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‘अपराध से नफरत करो, अपराधी से नहीं’: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, कैदियों के बनेंगे पहचान पत्र, राशन कार्ड और बैंक KYC

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जबलपुर (मध्य प्रदेश): “अपराध से नफरत करो, अपराधी से नहीं”—कानून की यह स्थापित कसौटी अक्सर अदालती बहसों तक ही सीमित रह जाती है। किंतु मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इस मानवीय विचार को धरातल पर उतारने का अभूतपूर्व कार्य किया है। जेल की चारदीवारी में बंद कैदियों के मानवाधिकारों और उनके परिवारों की आर्थिक बेबसी को दृष्टिगत रखते हुए हाईकोर्ट ने एक अत्यंत संवेदनशील व ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है। अदालत ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया है कि जेलों में बंद विचाराधीन व सजायाफ्ता कैदियों के लिए विशेष शिविर आयोजित कर उनके पहचान पत्र, राशन कार्ड और बैंक खातों की KYC प्रक्रिया प्राथमिकता के आधार पर पूरी कराई जाए।

📅 मुख्य सचिव के माध्यम से होगी अभियान की निगरानी, हर महीने की 16 तारीख को अदालत में पेश होगी प्रगति रिपोर्ट

जस्टिस विवेक अग्रवाल की पीठ में इस अत्यंत संवेदनशील प्रकरण की सुनवाई संपन्न हुई।

कोर्ट ने इस जनकल्याणकारी अभियान को सतत जारी रखने के निर्देश देते हुए प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों से प्रगति की नियमित रिपोर्ट तलब की है। प्रथम प्रगति रिपोर्ट 16 सितंबर 2026 को अदालत के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। पीठ ने निर्देशित किया कि अभियान की निगरानी मुख्य सचिव के माध्यम से की जाएगी और प्रत्येक माह की 16 तारीख को प्रगति रिपोर्ट कोर्ट में पेश करनी होगी। यदि 16 तारीख को राजकीय अवकाश रहता है, तो रिपोर्ट अगले कार्यदिवस पर प्रस्तुत की जाएगी।

⚖️ कैंसर पीड़ित बेटे के इलाज हेतु कैदी प्रहलाद विश्वकर्मा ने लगाई थी याचिका, सामने आया बड़ा मानवीय संकट

इस ऐतिहासिक न्यायिक पहल की शुरुआत प्रहलाद प्रसाद विश्वकर्मा नामक कैदी की सजा निलंबन याचिका से हुई।

याचिकाकर्ता ने अदालत को अवगत कराया कि उसका पुत्र ब्लड कैंसर जैसी प्राणघातक बीमारी से ग्रस्त है और एम्स (AIIMS) भोपाल में उसका इलाज चल रहा है। प्रहलाद की सबसे बड़ी पीड़ा यह थी कि बायोमीट्रिक अपडेट और KYC न होने के कारण उसका बैंक खाता निष्क्रिय (Inoperative) पड़ा है, जिससे उसका परिवार बच्चे के जीवनरक्षक इलाज के लिए जमा पूंजी भी नहीं निकाल पा रहा है। हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए बच्चे की मेडिकल रिपोर्ट तलब की है और आगामी सप्ताह सुनवाई निश्चित की है।

🏛️ प्रशासनिक ढिलाई पर कोर्ट का कड़ा रुख, बाल सुधार गृहों व वृद्धाश्रमों तक में 15 दिनों में शिविर शुरू करने के निर्देश

अदालत ने प्रशासनिक शिथिलता पर कड़ा रुख अपनाते हुए मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि सभी जिला कलेक्टरों के माध्यम से एक व्यापक अभियान चलाया जाए।

यह अभियान केवल सेंट्रल या डिस्ट्रिक्ट जेलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बाल सुधार गृह, बालिका सुधार गृह, रिमांड होम और वृद्धाश्रमों में भी आयोजित किया जाएगा। इन शिविरों में पहचान पत्र, राशन कार्ड निर्गमन और बैंक खाते की KYC अद्यतन करने का कार्य प्राथमिकता पर होगा। हाईकोर्ट ने अपेक्षा व्यक्त की है कि यह प्रक्रिया अगले 15 दिनों के भीतर प्रारंभ कर दी जाए।

📜 फैसला देशभर में लागू करने हेतु NALSA को आदेश की प्रति भेजने के निर्देश, जेल सुधारों में नया मील का पत्थर

जस्टिस विवेक अग्रवाल की पीठ ने इस फैसले के व्यापक प्रभाव को ध्यान में रखते हुए आदेश की प्रति राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (NALSA) और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी के सचिवों को भेजने के निर्देश दिए हैं।

अदालत ने कहा कि यदि NALSA के सचिव उचित समझें, तो इस फैसले की भावना को देश के अन्य राज्यों की जेलों में भी लागू करने हेतु सर्कुलेट कर सकते हैं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि हाईकोर्ट का यह ऐतिहासिक कदम देश में जेल सुधारों और कैदियों के मानवाधिकारों की दिशा में एक नया मील का पत्थर सिद्ध होगा।

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