामहिम राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने ‘मध्य प्रदेश कार्यस्थल सशक्तिकरण संहिता 2026’ को अपनी औपचारिक स्वीकृति प्रदान कर दी है। इसके साथ ही यह ऐतिहासिक अधिनियम संपूर्ण प्रदेश में प्रभावी रूप से लागू हो गया है। इस कदम से जहाँ आम नागरिकों को रात्रि काल में भी खरीदारी व खान-पान की सुविधाएं मिलेंगी, वहीं युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। हालांकि, मदिरा (शराब) दुकानों की समयावधि का निर्धारण पूर्ववत स्थानीय प्रशासन द्वारा ही किया जाएगा।

📋 जीवन में सिर्फ एक बार कराना होगा रजिस्ट्रेशन, रिन्यूअल के झंझट से मिली मुक्ति

राज्य सरकार ने नए अधिनियम के अंतर्गत व्यवसायियों एवं उद्यमियों के लिए व्यापार करने की प्रक्रिया (Ease of Doing Business) को अत्यधिक सरल बना दिया है।

अब प्रतिष्ठान चालकों को बार-बार रजिस्ट्रेशन नवीनीकृत (Renew) नहीं कराना पड़ेगा। संस्थानों को केवल नियमानुसार संबंधित श्रम विभाग को अपने व्यवसाय की सूचना देनी होगी, जिसके उपरांत उन्हें स्थाई पंजीयन प्रमाण पत्र निर्गत कर दिया जाएगा। यदि भविष्य में कोई संस्थान स्थाई रूप से बंद होता है, तो केवल लिखित सूचना प्रेषित करने पर रजिस्ट्रेशन निरस्त कर दिया जाएगा।

⏰ काम के घंटे लेबर लॉ के अनुसार ही तय, ओवर-टाइम का देना होगा अतिरिक्त भुगतान

यद्यपि संस्थानों को 24 घंटे संचालित करने की अनुमति प्रदान कर दी गई है, किंतु नियोक्ताओं को श्रम विभाग (Labour Department) के न्यूनतम कार्य घंटों के नियमों का कड़ाई से अनुपालन करना अनिवार्य होगा।

किसी भी कर्मचारी से प्रतिदिन के निर्धारित घंटों तथा साप्ताहिक अधिकतम 48 घंटों से अधिक कार्य कराने की अनुमति नहीं होगी। रात्रि कालीन शिफ्ट में महिलाओं को भी कार्य करने की अनुमति होगी, किंतु इसके लिए नियोक्ता को परिसर में पुख्ता सुरक्षा, सुरक्षित परिवहन (Cab Facility) एवं मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करानी होंगी। निर्धारित घंटों से अतिरिक्त कार्य कराने की स्थिति में कर्मचारी को अनिवार्य रूप से ओवरटाइम वेतन देना होगा।

🚫 कर्मचारियों के मूल दस्तावेज रखने पर पूर्ण प्रतिबंध, कार्यस्थल पर सुरक्षा मानक अनिवार्य

अक्सर देखने में आता था कि नियोक्ता कर्मचारियों को बंधुआ बनाने या नौकरी छोड़ने से रोकने हेतु उनके मूल शैक्षणिक व व्यक्तिगत दस्तावेज (Original Documents) अपने पास जमा कर लेते थे।

नई संहिता में इस कुप्रथा पर पूर्णतः प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसके अतिरिक्त, नई संहिता में कर्मचारियों के स्वास्थ्य एवं कार्यस्थल सुरक्षा के संबंध में कड़े प्रावधान किए गए हैं। प्रत्येक प्रतिष्ठान को कार्यस्थल पर उच्च स्तरीय साफ-सफाई, अग्निशमन उपकरण तथा आपातकालीन स्थिति से बचाव हेतु पर्याप्त व आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की व्यवस्था करनी होगी।

⚖️ शिकायतों के निवारण हेतु गठित होंगी विशेष समितियां, नियम उल्लंघन पर होगी सख्त कानूनी कार्रवाई

कर्मचारियों की समस्याओं एवं श्रम विवादों के त्वरित एवं निष्पक्ष निवारण हेतु संस्थान व प्रशासनिक स्तर पर विशेष शिकायत निवारण समितियों का गठन किया जाएगा।

कर्मचारी अपनी शिकायतों को सर्वप्रथम आंतरिक समिति तथा तत्पश्चात प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष दर्ज करा सकेंगे। श्रम विभाग के निरीक्षकों को यह सर्वाधिकार होगा कि वे औचक निरीक्षण (Surprise Inspection) कर प्रतिष्ठान के रिकॉर्ड एवं दस्तावेजों की जांच कर सकें। जांच के दौरान यदि लेबर लॉ या सुरक्षा मानकों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित संस्थान व प्रबंधन के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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