ग्वालियर (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर की खस्ताहाल और बदहाल सड़कों को लेकर कई बार नगर निगम को फटकार लगा चुका हाईकोर्ट अब खुद शहर की सड़कों की निष्पक्ष जांच कराएगा।
इसके लिए हाईकोर्ट द्वारा नगर निगम से सड़कों के निर्माण और रखरखाव से जुड़ा पिछले 6 वर्षों का पूरा रिकॉर्ड तलब किया गया है। अदालत ने इन रिकॉर्ड्स और दस्तावेजों को प्रस्तुत करने के लिए नगर निगम प्रशासन को मात्र एक दिन की मोहलत दी है।
❓ नगर निगम कमिश्नर से हाईकोर्ट ने पूछा- ‘क्या आपने ग्वालियर में सुरंग वाली सड़क देखी है?’
ग्वालियर हाईकोर्ट बेंच में शहर की जर्जर सड़कों को लेकर दायर की गई एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए मंगलवार को अदालत ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गहरी नाराजगी व्यक्त की।
सुनवाई के दौरान कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए नगर निगम कमिश्नर संघ प्रिय से जस्टिस ने तल्ख टिप्पणी करते हुए पूछा कि क्या उन्होंने ग्वालियर में सड़कों वाली सुरंग देखी है? इस पर नगर निगम कमिश्नर ने सफाई देते हुए अदालत को अवगत कराया कि ग्वालियर के संबंधित इलाके में वर्ष 2023 में स्टॉर्म वाटर निकासी के लिए एक पाइपलाइन डाली गई थी, जिससे यह स्थिति निर्मित हुई।
📑 सड़कों की गुणवत्ता जांचने के लिए विशेष पैनल गठित, हाईकोर्ट को सौंपी जाएगी विस्तृत रिपोर्ट
याचिकाकर्ता एडवोकेट अवधेश सिंह तोमर ने बताया कि, “सड़कों की गुणवत्ता और निर्माण में भारी अनियमितताओं को लेकर हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने खुद संज्ञान लेते हुए जांच कराने की बात कही है। इसके लिए एक विशेष पैनल गठित किया गया है।”
इस जांच पैनल में हाईकोर्ट की तरफ से एक अधिवक्ता और नगर निगम के एक अधिवक्ता शामिल रहेंगे। इनके साथ ही दो तकनीकी विशेषज्ञ (Technical Experts) भी पैनल के सदस्य होंगे, जो सड़कों के भौतिक निरीक्षण और गुणवत्ता जांच के बाद अपनी विस्तृत रिपोर्ट सीधे हाईकोर्ट को सौंपेंगे।
🔬 2020 के बाद बनी सड़कों की होगी सैंपलिंग, जांच के समय नगर निगम अधिकारियों की मौजूदगी पर रोक
हाईकोर्ट द्वारा कराई जा रही इस जांच में सड़कों की निर्माण गुणवत्ता के साथ-साथ उन पर हुए सरकारी खर्च का ब्योरा भी मांगा गया है।
अदालत के निर्देशानुसार नगर निगम को हर बदहाल सड़क की ‘मेजरमेंट बुक’ (MB) हाईकोर्ट में जमा करानी होगी। इसके साथ ही वर्ष 2020 के बाद बनाई गई सभी प्रमुख सड़कों की सैंपलिंग (नमूने की जांच) विशेष दल द्वारा कराई जाएगी, जिससे सड़क निर्माण के तय मानकों और सामग्री की गुणवत्ता का सटीक पता चल सके। उच्च न्यायालय ने कड़ा आदेश जारी किया है कि जिस समय पैनल सड़कों का निरीक्षण और सैंपलिंग करेगा, उस दौरान नगर निगम का कोई भी अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं रहेगा और न ही कोई दखल देगा।
📅 13 अगस्त को होगी मामले की अगली सुनवाई, प्रस्तुत करना होगा सभी सड़कों का ब्योरा
याचिकाकर्ता एडवोकेट अवधेश सिंह तोमर के अनुसार, अदालत ने नगर निगम को अगली सुनवाई के दौरान सभी मांगे गए रिकॉर्ड्स और मेजरमेंट बुक जमा करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं।
मामले की अगली सुनवाई 13 अगस्त को होना तय की गई है। शहरवासियों और याचिकाकर्ता को उम्मीद है कि अब खुद हाईकोर्ट के हस्तक्षेप से सड़कों के निर्माण में हुए कथित भ्रष्टाचार, लीपापोती और प्रशासनिक लापरवाही का पर्दाफाश होगा।
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